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बच्चों में गुर्दे की बीमारी लाइलाज नहीं
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kidney diseas
- फोटो : AU
प्रयागराज। अभिभावकों में जागरूकता की कमी से गुर्दा संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अब इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चों ने गुर्दे की बीमारी लाइलाज नहीं है। बच्चों के शरीर में सूजन हो, पेशाब में जलन होती हो या खून आता हो तो ये लक्षण गुर्दा रोग के हो सकते हैं।
एमएमएन मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रेन अस्पताल और बाल्य चिकित्सा एकेडमी की ओर से रविवार को यह विचार विशेषज्ञों ने व्यक्त किए। पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी विषयक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. एमवी सिंह ने कहा कि बच्चों में गुर्दा रोग हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर तुरंत उपचार शुरू करना चाहिए। यहां इसका इलाज संभव है। डॉ. राजीव शरण ने कहा कि गुर्दा रोग पीड़ित बच्चों के उपचार में देरी उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बाल्य एकेडमी की अध्यक्ष डॉ. इशिता बनर्जी ने बताया कि बच्चों में गुर्दा रोग का बढ़ने का कारण जागरूकता में कमी है। उन्होंने प्रदूषण और संक्रमण को इसके लिए जिम्मेदार बताया। डॉ. रुचि राय ने पीड़ित बच्चों में गुर्दे की बीमारियों के निदान के लिए कराई जाने वाली जांचों के बारे में जानकारी दी। डॉ. ओपी मिश्रा, डॉ. स्वाति भारद्वाज ने रोग के प्रमुख लक्षणों और इलाज से संबंधित जानकारी दी।
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विशाखापट्टनम से आए डॉ. रंजीत थरगोनर ने बच्चों में जन्मजात गुर्दे संबंधी बीमारी के निदान पर चर्चा की। बताया कि एक धार में पेशाब का न होना इस बीमारी का संकेत है। सौ से अधिक प्रतिभागियों का एकेडमी अध्यक्ष डॉ. पी मूरथी ने स्वागत और सचिव डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. नेहा दुआ, डॉ. नवीन कुमार ने किया।
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एमएमएन मेडिकल कॉलेज के चिल्ड्रेन अस्पताल और बाल्य चिकित्सा एकेडमी की ओर से रविवार को यह विचार विशेषज्ञों ने व्यक्त किए। पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी विषयक सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. एमवी सिंह ने कहा कि बच्चों में गुर्दा रोग हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर तुरंत उपचार शुरू करना चाहिए। यहां इसका इलाज संभव है। डॉ. राजीव शरण ने कहा कि गुर्दा रोग पीड़ित बच्चों के उपचार में देरी उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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बाल्य एकेडमी की अध्यक्ष डॉ. इशिता बनर्जी ने बताया कि बच्चों में गुर्दा रोग का बढ़ने का कारण जागरूकता में कमी है। उन्होंने प्रदूषण और संक्रमण को इसके लिए जिम्मेदार बताया। डॉ. रुचि राय ने पीड़ित बच्चों में गुर्दे की बीमारियों के निदान के लिए कराई जाने वाली जांचों के बारे में जानकारी दी। डॉ. ओपी मिश्रा, डॉ. स्वाति भारद्वाज ने रोग के प्रमुख लक्षणों और इलाज से संबंधित जानकारी दी।
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विशाखापट्टनम से आए डॉ. रंजीत थरगोनर ने बच्चों में जन्मजात गुर्दे संबंधी बीमारी के निदान पर चर्चा की। बताया कि एक धार में पेशाब का न होना इस बीमारी का संकेत है। सौ से अधिक प्रतिभागियों का एकेडमी अध्यक्ष डॉ. पी मूरथी ने स्वागत और सचिव डॉ. अनुभा श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. नेहा दुआ, डॉ. नवीन कुमार ने किया।