प्रयागराजः जवाहर यादव हत्याकांड में करवरिया बंधू दोषी करार, चार नवंबर को सुनाई जाएगी सजा
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जिले के चर्चित जवाहर यादव उर्फ पंडित हत्याकांड में इलाहाबाद की जिला अदालत ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया उनके भाई पूर्व विधायक उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया तथा रिश्तेदार रामचंद्र उर्फ कल्लू को दोषी करार दिया है। हालांकि, सजा पर तत्काल कोई आदेश नहीं दिया है। इस पर चार नवंबर को सुनवाई के बाद आदेश दिया जाएगा।
बृहस्पतिवार को मुकदमे की सुनवाई कर रहे अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बद्री विशाल पांडेय ने सभी अभियुक्तों को दोष सिद्ध करार देने के बाद अदालत की कार्यवाही कुछ देर के लिए रोक दी। कुछ देर बाद सजा पर फैसला सुनाने के लिए चार नवंबर की तिथि घोषित की गई।
फैसला सुनाए जाने के समय नैनी जेल में बंद चारों अभियुक्त कपिलमुनि, उदयभान, सूरजभान और रामचंद्र अदालत में मौजूद थे। जबकि, अदालत के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी फैसला जानने के लिए पहुंचे थे।
हालांकि, वादी मुकदमा विजमा यादव के पक्ष से कोई मौजूद नहीं था। फैसला सुनते ही सभी के चेहरे पर मायूसी छा गई। किसी अनहोनी को टालने के लिए पूरे कचहरी परिसर में सुरक्षा के जबरदस्त बंदोबस्त किए गए थे। कचहरी परिसर लगभग सील था।
फैसला सुनते ही छाया सन्नाटा
लगभग चार साल चले ट्रायल के बाद अदालत ने गत 18 अगस्त को निर्णय सुरक्षित कर लिया था। फैसला सुनाने के लिए के लिए बृहस्पतिवार को एडीजे बद्री विशाल पांडेय दिन में दो बजे अदालत पहुंचे। उस वक्त तक करवरिया बंधुओं को जेल से लाकर अदालत में पेश किया जा चुका था। पूरा कोर्टरूम वकीलों से खचाखच भरा था।
कोर्ट में पहुंचते ही जज ने कहा कि अभियोजन अपना पक्ष साबित करने में सफल रहा। सभी अभियुक्तों को दोषी सिद्ध करार दिया जाता है। इतना सुनते ही पूरे न्यायकक्ष में सन्नाटा छा गया।
एडीजे बद्री विशाल तत्काल उठकर अपने चैंबर में चले गए। लगभग दस मिनट बाद वह वापस लौटे और फैसले की प्रति पर अभियुक्तों के हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद उन्होंने कहा कि सजा के बिंदु पर चार नवंबर को सुनवाई की जाएगी। इसके बाद सजा की मात्रा पर फैसला होगा।
समर्थक हुए भावुक, बढ़ाया हौसला
अदालत का फैसला सुनते ही समर्थक भावुक हो गए। शायद इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। कुछ लोग रोने भी लगे, हालांकि बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने करवरिया बंधुओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हम हमेशा आप के साथ रहेंगे। समर्थकों ने कुछ देर तक अदालत के बाहर नारेबाजी भी की।
इन धाराओं में किया दोष सिद्ध
1- 147 आईपीसी- बलवा
2- 148 आईपीपी- घातक आयुध के साथ बलवा
3- 149 आईपीसी- समान आशय के लिए विधि विरुद्ध जमाव
4- 302 आईपीसी- हत्या
5- 307 आईपीसी- हत्या का प्रयास
6- 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट
पॉश इलाके सिविल लाइंस में गरजी थी एके 47
जवाहर यादव उर्फ पंडित की हत्या 13 अगस्त 1996 को शहर के सिविल लाइंस इलाके में कर दी गई थी। उस वक्त शाम के करीब साढ़े छह बजे थे। जवाहर यादव अपनी मारुति 800 कार से लाउदर रोड स्थित कार्यालय से अशोक नगर अपने घर जा रहे थे। हमलावर एक मारुति वैन में सवार थे। सभी एके-47 और अन्य घातक असलहों से लैस थे।
जवाहर के भाई सुलाकी यादव ने करवरिया बंधुओं पर हत्या करने का आरोप लगाते हुए सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना की जांच शुरू में सिविल लाइंस पुलिस ने और उसके बाद सीबीसीआईडी की इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी शाखा से कराई गई।
सीबीसीआईडी के आरोपपत्र दाखिल करने के बाद हाईकोर्ट के स्थगनादेश के चलते मुकदमे की कार्रवाई पर काफी समय तक रोक लगी रही। 2015 में हाईकोर्ट का स्थगन आदेश समाप्त होने के बाद इस मुकदमे में सुनवाई प्रारंभ हुई। उसी समय करवरिया बंधुओं को सरेंडर कर जेल जाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में त्वरित सुनवाई करने और अनावश्यक तारीख है ना लगाने का आदेश दिया था। लगभग 4 वर्ष चली नियमित सुनवाई के बाद अदालत ने गत दिनों अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, इसे सुनाए जाने के लिए 31 अक्तूबर की तिथि नियत की गई थी।