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अतीक का करीबी रहा कम्मू कर रहा अवैध प्लाटिंंग
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Kammu is close to Atik, doing illegal plotting
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प्रयागराज। कभी अतीक अहमद गिरोह का सक्रिय सदस्य रहा कमरूल हसन उर्फ कम्मू अवैध प्लाटिंग कर रहा है। बड़ी बात यह है कि उसके खिलाफ कोर्ट से वारंट भी जारी है। शिकायत पर कैंट पुलिस ने कम्मू, उसके भाई व 10-15 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा लिखकर जांच शुरू कर दी है।
रिपोर्ट बेली गांव निवासी मो. इसराइल ने लिखाई है। उसने बताया कि बेली गांव निवासी सायमा बेगम ने 1996 में उसे नसीबपुर बख्तियारी स्थित जमीन को बुवाई व जोताई के लिए दिया था। क्योंकि वह अपनी जमीन पर काश्तकारी करने में असमर्थ थीं। तब से वह ही इस जमीन पर काबिल है और फसल इसके मालिक को देता आ रहा है। आरोप है कि तब से कम्मू और उसका भाई फकरूल हसन उर्फ फक्कू निवासी बेलीगांव इस जमीन पर कब्जे के प्रयास में जुटे हैं।
18 अगस्त को पता चला कि दोनों असलहों से लैस होकर अपने 10-15 साथियों के साथ पहुंचकर जमीन पर बाउंड्रीवाल बनवा रहे हैं और प्लाटिंंग कर इसे बेच रहे हैं। इस पर उसने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण रुकवाने का प्रयास किया तो सीने पर राइफल सटाकर उसे गोली मारने की धमकी दी गई। भुक्तभोगी का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद चौकी व थाने पर सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर शनिवार को कैंट पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज की। कैंट पुलिस ने बताया कि मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
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पहले से दर्ज हैं मुकदमे
पुलिस के मुताबिक, कम्मू कभी अतीक अहमद का करीबी था। लेकिन मना करने के बाद भी उसके 2017 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी करने पर अतीक उससे नाराज हो गया था। 2015 में धूमनगंज के मरियाडीह में हुए अल्कमा-सुरजीत हत्याकांड में उसे नामजद कराया गया। हालांकि सपा सरकार जाने के बाद हुई जांच में नामजद सभी आरेापियों को क्लीन चिट देकर अतीक व अशरफ को साजिश रचने में नामजद करते हुए कुल 15 लोगों पर इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने कम्मू को क्लीन चिट जरूर दे दी लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। जिसके बाद उसके खिलाफ वारंट भी जारी हुआ। इसके अलावा करेली में 2013 मेें हुई निरंजन पासी की हत्या में भी उसका नाम आया था।
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रिपोर्ट बेली गांव निवासी मो. इसराइल ने लिखाई है। उसने बताया कि बेली गांव निवासी सायमा बेगम ने 1996 में उसे नसीबपुर बख्तियारी स्थित जमीन को बुवाई व जोताई के लिए दिया था। क्योंकि वह अपनी जमीन पर काश्तकारी करने में असमर्थ थीं। तब से वह ही इस जमीन पर काबिल है और फसल इसके मालिक को देता आ रहा है। आरोप है कि तब से कम्मू और उसका भाई फकरूल हसन उर्फ फक्कू निवासी बेलीगांव इस जमीन पर कब्जे के प्रयास में जुटे हैं।
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18 अगस्त को पता चला कि दोनों असलहों से लैस होकर अपने 10-15 साथियों के साथ पहुंचकर जमीन पर बाउंड्रीवाल बनवा रहे हैं और प्लाटिंंग कर इसे बेच रहे हैं। इस पर उसने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण रुकवाने का प्रयास किया तो सीने पर राइफल सटाकर उसे गोली मारने की धमकी दी गई। भुक्तभोगी का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद चौकी व थाने पर सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद उसने एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर शनिवार को कैंट पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज की। कैंट पुलिस ने बताया कि मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
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पहले से दर्ज हैं मुकदमे
पुलिस के मुताबिक, कम्मू कभी अतीक अहमद का करीबी था। लेकिन मना करने के बाद भी उसके 2017 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी करने पर अतीक उससे नाराज हो गया था। 2015 में धूमनगंज के मरियाडीह में हुए अल्कमा-सुरजीत हत्याकांड में उसे नामजद कराया गया। हालांकि सपा सरकार जाने के बाद हुई जांच में नामजद सभी आरेापियों को क्लीन चिट देकर अतीक व अशरफ को साजिश रचने में नामजद करते हुए कुल 15 लोगों पर इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई। सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने कम्मू को क्लीन चिट जरूर दे दी लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। जिसके बाद उसके खिलाफ वारंट भी जारी हुआ। इसके अलावा करेली में 2013 मेें हुई निरंजन पासी की हत्या में भी उसका नाम आया था।