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कल्पवास को सुखद अनुभूति मानते थे स्वामी विवेकानंद

Mon, 08 Jan 2018 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 08 Jan 2018 01:07 AM IST
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Kalpvas used to consider Swami Vivekananda as a pleasant experience
swami vivekanand
विश्व पटल पर भारतीय दर्शन और संस्कृति का परचम मजबूती से फहराने वाले स्वामी विवेकानंद गंगा की रेती पर माघ मास में किए गए कल्पवास को सुखद अनुभूति मानते थे। उन्होंने 1891 के माघ मेले में त्रिवेणी तट पर रहकर कल्पवास किया था।
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स्वामी विवेकानंद 1890 ई. में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में प्रयाग आए और जनवरी 1891 में कल्पवास पूरा किया। यहीं पर रहकर उन्होंने सनातन धर्म, वैदिक दर्शन उपनिषद पुराणों का अध्ययन संतों के सानिध्य में रहकर किया। संगम की रेती का प्रभाव स्वामी विवेकानंद पर ऐसा पड़ा कि जब उन्होंने मिशन की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए देश के जिन पांच केंद्रों की परिकल्पना की इलाहाबाद उसमें शामिल रहा। मुट्ठीगंज स्थित रामकृष्ण मठ, मिशन  के व्यवस्थापक एवं सह सचिव स्वामी सुहृदानंद बताते हैं कि स्वामी विवेकानंद जब प्रयाग आए तो कमर दर्द से परेशान थे। गंगा की रेती पर की गई साधना के प्रताप से उनका दर्द गायब हो गया। स्वामी जी ने माघ मास में त्रिवेणी तट पर किए जाने वाले कल्पवास को सुखद अनुभूति मानते थे। यहीं कारण था कि वे
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 1897 में जब वाराणसी अस्पताल की स्थापना को आए तो प्रयाग भी आए। इस बार वे यहां पर एक  शिवालय ठहरे थे। संगमनगरी में मठ की स्थापना उनकी प्रबल इच्छा थी। उनके इस इच्छा को उनके गुरु भाई पेशे से इंजीनियर स्वामी विज्ञानानंद ने साकार किया। विज्ञानानंद ने 1910 में  मुट्ठीगंज मुहल्ले के मुख्यमार्ग पर रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम की स्थापना की थी। जो रामकृष्ण देव, मां सारदा और स्वामी विवेकानंद के बताए सेवा कार्य को विस्तार देने में रत है।
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स्वामी विवेकानंद की तिथिनुसार जयंती सोमवार को रामकृष्ण मठ, मिशन मुट्ठीगंज में हर्षोंल्लास के साथ मनाई जाएगी। मठ के अध्यक्ष स्वामी अक्षयानंद के मुताबिक सुबह साढ़े पांच बजे मंगल आरती से शुरूआत होगी। 10 बजे हवन होगा। पुष्पांजलि के बाद प्रसाद वितरण एवं शाम को संकीर्तन होगा।
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