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कालिया, जिसने सबको अपना बना लिया

Sun, 10 Jan 2016 02:17 AM IST
अनिल सिद्धार्थ/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अनिल सिद्धार्थ/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 10 Jan 2016 02:17 AM IST
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Kalia , who all made ??their
इलाहाबाद। हिन्दी कथा के सशक्त हस्ताक्षररवींद्र कालिया और इलाहाबाद, दोनों एक दूसरे के पर्याय रहे हैं। वह भले ही जालंधर में जन्मे, पर इलाहाबाद की माटी में ऐसा रच-बस गए कि कहीं भी गए, कहीं भी रहे, उनका इलाहाबादीपन वफादार कनीज की तरह उनका दामन थामे हमेशा साथ रहा। बतौर रचनाकार उनकी रचनाओं में इलाहाबाद बार-बार शामिल होता रहा तो बतौर संपादक भी उन्होंने इलाहाबाद को हमेशा तरजीह दी।
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जिंदगी के नशे से लबरेज रहे कालिया ने जिस स्तर पर इलाहाबाद को अपनाया, इलाहाबाद ने भी उन्हें उसी स्तर पर मान दिया। चुन्नीलाल का छोला-भटूरा हो या शांति की कुल्फी या फिर तेलियरगंज में सब्जी खरीदना, उनका ठेठ इलाहाबादीपन कभी नहीं गया। कई मौके ऐसे भी आए जब वह दूर दिल्ली में रहककर भी बाल कटवाने या डॉक्टर से मुलाकात के लिए यहां आए। दोस्तों की महफिलें जुटाने और रचनाकारों की मदद का नशा हमेशा उनके साथ रहा।
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बतौर लेखक वह कभी भी दायित्वबोध से दूर नहीं रहे। उन्होंने जिंदगी के आवेग और रागबोध को भी हमेेशा बचाए रखा। कहते थे, साहित्यकार के कर्म और व्यवहार का फर्क लेखन में भी नजर आएगा।
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साहित्य का काम जीवन से जोड़ना है, तोड़ना नहीं। यहां तक कि अपने पीने को न उन्होंने कभी छिपाया और न ही ‘ग्लोरीफाई’ किया। अपने लेखन में उन्होंने न कभी अपने को हीरो बनाया और न कभी अपने पर हंसने से चूके। बिना लेखकीय लाइसेंस लिए बस, आम होकर खास जिंदगी का लुत्फ लेते रहे। इसीलिए उनकी आत्मकथा ‘गालिब छुटी शराब’ श्रेष्ठ आत्मकथाओं में सरलता से शामिल हो गई।


वह एक अच्छे कथाकार, उपन्यासकार तो थे ही, अच्छे संपादक, अच्छे पति, अच्छे पुत्र, अच्छे पिता की भूमिकाओं में भी उतना ही सफल रहे। लेखन के अतिरिक्त अच्छे ब्रांड की चीजें, अच्छा खाना, अच्छा संग-साथ, अच्छा सिनेमा उनकी कमजोरी रही। खास यह भी कि उनके लेखन और जीवन में कोई अंतर नहीं रहा। उन्होंने कभी टाइमटेबल बनाकर नहीं लिखा। कोई उपन्यास लिखने में उन्हें दस बरस लग गए तो दस दिनों में दस कहानियां लिखना भी उन्हीं के बूते की बात थी। तमाम लेखकों की तरह उन्होंने कभी कुछ नहीं छिपाया और पूरी साफगोई से जिंदगी के हर सवाल का जवाब देते रहे और पूरी जिंदादिली के साथ ही कूच कर गए कालिया, जिसने सबको अपना बना लिया।
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