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दीक्षांत समारोह से संबंधित अन्य खबरें
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Kailash Satyarthi at Allahabad University Convocation
- फोटो : CITY DESK
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‘ड्रीम’, ‘डिस्कवर’ और ‘डू’ को अपनाने पर दिया जोर
कई रोचक उदाहरणों से छात्र-छात्राओं को किया प्रेरित
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने छात्र-छात्राओं को सफलता का ‘थ्री-डी’ मंत्र दिया। उन्होंने ‘ड्रीम’, ‘डिस्कवर’ और ‘डू’ को अपनाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया और कई रोचक उदाहरणों के साथ इसके फायदे भी बताए।
उन्होंने ने ‘थ्री-डी’ के पहले डी को ड्रीम से जोड़ते हुए कहा कि बड़े सपने देखना सीखिए। सपने अपने लिए नहीं, बल्कि दुनिया की भलाई के लिए देखिए। दूसरा डी यानी डिस्कवर। भीतर की ताकत और बाहर के अवसरों को पहचानिए। मौके को हाथ न मत जाने दीजिए और तीसरा डी यानी डू, जिसका मतलब होता है करो। जीत-हार की चिंता किए बगैर आगे बढ़ो, क्योंकि इतिहास नौजवान ही रचता है।
इसके अलावा उन्होंने छात्र-छात्राओं को खुद का विस्तार करने, अपनी करुण और कर्म का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि विस्तार मुक्ति देता है और संकुचित होना मृत्यु है। वहीं, करुणा का विस्तार दिल से होता है और अब वैज्ञानिकों को भी दिल का महत्व समझ में आने लगा है। इसके साथ ही उन्होंने कर्म के विस्तार की बात की। साथ ही इविवि के गौरवशाली अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि इविवि भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है जो भारत ही नहीं, पड़ोसी देशों के लिए भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तैयार करने की क्षमता रखता है।
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नोबेल पुरस्कार विजेता को खली आम छात्रों की गैरमौजूगी
प्रयागराज । दीक्षांत समारोह में आम छात्रों की गैर मौजूदगी नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी खली। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा लेकिन छात्रसंघ और आम छात्रों की बात मजबूती के साथ रखी।
इविवि में जिस छात्रसंघ को समाप्त कर दिया गया है, कैलाश सत्यार्थी पिछली बाद इलाहाबाद उसी छात्रसंघ के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। सत्यार्थी उस कार्यक्रम की यादों को ताजा करते हुए बोले की छात्रसंघ का वह कार्यक्रम बहुत ही शानदार था। उन्होंने शहीद लाल पद्मधर की शहादत की चर्चा करते हुए छात्रसंघ के गौरवशाली अतीत को भी याद किया। वहीं, सत्यार्थी को आम छात्र-छात्राओं को सीधे संबोधित न करने पाने का भी मलाल रहा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि वह जब अगली बार आएं तो उन्हें विश्वविद्यालय के 30 हजार छात्र-छात्राओं को सीधे संबोधित करने का मौका मिल सके। कहा कि सीनेट परिसर में वह जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह सिर्फ यहां बैठे लोगों के लिए ही नहीं है बल्कि उन्हें छात्र-छात्राओं के लिए भी भी है जो हॉस्टल में बैठकर या यूट्यूब पर उन्हें सीधे सुन रहे हैं। जाते-जाते वह यह उम्मीद भी जता गए कि अगली बार यहां आए तो किसी विश्वविद्यालय अपने ही किसी छात्रों के नोबेल पुरस्कार विजेता होने का जश्न मना रहा हो।
मेडल पाने वालों में आधे से अधिक बेटियां
प्रयागराज, 5 सितंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वालों में आधे से अधिक बेटियां शामिल रहीं। मुख्य अतिथि कैलाश सत्यार्थी ने फक्र के साथ कहा कि इविवि की बेटियों ने साबित कर दिया कि देश की बेटियां अब पांच हजार साल पुरानी गुलामी की जंजीरों से मुक्त हो रही हैं।
समारोह में कुल 58 मेडल दिए जाने थे और इनमें से 36 छात्राएं थीं। दीक्षांत समारोह में मेडल लेने के लिए 46 विद्यार्थी उपस्थित हुए और इनमें से 32 छात्राओं ने मंच आकर मेडल प्राप्त किया। कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि कहा कि भारत में सदियों से मां-बेटियों को पीछे रखने की परंपरा रही है लेकिन इविवि में आधे से अधिक मेडल बेटियों के नाम रहे। अब सपनों को साकार करने का वक्त आ गया है। छात्र-छात्राओं से कहा कि आपके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियां हैं। डिग्री तक सीमित न रहें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें।
विरोध करने पर हिरासत में लिए गए सात छात्र नेता
प्रयागराज, 5 सितंबर। दीक्षांत समारोह में आम छात्रों की भागीदारी न होने से बड़े छात्र नेताओं ने छात्रसंघ भवन के सामने वाले गेट के बाहर जमकर हंगामा किया। छात्र वहां धरना-प्रदर्शन और विश्वविद्यालय के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने गेट के बाद लगी बैरिकेडिंग लांघने की कोशिश की और इसी पर उनकी पुलिस से धक्कामुक्की हो गई। हंगामा बढ़ने छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, महामंत्री शिवम सिंह, छात्र नेता अविनाशी विद्यार्थी, अजय सम्राट, आनंद सेंगर और सत्यम कुशवाहा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि शाम को पुलिस ने सभी को निजी मुचलके पर छोड़ दिया।
प्रेमिका के के लिए दीक्षांत में नहीं पहुंच सके थे सत्यार्थी
प्रयागराज, 5 सितंबर। दीक्षांत समारोह में शामिल कैलाश सत्यार्थी छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचे तो अपने युवाकाल को भी याद किया। कहा कि हर छात्र-छात्र का सपना होता है कि दीक्षांत समारोह में उसे डिग्री मिले लेकिन वह अपनी प्रेमिका के चक्कर में ऐसा पड़े कि समारोह में शामिल नहीं हो सके। कहा कि वह विदिशा में रहते थे और उनकी प्रेमिका दिल्ली में रहती थीं। दिल्ली दूर थी। दीक्षांत समारोह वाले दिन वह शहर में नहीं थे और इसी वजह से समारोह में शामिल होकर डिग्री प्राप्त करने का सौभाग्य उन्हें नहीं मिल सका।
पीआरओ ने सत्यार्थी को पहना दी टोपी
प्रयागराज, 5 सितंबर। दीक्षांत समारोह में शामिल अतिथियों के लिए भी टोपी एवं अंगवस्त्रम अनिवार्य था। कैलाश सत्यार्थी को कुलपति ने अंगवस्त्रम भेंट किया लेकिन कई बार कोशिश के बाद भी सत्यार्थी के सिर पर इविवि की टोपी फिट नहीं बैठी। इस पर उन्होंने पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह की ओर देखकर कहा कि चित्तरंजन हर चीज को फिट कर देते हैं और टोपी भी अच्छी तरह से पहनाते हैं। कैलाश सत्यार्थी यह कहकर ठहाका लगाने लगे और संकोच में दिखे पीआरओ ने उन्हें टोपी पहनाई जो उनके सिर पर फिट आ गई।
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कई रोचक उदाहरणों से छात्र-छात्राओं को किया प्रेरित
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने छात्र-छात्राओं को सफलता का ‘थ्री-डी’ मंत्र दिया। उन्होंने ‘ड्रीम’, ‘डिस्कवर’ और ‘डू’ को अपनाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया और कई रोचक उदाहरणों के साथ इसके फायदे भी बताए।
उन्होंने ने ‘थ्री-डी’ के पहले डी को ड्रीम से जोड़ते हुए कहा कि बड़े सपने देखना सीखिए। सपने अपने लिए नहीं, बल्कि दुनिया की भलाई के लिए देखिए। दूसरा डी यानी डिस्कवर। भीतर की ताकत और बाहर के अवसरों को पहचानिए। मौके को हाथ न मत जाने दीजिए और तीसरा डी यानी डू, जिसका मतलब होता है करो। जीत-हार की चिंता किए बगैर आगे बढ़ो, क्योंकि इतिहास नौजवान ही रचता है।
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इसके अलावा उन्होंने छात्र-छात्राओं को खुद का विस्तार करने, अपनी करुण और कर्म का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि विस्तार मुक्ति देता है और संकुचित होना मृत्यु है। वहीं, करुणा का विस्तार दिल से होता है और अब वैज्ञानिकों को भी दिल का महत्व समझ में आने लगा है। इसके साथ ही उन्होंने कर्म के विस्तार की बात की। साथ ही इविवि के गौरवशाली अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि इविवि भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है जो भारत ही नहीं, पड़ोसी देशों के लिए भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तैयार करने की क्षमता रखता है।
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नोबेल पुरस्कार विजेता को खली आम छात्रों की गैरमौजूगी
प्रयागराज । दीक्षांत समारोह में आम छात्रों की गैर मौजूदगी नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी खली। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा लेकिन छात्रसंघ और आम छात्रों की बात मजबूती के साथ रखी।
इविवि में जिस छात्रसंघ को समाप्त कर दिया गया है, कैलाश सत्यार्थी पिछली बाद इलाहाबाद उसी छात्रसंघ के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। सत्यार्थी उस कार्यक्रम की यादों को ताजा करते हुए बोले की छात्रसंघ का वह कार्यक्रम बहुत ही शानदार था। उन्होंने शहीद लाल पद्मधर की शहादत की चर्चा करते हुए छात्रसंघ के गौरवशाली अतीत को भी याद किया। वहीं, सत्यार्थी को आम छात्र-छात्राओं को सीधे संबोधित न करने पाने का भी मलाल रहा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि वह जब अगली बार आएं तो उन्हें विश्वविद्यालय के 30 हजार छात्र-छात्राओं को सीधे संबोधित करने का मौका मिल सके। कहा कि सीनेट परिसर में वह जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह सिर्फ यहां बैठे लोगों के लिए ही नहीं है बल्कि उन्हें छात्र-छात्राओं के लिए भी भी है जो हॉस्टल में बैठकर या यूट्यूब पर उन्हें सीधे सुन रहे हैं। जाते-जाते वह यह उम्मीद भी जता गए कि अगली बार यहां आए तो किसी विश्वविद्यालय अपने ही किसी छात्रों के नोबेल पुरस्कार विजेता होने का जश्न मना रहा हो।
मेडल पाने वालों में आधे से अधिक बेटियां
प्रयागराज, 5 सितंबर। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वालों में आधे से अधिक बेटियां शामिल रहीं। मुख्य अतिथि कैलाश सत्यार्थी ने फक्र के साथ कहा कि इविवि की बेटियों ने साबित कर दिया कि देश की बेटियां अब पांच हजार साल पुरानी गुलामी की जंजीरों से मुक्त हो रही हैं।
समारोह में कुल 58 मेडल दिए जाने थे और इनमें से 36 छात्राएं थीं। दीक्षांत समारोह में मेडल लेने के लिए 46 विद्यार्थी उपस्थित हुए और इनमें से 32 छात्राओं ने मंच आकर मेडल प्राप्त किया। कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि कहा कि भारत में सदियों से मां-बेटियों को पीछे रखने की परंपरा रही है लेकिन इविवि में आधे से अधिक मेडल बेटियों के नाम रहे। अब सपनों को साकार करने का वक्त आ गया है। छात्र-छात्राओं से कहा कि आपके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियां हैं। डिग्री तक सीमित न रहें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें।
विरोध करने पर हिरासत में लिए गए सात छात्र नेता
प्रयागराज, 5 सितंबर। दीक्षांत समारोह में आम छात्रों की भागीदारी न होने से बड़े छात्र नेताओं ने छात्रसंघ भवन के सामने वाले गेट के बाहर जमकर हंगामा किया। छात्र वहां धरना-प्रदर्शन और विश्वविद्यालय के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने गेट के बाद लगी बैरिकेडिंग लांघने की कोशिश की और इसी पर उनकी पुलिस से धक्कामुक्की हो गई। हंगामा बढ़ने छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, महामंत्री शिवम सिंह, छात्र नेता अविनाशी विद्यार्थी, अजय सम्राट, आनंद सेंगर और सत्यम कुशवाहा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि शाम को पुलिस ने सभी को निजी मुचलके पर छोड़ दिया।
प्रेमिका के के लिए दीक्षांत में नहीं पहुंच सके थे सत्यार्थी
प्रयागराज, 5 सितंबर। दीक्षांत समारोह में शामिल कैलाश सत्यार्थी छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचे तो अपने युवाकाल को भी याद किया। कहा कि हर छात्र-छात्र का सपना होता है कि दीक्षांत समारोह में उसे डिग्री मिले लेकिन वह अपनी प्रेमिका के चक्कर में ऐसा पड़े कि समारोह में शामिल नहीं हो सके। कहा कि वह विदिशा में रहते थे और उनकी प्रेमिका दिल्ली में रहती थीं। दिल्ली दूर थी। दीक्षांत समारोह वाले दिन वह शहर में नहीं थे और इसी वजह से समारोह में शामिल होकर डिग्री प्राप्त करने का सौभाग्य उन्हें नहीं मिल सका।
पीआरओ ने सत्यार्थी को पहना दी टोपी
प्रयागराज, 5 सितंबर। दीक्षांत समारोह में शामिल अतिथियों के लिए भी टोपी एवं अंगवस्त्रम अनिवार्य था। कैलाश सत्यार्थी को कुलपति ने अंगवस्त्रम भेंट किया लेकिन कई बार कोशिश के बाद भी सत्यार्थी के सिर पर इविवि की टोपी फिट नहीं बैठी। इस पर उन्होंने पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह की ओर देखकर कहा कि चित्तरंजन हर चीज को फिट कर देते हैं और टोपी भी अच्छी तरह से पहनाते हैं। कैलाश सत्यार्थी यह कहकर ठहाका लगाने लगे और संकोच में दिखे पीआरओ ने उन्हें टोपी पहनाई जो उनके सिर पर फिट आ गई।