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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Kailash Gautam, the poet who freed poetry from the captivity of books and brought it into the public mind.

Prayagraj News: कैलाश गौतम कविता को पुस्तकों की कैद से मुक्त कराकर लोक मानस में उतारने वाले कवि

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Dec 2023 01:53 AM IST
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Kailash Gautam, the poet who freed poetry from the captivity of books and brought it into the public mind.
प्रयागराज। कैलाश गौतम कविता को पुस्तकों की कैद से मुक्त कराकर लोक मानस में प्रतिष्ठापित करने वाले कवि के रूप में हमेशा याद कि जाते रहेंगे। उनकी कविताओं में लोकरंग का पक्ष जीवन के असली मर्म को प्रतिबिंबित करता है। पुण्यतिथि पर शनिवार को हिंदुस्तानी एकेडेमी में लोक साहित्य पर केंद्रित ''भाषाई चेतना एवं लोक सरोकारों के कवि कैलाश गौतम'' विषयक संगोष्ठी में यह बातें कही गईं।
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शुभारंभ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत शाल, पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिह्न देकर एकेडेमी के सचिव देवेंद्र प्रताप सिंह ने किया। एकेडेमी के सचिव ने कहा कि ''कैलाश गौतम की कविताएं लोकरंग का पक्ष धारण कर विकसित हुई हैं। वह एक सजग नागरिक और जागरूक कवि के रूप में अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ करते हैं। उनकी कविताएं समाज को आईने की तस्वीर की तरह व्यक्त करती हैं। वह जिंदादिल इंसान, अट्हास में गम को डुबा देने वाले कवि थे। उनका स्मरण एक पंरपरा का स्मरण है। अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के प्रो. वशिष्ठ अनूप का कहना था कि उन्होंने कविता को पुस्तकों की कैद से मुक्त कर विशाल जनमानस में प्रतिष्ठित किया।
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उन्होंने कविता के काव्यत्व को सुरक्षित रखते हुए लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाया। इनके बाद साहित्यकार रविनंदन सिंह ने कहा कि ''कैलाश गौतम ज़मीन के कवि हैं और उनकी जमीन भोजपुरी है। इसके बाद हुए कवि सम्मेलन सुरेंद्र सार्थक,पंकज प्रसून,कुशल कुशवाहा,आकांक्षा बुंदेला,आकाशवाणी के निदेशक लोकेश शुक्ला,अमित शर्मा,नीर गोरखपुरी,राहुल शर्मा की कविताएं सराही गईं। कवियों ने कविता के सभी रसों से सराबोर किया और विसंगतियों पर प्रहार किया।
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धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी गोपालजी पांडेय ने किया। संचालन श्लेष गौतम ने किया। इस मौके पर रामनरेश तिवारी ''पिण्डीवासा'', डॉ. मुरारजी त्रिपाठी, अतुल यदुवंशी, शैलेंद्र जय, डॉ. मधु शुक्ला, राधा शुक्ला, डॉ शांति चौधरी, शशि भूषण राय, शांभवी, रवि प्रकाश समेत कई रचनाकार और शोध छात्र उपस्थित थे।
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