{"_id":"599896b64f1c1b5a188b4723","slug":"jus-lokur","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यायपालिका के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव है ई-कोर्ट : जस्टिस लोकुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्यायपालिका के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव है ई-कोर्ट : जस्टिस लोकुर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 20 Aug 2017 01:31 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच में शनिवार को पहली ई-कोर्ट का शुभारंभ करते हुए सुप्रीमकोर्ट के जज और ई-कमेटी के चेयरमैन जस्टिस मदन बी लोकुर ने इसे न्यायपालिका के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्दी ही इलाहाबाद हाईकोर्ट और देश के दूसरे हाईकोर्ट भी पूरी तरह से पेपर लेस होंगे। इससे वादकारियोें को त्वरित न्याय दिलाने का संकल्प पूरा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि ई-कोर्ट की शुरुआत से न्याय निष्पादन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
जस्टिस लोकुर ने कहा कि यह सिर्फ न्यायपालिका का प्रोजेक्ट नहीं है। जज, वकील, रजिस्ट्री और वादकारी सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सूचना तकनीक के क्षेत्र में न्यायपालिका की उपलब्धियों को गिनाते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि देश भर की जिला अदालतों को नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड से जोड़ा जा चुका है। उच्च न्यायालयों के लिए अलग डाटा ग्रिड बनाया गया है। अब तक 14 हाईकोर्ट इससे जुड़ चुके हैं। बहुत जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट भी इससे जुड़ेगा। इसके जरिए किसी भी लंबित मुकदमे की पूरी जानकारी घर बैठे प्राप्त की जा सकती है।
अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले ने ई-कोर्ट और सूचना तकनीक की दिशा में हाईकोर्ट की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक ता की दिशा में यह हाईकोर्ट का एक और कदम है। इससे पूर्व दशकों से इस हाईकोर्ट में रिकार्ड दाखिल होते आ रहे हैं। अब इन दस्तावेजों की संख्या इतनी हो चुकी है कि रिकार्ड सुरक्षित रखने में कठिनाई होती है। बहुत अधिक मैन पावर और स्थान की आवश्यकता है। ई-गर्वनेंस से यह सब काम बेहद आसान हो जाएगा। मानव श्रम भी बचेगा और कार्य में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट प्रतिदिन 80 हजार पेज डिजिटाइज कर रहा है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ई- प्रोजेक्ट के चेयरमैन जस्टिस दिलीप गुप्ता ने ई-कोर्ट और सूचना तकनीक से हो रहे कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि जस्टिस लोकुर के सहयोग और मार्गदर्शन के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट सूचना तकनीक के इस्तेमाल में अग्रणी बन सका। महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने ई-कोर्ट के सफल संचालन में सरकार के पूरे सहयोग का वादा करते हुए अधीनस्थ अदालतों को भी इससे जोड़ने पर बल दिया। हाईकोर्ट बार अध्यक्ष अनिल तिवारी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए वकीलों के पूरे सहयोग का वादा किया। मुख्य सचिव राजीव कुमार और प्रमुख सचिव सूचना तकनीक अवनीश अवस्थी ने भी विचार रखे। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
जस्टिस मदन बी लोकुर और चीफ जस्टिस डीबी भोसले ने शनिवार को कोर्ट संख्या नौ में पहली ई-कोर्ट का शुभारंभ किया। जजों ने न्यायपीठ पर लगे कंप्यूटर मॉनिटर पर ई-पेन से हस्ताक्षर कर ई-कोर्ट की विधिवत शुरुआत की। लखनऊ पीठ की ई-कोर्ट का वीडियो कांफ्रेंसिंग से उद्घाटन किया गया। समारोह में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
जस्टिस लोकुर ने कहा कि यह सिर्फ न्यायपालिका का प्रोजेक्ट नहीं है। जज, वकील, रजिस्ट्री और वादकारी सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सूचना तकनीक के क्षेत्र में न्यायपालिका की उपलब्धियों को गिनाते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि देश भर की जिला अदालतों को नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड से जोड़ा जा चुका है। उच्च न्यायालयों के लिए अलग डाटा ग्रिड बनाया गया है। अब तक 14 हाईकोर्ट इससे जुड़ चुके हैं। बहुत जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट भी इससे जुड़ेगा। इसके जरिए किसी भी लंबित मुकदमे की पूरी जानकारी घर बैठे प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले ने ई-कोर्ट और सूचना तकनीक की दिशा में हाईकोर्ट की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक ता की दिशा में यह हाईकोर्ट का एक और कदम है। इससे पूर्व दशकों से इस हाईकोर्ट में रिकार्ड दाखिल होते आ रहे हैं। अब इन दस्तावेजों की संख्या इतनी हो चुकी है कि रिकार्ड सुरक्षित रखने में कठिनाई होती है। बहुत अधिक मैन पावर और स्थान की आवश्यकता है। ई-गर्वनेंस से यह सब काम बेहद आसान हो जाएगा। मानव श्रम भी बचेगा और कार्य में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट प्रतिदिन 80 हजार पेज डिजिटाइज कर रहा है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ई- प्रोजेक्ट के चेयरमैन जस्टिस दिलीप गुप्ता ने ई-कोर्ट और सूचना तकनीक से हो रहे कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि जस्टिस लोकुर के सहयोग और मार्गदर्शन के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट सूचना तकनीक के इस्तेमाल में अग्रणी बन सका। महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने ई-कोर्ट के सफल संचालन में सरकार के पूरे सहयोग का वादा करते हुए अधीनस्थ अदालतों को भी इससे जोड़ने पर बल दिया। हाईकोर्ट बार अध्यक्ष अनिल तिवारी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए वकीलों के पूरे सहयोग का वादा किया। मुख्य सचिव राजीव कुमार और प्रमुख सचिव सूचना तकनीक अवनीश अवस्थी ने भी विचार रखे। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
जस्टिस मदन बी लोकुर और चीफ जस्टिस डीबी भोसले ने शनिवार को कोर्ट संख्या नौ में पहली ई-कोर्ट का शुभारंभ किया। जजों ने न्यायपीठ पर लगे कंप्यूटर मॉनिटर पर ई-पेन से हस्ताक्षर कर ई-कोर्ट की विधिवत शुरुआत की। लखनऊ पीठ की ई-कोर्ट का वीडियो कांफ्रेंसिंग से उद्घाटन किया गया। समारोह में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।