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जूना अखाड़े की संपत्ति हड़पने वाले की जमानत खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 29 Mar 2016 02:10 AM IST
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सत्र न्यायालय ने इलाहाबाद में जूना अखाड़े को दान में मिली संपत्ति का फर्जी बैनामा कराने के आरोपी हरीश कुमार उर्फ मिरकरी पंडा की जमानत खारिज कर दी है। जमानत प्रार्थनापत्र पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने सुनवाई की। जमानत प्रार्थनापत्र का सरकारी वकील और जूना अखाड़े के वकील मनीष खन्ना तथा जगदीश त्रिपाठी ने विरोध किया।
प्रकरण के अनुसार जूना अखाड़े को कीडगंज निवासी और भवन संख्या 184 चौखंडी कीडगंज के स्वामी रामशंकर और शिवशंकर ने मकान दान के रूप में दिया था। अखाड़े की ओर से संपत्ति का बैनामा कराने के बाद जब नामांतरण के लिए नगर निगम में प्रार्थनापत्र दिया गया तो पता चला कि राहुल और अरुण कुमार ने अपने पक्ष में फर्जी तौर से बैनामा करा लिया है। इन लोगों ने इसके लिए दानकर्ता शिवशंकर और रामशंकर के मृतक भाई उमाशंकर के नाम पर किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर बैनामा करा लिया। उमाशंकर की मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र भी लगा दिया गया। इसके अनुसार उनकी मृत्यु आठ जनवरी 2013 को हुई थी। जबकि मृतक के भाइयों और नगर निगम द्वारा जारी एक अन्य मृत्यु प्रमाणपत्र के अनुसार उमाशंकर की मृत्यु 1969 में ही हो गई थी। एक ही व्यक्ति के दो मृत्यु प्रमाणपत्र सामने आने पर अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। इस मामले में जूना अखाड़े के लिए उपाध्यक्ष महंत प्रेमगिरी ने अभियुक्तगण के खिलाफ कीडगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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प्रकरण के अनुसार जूना अखाड़े को कीडगंज निवासी और भवन संख्या 184 चौखंडी कीडगंज के स्वामी रामशंकर और शिवशंकर ने मकान दान के रूप में दिया था। अखाड़े की ओर से संपत्ति का बैनामा कराने के बाद जब नामांतरण के लिए नगर निगम में प्रार्थनापत्र दिया गया तो पता चला कि राहुल और अरुण कुमार ने अपने पक्ष में फर्जी तौर से बैनामा करा लिया है। इन लोगों ने इसके लिए दानकर्ता शिवशंकर और रामशंकर के मृतक भाई उमाशंकर के नाम पर किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा कर बैनामा करा लिया। उमाशंकर की मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र भी लगा दिया गया। इसके अनुसार उनकी मृत्यु आठ जनवरी 2013 को हुई थी। जबकि मृतक के भाइयों और नगर निगम द्वारा जारी एक अन्य मृत्यु प्रमाणपत्र के अनुसार उमाशंकर की मृत्यु 1969 में ही हो गई थी। एक ही व्यक्ति के दो मृत्यु प्रमाणपत्र सामने आने पर अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। इस मामले में जूना अखाड़े के लिए उपाध्यक्ष महंत प्रेमगिरी ने अभियुक्तगण के खिलाफ कीडगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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