जज की लगा दी मुख्य स्थायी अधिवक्ता के अधीन ड्यूटी, वकीलों में विभागों का बंटवारा करने में शासन की बड़ी चूक
हाईकोर्ट में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी करने के लिए सरकारी वकीलों में विभागों का बंटवारा करने में शासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बिना सरकारी वकीलों की सूची का ठीक से मिलान किए पूर्व में सरकारी पैनल में रह चुके अधिवक्ताओं की भी ड्यूटी लगा दी गई।
ऐसी ही एक बड़ी लापरवाही तब उजागर हुई जब पता चला कि मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं के मातहत जिन अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं की ड्यूटी लगाई लगाई गई है उनमें एक जज का नाम भी शामिल है।
दर असल ये जज पूर्व में अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रह चुके हैं। अब जज बन चुके हैं। सरकारी वकीलों की ड्यूटी तय करते समय इस बात का ध्यान दिए बिना पुरानी सूची से ही ड्यूटी लगा दी गई। इसी प्रकार से एक अन्य अधिवक्ता जो कई साल पहले अपर मुख्य मुख्य स्थायी अधिवक्ता थे और अब इस पद पर नहीं है।
वर्तमान में वह अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम के पद पर हैं उनकी ड्यूटी भी मुख्य स्थायी अधिवक्ता के मातहत लगा दी गई। न्याय विभाग की इस लापरवाही की वजह से किरकिरी हो रही है। हालांकि यह लापरवाही सामने आने के बाद दोपहर में ही न्याय विभाग ने त्रुटि सुधारते हुए जज और दो वकीलों का नाम उस सूची से हटा दिया है तथा इसकी सूचना भी मुख्य स्थायी अधिवक्ता विकास चंद्र त्रिपाठी को भेज दी है।
अभी तक कोई भी सरकारी वकील किसी भी विभाग के मुकदमे की पैरवी कर सकता था। काम की सहूलियत के लिए अपर महाधिवक्ताओं को विभाग बांटे गए हैं। उनके अधीन मुख्य स्थायी अधिवक्ता होंगे जबकि मुख्य स्थायी अधिवक्ता का सहयोग करने के लिए अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है।