Prayagraj News : आठ साल से बिना बिजली के जिंदगी गुजार रहा जौहरी परिवार, अधिकारियों का चक्कर काटकर हारे
झुलसा देने वाली गर्मी हो या सर्दी की रातें, इस परिवार ने आठ साल दिन-रात बिजली के इंतजार में ही गुजार दिए। मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर अफसरों के दफ्तर तक रविंद्र जौहरी बिजली कनेक्शन के लिए फरियाद लगा चुके हैं।
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हर गरीब की झोपड़ी से लेकर आमोखास के घर तक बिजली पहुंचाने के सरकार के दावे ने प्रीतमनगर में दम तोड़ दिया है। एक दिन पहले ही शुक्रवार को यहां दौरे पर आए ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर के हर घर को रोशन करने के दावे की हवा तब निकल गई, जब शहर के प्रीतमनगर में एक परिवार ने आठ साल की मशक्कत के बाद भी बिजली कनेक्शन न मिलने की गुहार लगाकर लोगों को हैरत में डाल दिया। यहां जौहरी परिवार पिछले आठ सालों से बिजली कनेक्शन के लिए अफसरों की परिक्रमा कर रहा है।
झुलसा देने वाली गर्मी हो या सर्दी की रातें, इस परिवार ने आठ साल दिन-रात बिजली के इंतजार में ही गुजार दिए। मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर अफसरों के दफ्तर तक रविंद्र जौहरी बिजली कनेक्शन के लिए फरियाद लगा चुके हैं। लेकिन, इसके बाद भी उन्हें अपने छोटे से घर में बिजली नसीब नहीं हुई। आखिर में हारकर इस परिवार को अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाना पड़ा। बिजली विभाग की ओर से एक के बाद एक योजनाएं लाई गईं। विभागीय अधिकारियों ने उन योजनाओं के नाम पर अपनी पीठ भी खूब थपथपाई, लेकिन इस परिवार की आस आज तक पूरी नहीं हो सकी।
रविंद्र बीपीसीएल में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पद से वर्ष 2008 में सेवानिवृत्त हुए हैं। प्रीतमनगर की एलआईजी कॉलोनी में रहने वाले इस सेवानिवृत्त अधिकारी की बेटी आगरा के केमिकल रिएक्शन (आईसीएमआर) प्रोजेक्ट में काम करती थी। वर्ष 2012 में उसे केमिकल रिएक्शन हो गया। इसके चलते पूरे परिवार को आगरा में जाकर बेटी के साथ रहना पड़ा। इस रिएक्शन की वजह से साल 2014 में बेटी चल बसी। इसके बाद आगरा से वर्ष 2015 में यह परिवार वापस प्रयागराज आ गया।
तब बिजली विभाग ने घर में न रहने की सजा इस परिवार को बिजली का लंबा चौड़ा बिल भेजकर दी। रविंद्र के मुताबिक उन्होंने इसकी शिकायत तत्कालीन उपखंड अधिकारी उमाकांत से की। लेकिन, उन्होंने खूब नियमों के पाठ पढ़ाए और उपखंड का चक्कर लगवाते रहे। तब तक बिल बढ़कर 20 हजार रुपये से अधिक हो गया। परिवार इस बिल को लेकर विभागीय अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन निस्तारण करने की बजाए वर्ष 2015 में बिना बताए कनेक्शन काट दिया गया।
पीड़ित परिवार जब अधिकारियों के दफ्तरों की दौड़ लगाकर हार गया तो परिवार ने सीजीआरएस (विद्युत व्यथा निवारण फोरम) का दरवाजा खटखटाया और वहां अपनी बात रखी। इस पर कोर्ट का आदेश जारी हुआ कि चार हजार रुपये जमा कराकर कनेक्शन शुरू किया जाए। परिवार का कहना है कि उन्होंने पैसे जमा कर दिए, लेकिन बिजली विभाग ने आदेश को दरकिनार करते हुए आज तक कनेक्शन नहीं दिया। जबकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित परिवार ने अबतक चार हजार रुपये की राशि नहीं जमा की है।
अब भी जौहरी के घर जलती है लालटेन
शुक्रवार को जब ऊर्जा राज्यमंत्री के सामने यह मामला उठा तो राज्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिवार की समस्या का जल्द निस्तारण किया जाए। मंत्री के निर्देश के बाद उसी दिन पीड़ित परिवार के घर पहुंचे अधिशासी अभियंता मनोज गुप्ता ने मामला सुलझाने के लिए कहा। इस पर परिवार ने कहा कि विभाग पूरे मामले की जांच कराएं और दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करें।
रविंद्र जौहरी का कहना है कि सोलर पैनल जरूर लगवा लिया है, लेकिन अभी भी कई बार मौसम या अन्य तकनीकी खराबियों के चलते बिना बिजली के ही रहना पड़ता है। घर में अभी भी लालटेन और दिया का इस्तेमाल होता है। बिजली विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है, आठ साल सड़क की रोशनी देखकर गुजारे हैं। अब जब तक जांच नहीं हो जाती, तब तक विभाग व सिस्टम के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
यह पुराना मामला है। कई अधिकारियों को इस मामले की जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलने पर अधिकारियों ने परिवार के लोगों से बातचीत की है। परिवार सोलर का इस्तेमाल कर रहा है और बिजली का कनेक्शन लेने को तैयार नहीं है। तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे तो उसपर विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी। - विनोद कुमार गंगवार, मुख्य अभियंता (वितरण)