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फाइलों में दबी जनेश्वर मिश्र अल्ट्रा मार्डन लाइब्रेरी
अमर उजाला ब्यूरो, काैश्ाांबी
Updated Mon, 08 Jun 2015 01:30 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। छोटे लोहिया के नाम पर प्रदेश सरकार भले ही कई योजनाएं चला रही हो, मगर इलाहाबाद में किए गए वादे को अब तक पूरा नहीं कर सकी है। कुंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि जनेश्वर मिश्र अल्ट्रा मार्डन लाइब्रेरी की सौगात जल्द देंगे, लेकिन शासन में प्रस्ताव पहुंचने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। जनेश्वर मिश्र की कर्मस्थली इलाहाबाद रही है और वहीं पर उनके नाम पर किए वादे को पूरा नहीं किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लाइब्रेरी बनाने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय अभिलेखागार कार्यालय को सौंपी गई। प्रस्ताव में सात मंजिला लाइब्रेरी में तीन मंजिल लाइब्रेरी के लिए शामिल किए गए हैं। बाकी में प्रदर्शनी वीथिका, कांफ्रेंस हाल, पांडुलिपि और अभिलेखागार कार्यालय के लिए तैयार किया गया है। इसमें ई-लाइब्रेरी की भी सुविधा को रखा गया है। जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा बिना किसी शुल्क के यहां आकर बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। शहरी हजारों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों और अभिलेखों को प्रदर्शित करने करने की व्यवस्था को शामिल किया गया है।
इसके निर्माण के लिए सबसे पहले नैनी औद्योगिक क्षेत्र में जमीन तलाशी गई। मगर शहर से दूर होने की वजह से इसे बात नहीं बनी। इसके बाद शहर के बीचों बीच कारपेंट्री स्कूल की खाली जमीन का चयन किया गया, जहां उप्र लघु उद्योग निगम लिमिटेड का कार्यालय भी है। जमीन की कीमत 19 करोड़ रुपये है। मगर अभी तक शासन स्तर से जमीन हस्तांतरण का मामला अटका हुआ है। अगर यह लाइब्रेरी बन जाए तो युवाओं को तो सहूलियत होगी ही साथ ही साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक अच्छा स्थान भी शहरियों को मिल जाए। क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित कुमार अग्निहोत्री का कहना है कि सात मंजिल के जनेश्वर मिश्रा अल्ट्रा मार्डन लाइब्रेरी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक वहां से कार्रवाई को आगे बढ़ाने को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
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मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लाइब्रेरी बनाने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय अभिलेखागार कार्यालय को सौंपी गई। प्रस्ताव में सात मंजिला लाइब्रेरी में तीन मंजिल लाइब्रेरी के लिए शामिल किए गए हैं। बाकी में प्रदर्शनी वीथिका, कांफ्रेंस हाल, पांडुलिपि और अभिलेखागार कार्यालय के लिए तैयार किया गया है। इसमें ई-लाइब्रेरी की भी सुविधा को रखा गया है। जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा बिना किसी शुल्क के यहां आकर बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। शहरी हजारों वर्ष पुरानी पांडुलिपियों और अभिलेखों को प्रदर्शित करने करने की व्यवस्था को शामिल किया गया है।
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इसके निर्माण के लिए सबसे पहले नैनी औद्योगिक क्षेत्र में जमीन तलाशी गई। मगर शहर से दूर होने की वजह से इसे बात नहीं बनी। इसके बाद शहर के बीचों बीच कारपेंट्री स्कूल की खाली जमीन का चयन किया गया, जहां उप्र लघु उद्योग निगम लिमिटेड का कार्यालय भी है। जमीन की कीमत 19 करोड़ रुपये है। मगर अभी तक शासन स्तर से जमीन हस्तांतरण का मामला अटका हुआ है। अगर यह लाइब्रेरी बन जाए तो युवाओं को तो सहूलियत होगी ही साथ ही साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक अच्छा स्थान भी शहरियों को मिल जाए। क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित कुमार अग्निहोत्री का कहना है कि सात मंजिल के जनेश्वर मिश्रा अल्ट्रा मार्डन लाइब्रेरी का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक वहां से कार्रवाई को आगे बढ़ाने को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
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