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जाम, अतिक्रमण पर कागजी कार्रवाई से हाईकोर्ट नाराज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 03 Aug 2017 02:00 AM IST
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शहर में अतिक्रमण और जाम की समस्या से निपटने के बजाए कागजों पर कार्रवाई करने की प्रवृत्ति पर हाईकोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। महज दिखावे के लिए दाखिल डीएम और एसएसपी के हलफनामे को नामंजूर करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर अधिकारी वास्तविक कार्रवाई करने केे बाद हलफनामा और फोटोग्राफ दाखिल करें। कोर्ट ने वकीलों को भी छूट दी कि जहां कहीं भी जाम और अतिक्रमण की समस्या दिखे उसका फोटो खींचकर अदालत में प्रस्तुत किया जाए। यदि अफसरों की लापरवाही मिली तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया जाएगा।
शहर को जाम और अतिक्रमण से मुक्त कराने के मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने नए सिरे से जोनवार अतिक्रमण अभियान और यातायात सुधारने के लिए किए गए कार्यों पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। डीएम द्वारा दाखिल हलफनामे और उसके साथ संलग्न फोटोग्राफ देखने के बाद पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह साफ है कि सुनवाई के एक दिन पहले सिर्फ दिखावे के लिए कार्रवाई कर फोटोग्राफ खींचे गए हैं। सारा अभियान कागजों पर चल रहा है। सिविल लाइंस में एक गुमटी हटाकर कार्रवाई की इतिश्री कर ली। डीएम के हलफनामे में यह नहीं कहा गया कि मुख्य और संपर्क मार्ग अतिक्रमण से मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोर्ट ने 14 जुलाई को आदेश दिया था कि सभी मार्गों और फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया जाए। सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों का चालान किया गया है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात पुलिस की तैनाती की गई है। अतिक्रमण कर लगाई गई दुकानों को हटाया गया है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिया कि स्कूली बच्चों के वाहन, वैन, बसें और रिक्शा-ट्रालियां किसी भी सूरत में जाम न फंसने पाएं। स्कूलों की छुट्टी के समय यदि स्कूली वाहन फंसे तो इसकी व्यवस्था से जुड़ा हर अधिकारी और कर्मचारी इस बात के लिए जिम्मेदार होगा।
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कोर्ट ने वकीलों से भी कहा है कि यदि उनको कहीं ऐसी जगह जाम दिखता है जहां पुलिस होती तो जाम न लगता या सही प्रबंधन करके जाम से बचा जा सकता था, वहां की फोटो खींचकर कोर्ट में पेश करें। कोर्ट डीएम से कहेगी की वह स्वयं उस जाम में अपनी गाड़ी ले जाएं, ताकि उनको एहसास हो सके कि आम जनता को जाम से क्या तकलीफें होती हैं।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 16 अगस्त तक पूरे सिविल लाइंस और अन्य क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराएं और यह भी सुनिश्चित करें कि खाली कराई गई जगह पर दोबारा अतिक्रमण नहीं हुआ है। 16 अगस्त को इस आशय का हलफनामा दाखिल किया जाए।
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शहर को जाम और अतिक्रमण से मुक्त कराने के मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने नए सिरे से जोनवार अतिक्रमण अभियान और यातायात सुधारने के लिए किए गए कार्यों पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। डीएम द्वारा दाखिल हलफनामे और उसके साथ संलग्न फोटोग्राफ देखने के बाद पीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह साफ है कि सुनवाई के एक दिन पहले सिर्फ दिखावे के लिए कार्रवाई कर फोटोग्राफ खींचे गए हैं। सारा अभियान कागजों पर चल रहा है। सिविल लाइंस में एक गुमटी हटाकर कार्रवाई की इतिश्री कर ली। डीएम के हलफनामे में यह नहीं कहा गया कि मुख्य और संपर्क मार्ग अतिक्रमण से मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोर्ट ने 14 जुलाई को आदेश दिया था कि सभी मार्गों और फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया जाए। सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों का चालान किया गया है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात पुलिस की तैनाती की गई है। अतिक्रमण कर लगाई गई दुकानों को हटाया गया है।
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हाईकोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिया कि स्कूली बच्चों के वाहन, वैन, बसें और रिक्शा-ट्रालियां किसी भी सूरत में जाम न फंसने पाएं। स्कूलों की छुट्टी के समय यदि स्कूली वाहन फंसे तो इसकी व्यवस्था से जुड़ा हर अधिकारी और कर्मचारी इस बात के लिए जिम्मेदार होगा।
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कोर्ट ने वकीलों से भी कहा है कि यदि उनको कहीं ऐसी जगह जाम दिखता है जहां पुलिस होती तो जाम न लगता या सही प्रबंधन करके जाम से बचा जा सकता था, वहां की फोटो खींचकर कोर्ट में पेश करें। कोर्ट डीएम से कहेगी की वह स्वयं उस जाम में अपनी गाड़ी ले जाएं, ताकि उनको एहसास हो सके कि आम जनता को जाम से क्या तकलीफें होती हैं।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 16 अगस्त तक पूरे सिविल लाइंस और अन्य क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराएं और यह भी सुनिश्चित करें कि खाली कराई गई जगह पर दोबारा अतिक्रमण नहीं हुआ है। 16 अगस्त को इस आशय का हलफनामा दाखिल किया जाए।