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भ्रष्टाचार में डूबा जलकल विभाग
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 17 May 2016 02:30 AM IST
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सोमवार को नगर निगम सदन की बैठक में महापौर के समक्ष विरोध दर्ज कराते पार्षद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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जलकल विभाग आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा है। कर्मचारियों की वर्दी के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये स्वीकृत होते हैं लेकिन वर्दी में कोई कर्मचारी नहीं दिखता। हर वर्ष ट्यूबवेल के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बड़ी संख्या में नए पंप आते हैं लेकिन ट्यूबवेलों से निकलने वाले पुराने पंपों का कोई हिसाब नहीं है। हाल में 13वें वित्त आयोग से मिले 18 करोड़ रुपये से अधिक की रकम में भी जमकर घालमेल किया गया है। सोमवार को नगर निगम सदन की बैठक में जलकल विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान पार्षदों ने यह आरोप लगाए और जवाब मांगा लेकिन अफसर इन गंभीर आरोपों में से किसी का भी जवाब नहीं दे सके। छिटपुट हंगामें के बीच पांच घंटे से अधिक चली बैठक में कुछ संशोधन के साथ 89 करोड़ छह लाख 39 हजार रुपये आय एवं 84 करोड़ 68 लाख 60 रुपये व्यय वाले बजट को मंजूरी दे दी गई।
महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी की अध्यक्षता और नगर आयुक्त शेष मणि पांडेय की मौजूदगी में हुई बजट बैठक में जलकल विभाग के लेखाधिकारी ने बजट पेश किया। शुरूआत में पार्षदों ने पूरे शहर में दूषित जलापूर्ति, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन, लीकेज में बर्बाद हो रहे पानी और सीवर जाम का मुद्दा उठाया। कहा गया कि सीवर लाइन बिछाने के कारण लगातार गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। शिकायत के बावजूद जलकल विभाग के अफसर इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। पार्षद शिव सेवक सिंह ने स्लैब रेट का मुद्दा उठाया। कहा कि 1999 के स्लैब रेट के आधार पर वर्तमान दर से मूल्यांकन कर जलकल की वसूली की जा रही है। इसमें वर्ष 2011 से एरियर भी लिया जा रहा है जो गलत है। पार्षद सत्येंद्र चोपड़ा ने कहा कि जेएनएनयूआरएम योजना 2006 में शुरू होकर 2014 में खत्म हो गई लेकिन शहरियों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा। रानीमंडी बशीर पार्क स्थित भूमिगत जलाशय से आपूर्ति अब तक नहीं शुरू हुई। इस योजना में जो भी काम हुए, जलकल विभाग ने टेकओवर भी कर लिए लेकिन यह जानने की कोशिश नहीं की कि कहां काम पूरे हुए।
अतहर रजा लाडले ने मनमाने तरीके से पेयजल लाइन डालकर पैसे की बर्बादी का आरोप लगाया। बिना जांच किए योजना टेकओवर करने के मामले में जांच कर दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की। पार्षद राजेश निषाद ने दारागंज की 12 गलियों में पेयजल लाइन बिछाने और कनेक्शन अब तक न करने का मामला उठाया। पार्षद राजू शुक्ला ने लीकेज के रूप में 40 प्रतिशत तक बर्बाद हो रहे पानी को लगाम तथा 48 प्रतिशत छूटे मकानों को भी टैक्स के दायरे में लगाने को कहा। पार्षद नेम यादव ने वर्दी, रेखा उपाध्याय में हर वर्ष खरीदे जाने वाले नए पंप, ट्यूबवेल से निकलने वाले खराब पंप तथा अफसरों के लिए लगी गाड़ियों के किराए के बारे में पूछा लेकिन अफसर कोई जवाब नहीं दे सके। हद तो तब हो गई जब 13वें वित्त से जलकल विभाग को हाल ही में दिए गए 18 करोड़ 27 लाख 77 हजार रुपये का हिसाब मांगा गया। प्रभारी जीएम एके स्वामी इसका भी जवाब नहीं दे सके। उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि ट्यूबवेलों की रीबोरिंग के लिए सीएंडडीएस को 1.11 करोड़ रुपये दिए गए। बिना काम हुए एक मुश्त इतनी बड़ी रकम देेने पर महापौर ने फटकार भी लगाई। उन्होंने जलकल विभाग में पारदर्शिता न होने पर भी जीएम समेत अफसरों को जमकर लताड़ा और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में पार्षद विजय पुर्सवानी, भोला तिवारी, शम्स तवरेज, नीरज गुप्ता, पुष्पा कुशवाहा, लाज सोनकर, सोनिका अग्रवाल, किरन जायसवाल, राजेश कुशवाहा, गणेश केसरवानी, सुशील यादव आदि ने सवाल किए।
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सदन में हुए संकल्प
0 नए मूल्यांकन और सदन में पारित नए स्लैब रेट के आधार पर भेजे जाएंगे बिल।
0 वित्तीय वर्ष 2014-15 से लिया जाएगा जलकर, जलमूल्य पर एरियर।
0 जलकल विभाग योजना को टेकओवर करने के पहले मौके पर जांच करें। काम ठीक और पूरा नहीं है तो टेकओवर न किया जाए।
0 सीवर, पेयजल लाइन बिछाने के हो रहे काम की निगरानी जलकल विभाग के अभियंता भी करें।
0 जलकल विभाग में पिछले 10 वर्ष में जितनी भी मशीनें आई, जिन अफसरों ने मंगाई, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाए।
0 48 प्रतिशत छूटे मकानों को जलकर के दायरे में लाया जाए। यह काम दो माह में पूरा हो। मकानों के सर्वे के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत
0 13वें वित्त से ट्यूबवेल की रीबोरिंग के लिए एकमुश्त 1.11 करोड़ रुपये देने वाले अफसर के खिलाफ कार्रवाई।
0 जलकल विभाग में तत्काल ई-टेंडरिंग लागू हो और पंजीकृत ठेकेदार ही टेंडर डाले।
0 बारिश के मद्देनजर सीवर लाइन की सफाई तत्काल शुरू हो। इसके लिए आउटसोर्सिंग से कर्मी लगाए जाएं और उन्हें बूट, ग्लब्स, मास्क भी दिए जाएं।
इन मदों में कम हुआ बजट
0 सीवर चैंबर के ढक्कन पर 1.37 करोड़ से घटाकर 80 लाख रुपये।
0 अफसरों की गाड़ियों का किराया 20 लाख से घटाकर 16 लाख रुपये।
0 पंपिंग स्टेशनों के रखरखाव के लिए 6.30 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ रुपये।
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महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी की अध्यक्षता और नगर आयुक्त शेष मणि पांडेय की मौजूदगी में हुई बजट बैठक में जलकल विभाग के लेखाधिकारी ने बजट पेश किया। शुरूआत में पार्षदों ने पूरे शहर में दूषित जलापूर्ति, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन, लीकेज में बर्बाद हो रहे पानी और सीवर जाम का मुद्दा उठाया। कहा गया कि सीवर लाइन बिछाने के कारण लगातार गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। शिकायत के बावजूद जलकल विभाग के अफसर इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। पार्षद शिव सेवक सिंह ने स्लैब रेट का मुद्दा उठाया। कहा कि 1999 के स्लैब रेट के आधार पर वर्तमान दर से मूल्यांकन कर जलकल की वसूली की जा रही है। इसमें वर्ष 2011 से एरियर भी लिया जा रहा है जो गलत है। पार्षद सत्येंद्र चोपड़ा ने कहा कि जेएनएनयूआरएम योजना 2006 में शुरू होकर 2014 में खत्म हो गई लेकिन शहरियों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा। रानीमंडी बशीर पार्क स्थित भूमिगत जलाशय से आपूर्ति अब तक नहीं शुरू हुई। इस योजना में जो भी काम हुए, जलकल विभाग ने टेकओवर भी कर लिए लेकिन यह जानने की कोशिश नहीं की कि कहां काम पूरे हुए।
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अतहर रजा लाडले ने मनमाने तरीके से पेयजल लाइन डालकर पैसे की बर्बादी का आरोप लगाया। बिना जांच किए योजना टेकओवर करने के मामले में जांच कर दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की। पार्षद राजेश निषाद ने दारागंज की 12 गलियों में पेयजल लाइन बिछाने और कनेक्शन अब तक न करने का मामला उठाया। पार्षद राजू शुक्ला ने लीकेज के रूप में 40 प्रतिशत तक बर्बाद हो रहे पानी को लगाम तथा 48 प्रतिशत छूटे मकानों को भी टैक्स के दायरे में लगाने को कहा। पार्षद नेम यादव ने वर्दी, रेखा उपाध्याय में हर वर्ष खरीदे जाने वाले नए पंप, ट्यूबवेल से निकलने वाले खराब पंप तथा अफसरों के लिए लगी गाड़ियों के किराए के बारे में पूछा लेकिन अफसर कोई जवाब नहीं दे सके। हद तो तब हो गई जब 13वें वित्त से जलकल विभाग को हाल ही में दिए गए 18 करोड़ 27 लाख 77 हजार रुपये का हिसाब मांगा गया। प्रभारी जीएम एके स्वामी इसका भी जवाब नहीं दे सके। उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि ट्यूबवेलों की रीबोरिंग के लिए सीएंडडीएस को 1.11 करोड़ रुपये दिए गए। बिना काम हुए एक मुश्त इतनी बड़ी रकम देेने पर महापौर ने फटकार भी लगाई। उन्होंने जलकल विभाग में पारदर्शिता न होने पर भी जीएम समेत अफसरों को जमकर लताड़ा और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में पार्षद विजय पुर्सवानी, भोला तिवारी, शम्स तवरेज, नीरज गुप्ता, पुष्पा कुशवाहा, लाज सोनकर, सोनिका अग्रवाल, किरन जायसवाल, राजेश कुशवाहा, गणेश केसरवानी, सुशील यादव आदि ने सवाल किए।
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सदन में हुए संकल्प
0 नए मूल्यांकन और सदन में पारित नए स्लैब रेट के आधार पर भेजे जाएंगे बिल।
0 वित्तीय वर्ष 2014-15 से लिया जाएगा जलकर, जलमूल्य पर एरियर।
0 जलकल विभाग योजना को टेकओवर करने के पहले मौके पर जांच करें। काम ठीक और पूरा नहीं है तो टेकओवर न किया जाए।
0 सीवर, पेयजल लाइन बिछाने के हो रहे काम की निगरानी जलकल विभाग के अभियंता भी करें।
0 जलकल विभाग में पिछले 10 वर्ष में जितनी भी मशीनें आई, जिन अफसरों ने मंगाई, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाए।
0 48 प्रतिशत छूटे मकानों को जलकर के दायरे में लाया जाए। यह काम दो माह में पूरा हो। मकानों के सर्वे के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत
0 13वें वित्त से ट्यूबवेल की रीबोरिंग के लिए एकमुश्त 1.11 करोड़ रुपये देने वाले अफसर के खिलाफ कार्रवाई।
0 जलकल विभाग में तत्काल ई-टेंडरिंग लागू हो और पंजीकृत ठेकेदार ही टेंडर डाले।
0 बारिश के मद्देनजर सीवर लाइन की सफाई तत्काल शुरू हो। इसके लिए आउटसोर्सिंग से कर्मी लगाए जाएं और उन्हें बूट, ग्लब्स, मास्क भी दिए जाएं।
इन मदों में कम हुआ बजट
0 सीवर चैंबर के ढक्कन पर 1.37 करोड़ से घटाकर 80 लाख रुपये।
0 अफसरों की गाड़ियों का किराया 20 लाख से घटाकर 16 लाख रुपये।
0 पंपिंग स्टेशनों के रखरखाव के लिए 6.30 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ रुपये।