फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   j Municipal Corporation: The political journey passed through the streets of Sangam Nagri till the ramparts of

प्रयागराज नगर निगम : संगमनगरी की गलियों से होकर गुजरा लाल किले की प्राचीर तक का सियासी सफर

Tue, 11 Apr 2023 12:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 11 Apr 2023 12:19 AM IST
सार

संगमनगरी के मिनी सदन में सियासत का ककहरा सीखने वाले राजनीति के कई पुरोधा लाल किले की प्राचीर तक का सफर तय कर चुके हैं। इस निकाय ने किसी जमाने में शहर की गलियों से पीएम भी दिए और राज्यपाल भी।

विज्ञापन
j Municipal Corporation: The political journey passed through the streets of Sangam Nagri till the ramparts of
पंडित जवाहर लाल नेहरू - फोटो : social media

विस्तार

संगमनगरी के मिनी सदन में सियासत का ककहरा सीखने वाले राजनीति के कई पुरोधा लाल किले की प्राचीर तक का सफर तय कर चुके हैं। इस निकाय ने किसी जमाने में शहर की गलियों से पीएम भी दिए और राज्यपाल भी। निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही शहर की नगर महापालिका से लेकर नगर निगम तक के स्वर्णिम अतीत के पन्ने एक बार फिर चाय-पान की दुकानोें पर दोहराए जाने लगे हैं।

विज्ञापन


इलाहाबाद नगर महापालिका के प्रथम चेयरमैन शिवचरन लाल अक्तूबर 1916 में निर्वाचित हुए थे। इनके बाद राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन ने तीन जनवरी 1921 को इस कुर्सी को सुशोभित किया। इसी क्रम में शहर के विकास पुरुष के रूप में कामता प्रसाद कक्कड़ ने 23 मार्च 1922 से 29 मार्च 1923 तक का सियासी सफर तय किया। इस शहर की महापालिका से अपनी सियासी पारी शुरुआत कभी पं. जवाहर लाल नेहरू ने भी की थी।
विज्ञापन


नेहरू इस महापालिका का चौथे चेयरमैन रहे हैं। इसी देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी इसी शहर के मिनी सदन से होकर दिल्ली दरबार तक पहुंचे थे। बदले दौर में अब भले ही पं. नेहरू की इस कर्मभूमि पर कांग्रेस राजनीतिक शून्यता की ओर पहुंच गई है, लेकिन निकाय चुनाव का शंखनाद होते ही सियासी पारा चढ़ने के बीच लोग उन्हें लोग याद करने लगे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

कॉफी हाउस में चुनावी चर्चा में मशगूल बाबा अभय अवस्थी कहते हैं कि यह धरा सियासी सोने की खान रही है। यहां से नेहरू, शास्त्री के अलावा बिश्वंभर नाथ पांडेय सरीखे राजनीतिक शूरमा निकल चुके हैं। इस बार नगर निगम से फिर राजनीति की दिशा तय होनी चाहिए। फिलहाल इस निकाय चुनाव में कांग्रेसी हर अड़ी, चौराहे पर नेहरू को याद कर रहे हैं। पूर्व सभासद शिव सेवक सिंह कहते हैं कि इस बार की चुनाव काफी दिलचस्प होने जा रहा है।

ब्रिटिश हुकूमत में पहली बार 1863 में गठित हुई थी म्युनिसिपल कमेटी

ब्रिटिश हुकूमत में पहली बार 1863 में म्युनिसिपल कमेटी गठित की गई थी। उस समय कमेटी में 50 सदस्यों को नामित किया गया था। जिनमें छह छह पदेन सदस्य और बाकी 19 को हर साल चुना जाता था।

इसके बाद 1867 में इलाहाबाद समेत 13 म्युनिसिपल कमेटियों का गठन हुआ। जिसमें दो वर्षों के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नामित किए जाते थे। तब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अधिकतर अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारी ही बनाए जाते थे। 1883 में नार्थ वेस्टर्न प्रोविसेज एंड अवध म्युनिसिपिलिटी को सीमित अधिकार दिए गए। 1916 में इलाहाबाद म्पुनिसिपल बोर्ड का गठन हुआ, जिसके अध्यक्ष शिवचरण लाल बने। 1921 में पुरुषोत्तम दास चेयरमैन चुने गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed