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जब मामला विशुद्ध दीवानी प्रकृति का हो तो आपराधिक कार्रवाई चलाना सही नहीं
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामला विशुद्ध दीवानी प्रकृति का हो तो आपराधिक कार्रवाई नहीं चल सकती है। मौजूदा मामला भी ऐसा ही है। लिहाजा याचिका पोषणीय नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सैय्यद आफताब हुसैन रिजवी ने राममनोहर याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि विधि का यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि किसी मामले में दीवानी और आपराधिक मामले साथ-साथ चल सकते हैं लेकिन जब मामला विशुद्ध रूप से दीवानी का हो तो आपराधिक वाद नहीं चलाया जा सकता है।
मामले में याची ने सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी थी। उसका आरोप था कि विपक्षी पक्ष ने उसके नाली चकमार्ग आदि तोड़कर अपने चक में मिला लिया, जिससे आवेदक का आवागमन पूर्णत: बाधित हो गया। याची ने तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र देकर विपक्षी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जबकि तहसीलदार से इस संबंध में आदेश भी पारित किया था। एफआईआर दर्ज न होने से विपक्षी पक्ष के हौसले और बढ़ गए।
इस वजह से उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी थी लेकिन उसकी अर्जी खारिज हो गई। इसके साथ ही सत्र न्यायाधीश के समक्ष भी मामले को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी पक्ष द्वारा सरकारी नाली, तालाब की जमीन पर कब्जा किया गया है। जिससे याची और उसके परिजनों के आवागमन में समस्या पैदा हुई। कोर्ट ने कहा कि मामले में राजस्व विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई की गई है। वहीं उसके लिए विधिमान्य व्यवस्था है।
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मामले में याची ने सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी थी। उसका आरोप था कि विपक्षी पक्ष ने उसके नाली चकमार्ग आदि तोड़कर अपने चक में मिला लिया, जिससे आवेदक का आवागमन पूर्णत: बाधित हो गया। याची ने तहसील दिवस पर प्रार्थना पत्र देकर विपक्षी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जबकि तहसीलदार से इस संबंध में आदेश भी पारित किया था। एफआईआर दर्ज न होने से विपक्षी पक्ष के हौसले और बढ़ गए।
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इस वजह से उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी थी लेकिन उसकी अर्जी खारिज हो गई। इसके साथ ही सत्र न्यायाधीश के समक्ष भी मामले को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी पक्ष द्वारा सरकारी नाली, तालाब की जमीन पर कब्जा किया गया है। जिससे याची और उसके परिजनों के आवागमन में समस्या पैदा हुई। कोर्ट ने कहा कि मामले में राजस्व विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई की गई है। वहीं उसके लिए विधिमान्य व्यवस्था है।
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