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प्रापर्टी सीज करने की सूचना मजिस्ट्रेट को देना जरूरी ः हाईकोर्ट
Sat, 25 Jul 2020 08:53 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 25 Jul 2020 08:53 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी किसी ऐसी प्रापर्टी को सीज करता है, जिसका किसी अपराध से संबंध है तो प्रापर्टी सीज करने के बाद इसकी सूचना सक्षम क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट को देना जरूरी है। मगर, प्रापर्टी सीज करने से पूर्व मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 102 की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि प्रापर्टी सीज करने की सूचना मजिस्ट्रेट को समय से दी गई है तो प्रापर्टी रिलीज कराने के लिए याची संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सकता है।
नोएडा के इंडिपेडेंट टीवी नेटवर्क की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने यह आदेश दिया। प्रदेश सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता नीरजकांत वर्मा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने याची को अपने सीज बैंक खाते को खोलने के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने प्रार्थनापत्र देने और मजिस्ट्रेट को उस पर नियमानुसार निर्णय लेने का आदेश दिया है।
याची कंपनी के वकील का कहना था कि उसको पंजाब नेशनल बैंक नोएडा में करेंट एकाउंट खोलने का एसएसपी नोएडा को आदेश दिया जाए। पुलिस और ईडी ने याची के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका बैंक एकाउंट सीज कर दिया है। इस मामले में सीआरपीसी की धारा 102 के प्रावधानों को लेकर बहस हुई। याची का कहना था कि नियमानुसार खाता सीज करने की कार्रवाई से पूर्व मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं ली गई।
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कोर्ट ने कहा कि धारा 102 (3) के तहत पुलिस अधिकारी कोई भी ऐसी संपत्ति जब्त कर सकता है, जिसका किसी अपराध से संबंध है। इसके बाद पुलिस अधिकारी को इसकी जानकारी संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट को देनी होगी। सीज करने से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक नहीं है। याची का खाता सीज करने की जानकारी एसीजेएम तृतीय को पुलिस द्वारा दी गई थी।
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नोएडा के इंडिपेडेंट टीवी नेटवर्क की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने यह आदेश दिया। प्रदेश सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता नीरजकांत वर्मा ने पक्ष रखा। कोर्ट ने याची को अपने सीज बैंक खाते को खोलने के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने प्रार्थनापत्र देने और मजिस्ट्रेट को उस पर नियमानुसार निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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याची कंपनी के वकील का कहना था कि उसको पंजाब नेशनल बैंक नोएडा में करेंट एकाउंट खोलने का एसएसपी नोएडा को आदेश दिया जाए। पुलिस और ईडी ने याची के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका बैंक एकाउंट सीज कर दिया है। इस मामले में सीआरपीसी की धारा 102 के प्रावधानों को लेकर बहस हुई। याची का कहना था कि नियमानुसार खाता सीज करने की कार्रवाई से पूर्व मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं ली गई।
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कोर्ट ने कहा कि धारा 102 (3) के तहत पुलिस अधिकारी कोई भी ऐसी संपत्ति जब्त कर सकता है, जिसका किसी अपराध से संबंध है। इसके बाद पुलिस अधिकारी को इसकी जानकारी संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट को देनी होगी। सीज करने से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक नहीं है। याची का खाता सीज करने की जानकारी एसीजेएम तृतीय को पुलिस द्वारा दी गई थी।