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जांच टीम को नहीं मिले कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, खड़े हुए कई सवाल

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Wed, 10 Jul 2019 05:13 AM IST
Investigation team could't get more importants evidece.
Investigation team could't get more importants evidece. - फोटो : AU
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प्रयागराज। बैंक ऑफ इंडिया की सुलेमसराय शाखा की चेस्ट से सवा चार करोड़ रुपये से अधिक के गबन मामले में कई अन्य अफसर भी फंसते दिख रहे हैं। जांच के लिए सोमवार को आई मुंबई और वाराणसी की टीम को कई अहम दस्तावेज नहीं मिले। खास यह कि स्थानीय अफसरों ने पूरे मामले में चुप्पी साध ली है। इससे कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।
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बैंक की सुलेमसराय शाखा के करेंसी चेस्ट प्रभारी ने अपने जानने वालों को करोड़ों रुपये दे दिए हैं। यह प्रारंभिक आंकड़ा है। जांच के बाद राशि और बढ़ सकती है। शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक की एफआईआर पर पुलिस के अलावा बैंक की ओर से भी जांच शुरू कर दी गई है। इसी सिलसिले में जांच के लिए आई मुंबई और वाराणसी की टीम मंगलवार को रवाना हो गई।

मुख्यालय की ओर से गठित जांच टीम के सदस्यों ने दो दिन में शाखा के अफसरों और कर्मचारियों से पूछताछ की। वे सभी दस्तावेजों की कॉपी ले गए। इसके अलावा कम्प्यूटर के हार्डडिस्क की भी कॉपी ले गए। बैंक सूत्र के अनुसार जांच टीम को कई अहम दस्तावेज नहीं मिले। कई सवालों का जवाब भी अफसर नहीं दे पाए। चेस्ट प्रभारी से पैसा लेने वाले आरोपियों के बारे में भी अफसरों के पास ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसे लेकर जांच टीम के सदस्यों ने आपत्ति जताई। ऐसे में स्थानीय बैंक कर्मियों की भी गर्दन फंसती दिख रही है। इससे स्थानीय अफसरों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
कई अन्य को भी पैसा दिए जाने की आशंका
आरोपी चेस्ट प्रभारी ने प्रारंभिक बयान में अपने जानने वाले पिता-पुत्र को सवा चार करोड़ रुपये देने की बात कबूल की है लेकिन, कई अन्य को भी राशि दिए जाने की आशंका जताई जा रही है। तथाकथित आरोपी अभी पकड़ में भी नहीं आए हैं। इससे भी इस आशंका को और बल मिल रहा है। ऐसे में जांच टीम के सदस्यों की ओर से भी आशंका जताई जा रही है कि घोटाले की राशि बढ़ सकती है। इसके मद्देनजर जांच टीम के सदस्यों ने अफसराें से पूछताछ की। साथ ही सभी दस्तावेज ले गए। इसके अलावा आरोपी चेस्ट प्रभारी की कुंडली भी खंगाली जा रही है। आरोपी कर्मचारी की सभी तैनाती वाले स्थानों पर कार्यों की जांच की जाएगी।
अब जांच के लिए लखनऊ के अफसरों ने डाला डेरा
मुंबई और वाराणसी की टीम जांच करने के बाद वापस हो गई। इसके बाद मंगलवार को लखनऊ जोनल ऑफिस की जांच टीम ने डेरा डाल दिया। टीम में आईटी विशेषज्ञ भी शामिल हैं। लखनऊ जांच टीम के सदस्यों ने भी अफसरों और कर्मचारियों से जानकारी ली। आईटी विशेषज्ञ दिन भर कम्प्यूटर के हार्ड डिस्क से डेटा अपलोड करते रहे। चूंकि बैंक मुख्यालय की टीम को कई अहम दस्तावेज नहीं मिले हैं। माना जा रहा है कि मुख्यालय के निर्देश पर लखनऊ की टीम उन दस्तावेजों को भी खंगालेगी।
आखिर किसे बचा रहे बैंक के अफसर
हर लेनदेन में दो लोगों की होती है मंजूरी लेकिन, एफआईआर सिर्फ चेस्ट प्रभारी के खिलाफ
पांच स्तर पर लगातार होती रहती है चेस्ट में कैश की जांच, फिर भी गबन से उठे सवाल
शाखा के सिर्फ चेस्ट प्रभारी के खिलाफ एफआईआर लिखाए जाने तथा अफसरों के मौन से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। अफसरों के अनुसार बैंक में हर स्तर पर लेनदेन में कम से कम दो अफसरों की जवाबदेही तय होती है। चेस्ट पर भी दो अफसरों की निगरानी होती है। इसके अलावा नियमित तौर पर पांच स्तर पर चेस्ट में कैश की जांच की व्यवस्था है। ऐसे में सिर्फ चेस्ट प्रभारी को जांच के घेरे में लाए जाने से सवाल उठने लगा है कि बैंक अफसर आखिर किसे बचा रहे हैं।
लंबे समय तक चेस्ट का काम देखने वाले एक बैंक के अफसर ने बताया कि चेस्ट में प्रभारी के अलावा ज्वाइंट कस्डोडियम होता है। चेस्ट से हर लेनदेन पर दोनों अफसरों के हस्ताक्षर होते हैं। रजिस्टर पर नोटों के बंडल, संख्या, कहां जा रहा है समेत सभी विवरण दर्ज किए जाते हैं। इस रजिस्टर पर दोनों अफसरों के हस्ताक्षर होते हैं। चेस्ट में कितनी राशि है, किस तरह के नोट हैं, जाली नोट तो नहीं हैं इस पर निगरानी की जिम्मेदारी प्रभारी पर होती है। वहीं चेस्ट में पूरी राशि है, इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ज्वाइंट कस्डोडियन की होती है। इसकी रोजाना रिपोर्ट तैयार होती है जो आरबीआई को जाती है। इसके अलावा शाखा स्तर पर भी नियमित अंतराल पर कैश की जांच की जाती है। साथ ही दूसरी शाखा के अफसर से कैश की जांच कराई जाती है। इसके बाद बैंक की ओर से आंतरिक जांच कराई जाती है। इसके अलावा मुख्यालय के स्तर पर नियमित तौर पर चेस्ट की जांच कराई जाती है। अफसर का कहना है कि इस प्रक्रिया में चेस्ट में कैश की लगातार जांच होती रहती है। ऐसे में सिर्फ चेस्ट प्रभारी के स्तर पर इतना बड़ा गबन संभव नहीं है और बिना किसी मिलीभगत के ऐसा हुआ है तो आरोपी को खुली छूट दे दी गई थी, जो काफी गंभीर चूक है।
जल्द आ सकती है आरबीआई की जांच टीम
बैंक ऑफ इंडिया की सुलेमसराय शाखा की चेस्ट से गबन मामले में आरबीआई भी जांच करा सकती है। अफसरों की मानें तो जल्द आरबीआई की टीम भी आ सकती है। आरबीआई की ओर से गबन के अलावा चेस्ट में कैश रखने की क्या व्यवस्था है, इसकी भी जांच की जाएगी।
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