प्रयागराज : गोपनीय जांच में दो दिन पहले ही रडार पर आ गया था दरोगा
इंस्पेक्टर ने गोपनीय तरीके से तथ्य जुटाए तो शिकायत सही मिली। 21 अगस्त को उन्होंने अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें शिकायत सही मिलने का उल्लेख करते हुए ट्रैपिंग की संस्तुति कर दी। इसी के बाद से दरोगा एंटी करप्शन टीम के रडार पर आ गया था।
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रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार दरोगा आशीष राय दो दिन पहले हुई गोपनीय जांच में ही एंटी करप्शन टीम के रडार पर आ गया था। शिकायत मिलने पर टीम के एक इंस्पेक्टर ने शृंग्वेरपुर पहुंचकर प्री ट्रैप गोपनीय जांच की थी। इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर ही दरोगा ट्रैप किया गया और उसे रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों का कहना है कि अहलाद सिंह का पूरा निवासी भुक्तभोगी अयोध्या उर्फ जोधा ने 17 अगस्त को लखनऊ जाकर एंटी करप्शन ऑर्गेनाइजेशन में मामले की शिकायत की थी। इसके बाद इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार सान्याल को शिकायत के संदर्भ में प्री ट्रैप गोपनीय जांच सौंपी गई।
इंस्पेक्टर ने गोपनीय तरीके से तथ्य जुटाए तो शिकायत सही मिली। 21 अगस्त को उन्होंने अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें शिकायत सही मिलने का उल्लेख करते हुए ट्रैपिंग की संस्तुति कर दी। इसी के बाद से दरोगा एंटी करप्शन टीम के रडार पर आ गया था।
दरेागा बोला था- रुपये नहीं मिले तो बढ़ा दूंगा घरवालों के भी नाम
भुक्तभोगी ने जो शिकायत एंटी करप्शन के अफसराें से की, उसमें पूर्व में हुए लेनदेन के साथ ही दरोगा की धमकी का भी जिक्र था। शिकायत के मुताबिक, दरोगा ने उससे कहा था कि रुपये नहीं मिले तो वह मुकदमे में उसके घरवालों के भी नाम बढ़ा देगा। यही नहीं 12 अगस्त को शृंग्वेरपुर चौकी में ही बुलाकर 10 हजार रुपये भी वसूल लिए थे।
साजिशन दर्ज कराया फर्जी मुकदमा
भुक्तभोगी ने शिकायती पत्र में खुद पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने का भी आरोप लगाया है। बताया है कि इस साजिश में विपक्षियों के साथ ही कुछ स्थानीय लोग भी शामिल थे। इस मामले में एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल का कहना है कि दरोगा के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज किया गया है, उसमें इन आरोपों की भी जांच की जाएगी। आरोप सही मिलते हैं तो जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
पकड़े जाने के दौरान की धक्कामुक्की
सूत्रों ने बताया कि रिश्वत लेते पकड़े जाने के दौरान दरोगा ने एंटी करप्शन टीम के साथ धक्कामुक्की भी की। इसके बाद आवश्यक बल प्रयोग करते हुए उसे पकड़ा गया। यह बात भी सामने आई है कि इससे पहले नोट थामते ही उसने वादी को भी पीटा था। कुर्सी पर बैठे-बैठे ही उसे लात मारी थी।
रात में नहीं खाया खाना, रास्ते में रहा गुमसुम
सूत्रों का कहना है कि इससे पहले फाफामऊ थाने में आरोपी दरोगा की रात बेचैनी में गुजरी। उसे खाना दिया गया लेकिन उसने खाने से इंकार कर दिया। इसके अलावा बुधवार को कोर्ट ले जाते वक्त भी वह गुमसुम रहा। किसी से कोई बात नहीं की।
गठित की गई सात सदस्यीय टीम ने की कार्रवाई
एंटी करप्शन मुख्यालय की ओर से इस मामले में कार्रवाई के लिए सात सदस्यीय टीम गठित की गई थी। निरीक्षक सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित टीम में कुल चार इंस्पेक्टर व तीन हेड कांस्टेबल शामिल थे। प्री ट्रैप गोपनीय जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यह टीम गठित की गई थी।
पिता भी पहुंचे थाने, नजरें नहीं मिला पाया
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गिरफ्तारी की सूचना पर आरोपी दरोगा के पिता अशोक राय भी थाने पहुंचे। वहां आरोपी दरोगा पिता से नजरें नहीं मिला पाया।