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Prayagraj News: मासूम को 24 घंटे थाने में रहकर अपनों का करना पड़ा इंतजार
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पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। सोनभद्र के रेणुकूट से गुमशुदा होकर प्रयागराज में मिली एक छह साल की बच्ची को 24 घंटे सिविल लाइंस थाने में रहकर अपने माता-पिता का इंतजार करना पड़ा। मामले का खुलासा तब हुआ, जब अगले दिन बच्ची की गुमशुदगी के बारे में मैसेज सर्कुलेट किया गया। इसके बाद पुलिस ने माना कि बच्ची उनको मिल गई है। उसे जल्द चाइल्डलाइन को सौंप दिया जाएगा।
बच्ची रेणुकूट में माता-पिता, एक भाई व बहन के साथ रहती है। पिता पेशे से ट्रांसपोर्टर हैं। पिता ने चाइल्ड लाइन को बताया कि शुक्रवार को परिवार घर के बाहर सो रहा था। सुबह पांच बजे आंख खुली तो उनकी छह साल की बेटी गायब थी। काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल सका। पिछले तीन दिनों से बेटी के लिए परेशान थेे।
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वहीं, चाइल्ड लाइन के मुताबिक उनको रविवार को बच्ची के गायब होने की सूचना मिली थी। शहर के सभी थानों में सूचना दी गई तो पता चला कि बच्ची सिविल लाइंस थाने में है। दोपहर एक बजे चाइल्ड लाइन ने टीम भेजकर बच्ची को कब्जे में लिया। काउंसलिंग में पता चला कि बच्ची शनिवार सुबह किसी अंजान व्यक्ति के साथ बस में बैठकर प्रयागराज पहुंच गई थी। इस दाैरान किसी ने जब बच्ची को सिविल लाइंस पर अकेला देखा तो वह थाने छोड़ गया।
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समय से नहीं दी सूचना
शहर के हरेक थाने में इस तरह के केस से निपटने के लिए सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त किया जाता है। साथ में एक महिला आरक्षी भी होती है। इसके पास गुमशुदगी समेत अन्य आपराधिक केस की पीड़िता की देखरेख की जिम्मेदारी होती है। इनका काम चाइल्ड लाइन को इसकी सूचना देकर पीड़िता काे सुपुर्द करना होता है। चाइल्डलाइन के अधिकारियों का कहना है कि बच्ची पुलिस के पास थी, लेकिन उन्हें समय से सूचना नहीं दी गई। इसकी वजह से बच्ची को 24 घंटे थाने में गुजारना पड़ा।
एक बार थाने में आई फिर चली गई...
सिविल लाइंस थाने में तैनात बाल कल्याण अधिकारी अभय सिंह ने कहा कि बच्ची रेणुकूट से लापता होकर प्रयागराज पहुंची थी। इसकी देखरेख की जा रही थी, लेकिन वह बीच में फिर कहीं चली गई, थोड़ी देर बाद वापस आई। बच्ची कितनी देर थाने में रुकी इसकी उनके पास कोई जानकारी नहीं है। महिला आरक्षी ने फोन पर बच्ची के मिलने के बारे में सूचना दी थी। 24 घंटे बच्ची को थाने में रखने के सवाल पर गोल-मटोल जवाब देते रहे। वहीं, नगर पुलिस उपायुक्त दीपक भूकर का कहना है कि मेरे संज्ञान में इस तरह का कोई मामला नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता है कि बच्ची को इतनी देर तक थाने में रखा जा सक जांच की जाएगी।