महंगाई की मार: दाल और चीनी के दाम चढ़े, जेब काट रही तेल की धार
व्यापारियों का कहना है कि बीते महीने की तुलना में रिफाइंड आयल की कीमतें पांच से दस रुपये प्रतिलीटर तक बढ़ी हैं, जबकि सरसों तेल के दाम में 20 रुपये प्रति किलो तक की तेजी आई है। किराना व्यापारी दीपक केसरवानी बताते हैं कि सरकार ने दालों की एमएसपी में बीते महीने बढ़ोतरी की थी।
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खाद्य तेलों और दालों के बढ़े भाव ने आम आदमी की रसोई का बजट फिर बिगाड़ दिया है। पिछले एक महीने में ही खाद्य तेलों के दाम में 20 फीसदी तो दालों की कीमत में पांच से दस फीसदी की वृद्धि हुई है। सिर्फ खाद्य तेल, दाल ही नहीं, चीनी, आटा आदि के दाम भी बीते कुछ दिनों के दौरान तेजी से बढ़े हैं। फुटकर बाजार में दाल की कीमतों के साथ ही खाद्य तेलों के दाम भी पांच से 20 रुपये तक बढ़े हैं।
व्यापारियों का कहना है कि बीते महीने की तुलना में रिफाइंड आयल की कीमतें पांच से दस रुपये प्रतिलीटर तक बढ़ी हैं, जबकि सरसों तेल के दाम में 20 रुपये प्रति किलो तक की तेजी आई है। किराना व्यापारी दीपक केसरवानी बताते हैं कि सरकार ने दालों की एमएसपी में बीते महीने बढ़ोतरी की थी। अभी तक दालों के भाव एमएसपी से नीचे चल रहे थे। बीते महीने में दालों में हुई बढ़ोतरी एमएसपी के अनुपात में हुई है, जो सामान्य बढ़ोतरी है।
खाद्य तेलों के दामों में हुई वृद्धि पर खाद्य तेलों के थोक व्यापारी और इलाहाबाद गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में बीते महीने हुई बढ़ोतरी की वजह से थोक भाव में 15 से 20 प्रति रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसपोर्टरों द्वारा मालभाड़ा बढ़ाना भी कीमतें बढ़ने की प्रमुख वजह है। फुटकर कारोबारी प्रमिल केसरवानी ने बताया कि बृहस्पतिवार को थोक बाजार में सरसों का तेल 168 रुपये प्रति किलो, लेकिन फुटकर में भाव 180 रुपये या उससे अधिक पर बिका। इसी तरह रिफाइंड के दाम थोक में 156 एवं फुटकर में 165 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं।
दाल और चीनी के भी बढ़ रहे भाव
अगर दालों की बात करें तो प्रयागराज अरहर दाल 100 से 110 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई तो वहीं मूंग दाल भी 5 रुपये चढ़कर 85 से 90 पर बिक रही है। राजमा 125 से उछलकर 145 पर एवं चना दाल 75 से 80 प्रति किलो पर पहुंच चुकी है। इसी तरह चीनी के दाम बीते दो माह के दौरान छह रुपये किलो चढ़े हैं। फुटकर बाजार में चीनी 44 रुपये किलो बिक रही है। हालांकि जिनके यहां पुराना स्टॉक है वे 42 रुपये में ही चीनी बेच रहे हैं। इसी तरह लोकल ब्रांड का पांच किलो का आटा जो 15 अगस्त के पूर्व 125 रुपये में पांच किलो मिल रहा था, अब 135 रुपये हो गया है।
बारिश में हरी सब्जियों के दाम हर वर्ष बढ़ते हैं। इस बार भी सब्जी पिछले वर्ष की तुलना में महंगी है। बाजार में कोई भी सब्जी 40 रुपये प्रति किलो से कम नहीं है। पिछले माह की शुरूआत में 60 रुपये किलो तक पहुंचे टमाटर के दाम में फिलहाल दस से 15 रुपये की गिरावट जरूर देखने को मिली है। उधर, आलू और प्याज के दाम अभी बाजार में स्थिर है।
तालिबान की वजह से बढ़ गया मेवों का दाम
अफगानिस्तान में तालिबान राज से बिगड़े हालात के कारण ड्राईफ्रूट की कीमतों में उछाल आ गया है। अफगानिस्तान से ही बादाम अंजीर, अखरोट, पिस्ता, केशर आदि का काफी आयात होता है। थोक कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रयागराज में प्रतिदिन एक से डेढ़ करोड़ रुपये का ड्राईफ्रूट बिकता है। बादाम की ही बात करें तो 600-700 की जगह इसके दाम 800-900 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। अखरोट 800 से बढ़कर 900, पिस्ता 1000 से बढ़कर 1400-1500 रुपये प्रति किलो तक है।