{"_id":"5ef8e80b8ebc3e42d162c7cf","slug":"indo-china-conflict-city-desk-news-ald2796308198","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत-चीन को संघर्ष से बचना होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत-चीन को संघर्ष से बचना होगा
विज्ञापन
Mixed China and India flag, three dimensional render, illustration
- फोटो : Getty Images/iStockphoto
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रयागराज। भारत और चीन एशिया एवं विश्व की उभरती हुई शक्तियां हैं। उन्हें किसी भी संघर्ष से बचना होगा। संघर्ष से दोनों देशों का नुकसान होगा, बल्कि चीन का ज्यादा नुकसान होगा। यह बात चीन मामले के विशेषज्ञ एवं जेएनयू के प्रो. स्वर्ण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार के समापन पर कही।
‘वास्तविक नियंत्रण रेखा व चीन के साथ हिंसात्मक सामना, समाधान एवं संभावना’ विषय पर आयोजित वेबिनार में प्रो. सवर्ण सिंह ने कहा कि आपसी बातचीत गतिरोध दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पूरा विश्व भारत से जुड़ना चाहता है, क्योंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। पश्चिमी राष्ट्र चीन पर अंकुश लगाने के लिए भारत से जुड़ना चाहते हैं। भारत को इस समय सुलझना है, उलझना नहीं है और युद्ध की संभावना न के बराबर है।
ब्रिगेडियर राजीव कुमार भूटानी ने कहा कि भारत-चीन का आमना-सामना पहले भी होता रहा है। विश्व शक्ति बनने के लिए चीन खुद को सैन्य रूप से प्रभावशाली दिखा रहा है और साइबर जासूसी में भी चीन भारी निवेश कर रहा है। चीन वर्तमान समय में पूरे विश्व का ध्यान बदलना चाह रहा है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि राजनैतिक दलों को आपसी मतभेद बुलाकर इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि भारत को विश्व मंच पर सामने आकर चीन बेनकाब करना चाहिए। कार्यक्रम में वक्ताओं का स्वागत इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आके उपाध्याय ने किया। रक्षा अध्ययन विभाग की अध्यक्ष प्रो. भारती दास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
‘वास्तविक नियंत्रण रेखा व चीन के साथ हिंसात्मक सामना, समाधान एवं संभावना’ विषय पर आयोजित वेबिनार में प्रो. सवर्ण सिंह ने कहा कि आपसी बातचीत गतिरोध दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पूरा विश्व भारत से जुड़ना चाहता है, क्योंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। पश्चिमी राष्ट्र चीन पर अंकुश लगाने के लिए भारत से जुड़ना चाहते हैं। भारत को इस समय सुलझना है, उलझना नहीं है और युद्ध की संभावना न के बराबर है।
विज्ञापन
ब्रिगेडियर राजीव कुमार भूटानी ने कहा कि भारत-चीन का आमना-सामना पहले भी होता रहा है। विश्व शक्ति बनने के लिए चीन खुद को सैन्य रूप से प्रभावशाली दिखा रहा है और साइबर जासूसी में भी चीन भारी निवेश कर रहा है। चीन वर्तमान समय में पूरे विश्व का ध्यान बदलना चाह रहा है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि राजनैतिक दलों को आपसी मतभेद बुलाकर इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि भारत को विश्व मंच पर सामने आकर चीन बेनकाब करना चाहिए। कार्यक्रम में वक्ताओं का स्वागत इविवि के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आके उपाध्याय ने किया। रक्षा अध्ययन विभाग की अध्यक्ष प्रो. भारती दास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
विज्ञापन