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स्वदेशी बीएचयू हिप डिवाइस की विदेशों में धूम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Feb 2018 01:19 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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स्वदेशी बीएचयू हिप डिवाइस की देश ही नहीं विदेशों में धूम मची है। कृत्रिम कूल्हा लगवाने का खर्च चार लाख नहीं सिर्फ 50 हजार आता है। वह भी दोनों कूल्हा सही हो जाएगा। एक तरफ डिवाइस लगी तो खर्च आधा हो जाएगा। ऑपरेशन इतना सरल कि इसे सामान्य ओटी तो क्या गांव की पीएचसी में भी लगाया जा सकता है। शोध के बाद इसे बनाने वाले बीएचयू के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार राय ने इसका पेटेंट भी करा लिया है।
यूपी ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के 42वें सम्मेलन ऑर्थोकॉन में कृत्रिम कूल्हे के उपयोगिता बताने आए डॉ. अनिल कुमार राय ने बताया कि कूल्हे की हड्डी टूटने पर ऑपरेशन जरूरी होता है। कृत्रिम कूल्हा लगाने का खर्च फिलहाल 3.5 लाख से चार लाख तक आ रहा है। लोगों की परेशानी कम करने के लिए उन्होंने इस पर शोध कर कम खर्च वाला कृत्रिम कूल्हा बनाया। उन्होंने बताया वह अपना नहीं डिवाइस को संस्थान का नाम देना चाहते थे, इसलिए कुलपति से वार्ता कर नाम दिया ‘बीएचयू हिप डिवाइस’। उन्होंने इसे पेटेंट करा लिया है। डॉ. अनिल ने बताया अब बीएचयू डिवाइस फिलीपिंस समेत कई देशों में मंगाकर लगाई जा रही है।
डॉ. अनिल के मुताबिक विदेशी दवा कंपनियों ने इस पेटेंट डिवाइस को खरीदने का प्रयास किया लेकिन उन्होेंने मना कर दिया। अब देश के मरीजों को कूल्हा संबंधी दिक्कत होने पर सरल ऑपरेशन के जरिए एक तरफ कृत्रिम बीएचयू हिप डिवाइस लगवाने के लिए सिर्फ 25 हजार और दोनों तरफ फैक्टर होने पर 50 हजार तक का खर्च आता है। जबकि देश में ही इस तरह की सर्जरी पर चार लाख रुपये तक खर्च आ रहा है। उन्होंने बताया कि 17 वर्षों पर इस डिवाइस को सफलतापूर्वक लगा रहे हैं। वर्ष 2008 में इसका पेटेंट कराया। उनके मुताबिक वह अब तक 1000 लोगों को यह कृत्रिम कूल्हा डिवाइस लगा चुके हैं। इनमें कई ऐसे मरीज हैं, जो बिस्तर पर थे और उनकी नौकरी खतरे में थी लेकिन वह अब स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। रविवार को वह ऑर्थोकॉन में अपनी डिवाइस के बारे में जानकारी देकर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
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बीएचयू डिवाइस की परिकल्पना को साकार करने वाले डॉ. अनिल डिवाइस को मेक इन इंडिया का परिणाम बताना चाह रहे हैं। उन्होंने इस बारे में शुक्रवार को राज्यपाल राम नाईक को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने इसे सराहा। उन्होंने अपनी डिवाइस को लोगों के लिए सस्ती और सुलभ बताकर इस बारे में जानकारी पीएम नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना चाहते हैं। ताकि दुनिया में बीएचयू का नाम हो सके। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को प्रपत्रों और सीडी के साथ पीएम को संबोधित एक पत्र भी दिया है।
ऑर्थोकॉन के वैज्ञानिक सत्र में देश विदेश से आए हड्डी रोग विशेषज्ञों ने अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। चिकित्सकों ने बताया कि फ्लैट फुट दिव्यांगता नहीं है। इसे ठीक करने की विधि आसान और सुलभ है। फ्लैट फुट को दिव्यांगता बताने से बहुत से युवा अवसाद का शिकार होते थे लेकिन उन्हें डॉक्टर नई रोशनी के रूप में मामूली उपचार देकर ठीक कर सकते हैं। कई पीड़ित अब ठीक होकर नौकरी कर रहे हैं। इसे शोध पत्र के माध्यम से साबित भी किया गया। हादसों में टेढ़े मेढे़ फैक्चर को जोड़ना भी इतना मुश्किल नहीं हैं।
रिविजन सर्जरी के आधुनिक उपायों की जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि घाव पकने न पाए और संक्रमण न बढ़े, इसके लिए नई तकनीक है, लोगों का इससे सफलतापूर्वक जटिल ऑपरेशन कर हड्डियां जोड़ी जा रही हैं। बच्चों की हड्डियों में होने वाले विकारों पर शोध करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि बच्चों की हड्डियों का उपचार करना भी जटिल कार्य विशेषज्ञता से आसान हो गया है। संयोजन सचिव डॉ. अनुज गुप्ता, अध्यक्ष डा. मनोज गुप्ता, डॉ. केडी त्रिपाठी, डॉ. त्रिभुवन सिंह, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ, अमित रस्तोगी आदि ने अतिथि चिकित्सकों का स्वागत किया। डॉ. सचिन जैन के साथ पुरा छात्र एसोसिएशन के डॉ. शरद जैन आदि ने व्यवस्था में सहयोग किया।
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यूपी ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के 42वें सम्मेलन ऑर्थोकॉन में कृत्रिम कूल्हे के उपयोगिता बताने आए डॉ. अनिल कुमार राय ने बताया कि कूल्हे की हड्डी टूटने पर ऑपरेशन जरूरी होता है। कृत्रिम कूल्हा लगाने का खर्च फिलहाल 3.5 लाख से चार लाख तक आ रहा है। लोगों की परेशानी कम करने के लिए उन्होंने इस पर शोध कर कम खर्च वाला कृत्रिम कूल्हा बनाया। उन्होंने बताया वह अपना नहीं डिवाइस को संस्थान का नाम देना चाहते थे, इसलिए कुलपति से वार्ता कर नाम दिया ‘बीएचयू हिप डिवाइस’। उन्होंने इसे पेटेंट करा लिया है। डॉ. अनिल ने बताया अब बीएचयू डिवाइस फिलीपिंस समेत कई देशों में मंगाकर लगाई जा रही है।
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डॉ. अनिल के मुताबिक विदेशी दवा कंपनियों ने इस पेटेंट डिवाइस को खरीदने का प्रयास किया लेकिन उन्होेंने मना कर दिया। अब देश के मरीजों को कूल्हा संबंधी दिक्कत होने पर सरल ऑपरेशन के जरिए एक तरफ कृत्रिम बीएचयू हिप डिवाइस लगवाने के लिए सिर्फ 25 हजार और दोनों तरफ फैक्टर होने पर 50 हजार तक का खर्च आता है। जबकि देश में ही इस तरह की सर्जरी पर चार लाख रुपये तक खर्च आ रहा है। उन्होंने बताया कि 17 वर्षों पर इस डिवाइस को सफलतापूर्वक लगा रहे हैं। वर्ष 2008 में इसका पेटेंट कराया। उनके मुताबिक वह अब तक 1000 लोगों को यह कृत्रिम कूल्हा डिवाइस लगा चुके हैं। इनमें कई ऐसे मरीज हैं, जो बिस्तर पर थे और उनकी नौकरी खतरे में थी लेकिन वह अब स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। रविवार को वह ऑर्थोकॉन में अपनी डिवाइस के बारे में जानकारी देकर शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
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बीएचयू डिवाइस की परिकल्पना को साकार करने वाले डॉ. अनिल डिवाइस को मेक इन इंडिया का परिणाम बताना चाह रहे हैं। उन्होंने इस बारे में शुक्रवार को राज्यपाल राम नाईक को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने इसे सराहा। उन्होंने अपनी डिवाइस को लोगों के लिए सस्ती और सुलभ बताकर इस बारे में जानकारी पीएम नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना चाहते हैं। ताकि दुनिया में बीएचयू का नाम हो सके। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को प्रपत्रों और सीडी के साथ पीएम को संबोधित एक पत्र भी दिया है।
ऑर्थोकॉन के वैज्ञानिक सत्र में देश विदेश से आए हड्डी रोग विशेषज्ञों ने अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। चिकित्सकों ने बताया कि फ्लैट फुट दिव्यांगता नहीं है। इसे ठीक करने की विधि आसान और सुलभ है। फ्लैट फुट को दिव्यांगता बताने से बहुत से युवा अवसाद का शिकार होते थे लेकिन उन्हें डॉक्टर नई रोशनी के रूप में मामूली उपचार देकर ठीक कर सकते हैं। कई पीड़ित अब ठीक होकर नौकरी कर रहे हैं। इसे शोध पत्र के माध्यम से साबित भी किया गया। हादसों में टेढ़े मेढे़ फैक्चर को जोड़ना भी इतना मुश्किल नहीं हैं।
रिविजन सर्जरी के आधुनिक उपायों की जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि घाव पकने न पाए और संक्रमण न बढ़े, इसके लिए नई तकनीक है, लोगों का इससे सफलतापूर्वक जटिल ऑपरेशन कर हड्डियां जोड़ी जा रही हैं। बच्चों की हड्डियों में होने वाले विकारों पर शोध करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि बच्चों की हड्डियों का उपचार करना भी जटिल कार्य विशेषज्ञता से आसान हो गया है। संयोजन सचिव डॉ. अनुज गुप्ता, अध्यक्ष डा. मनोज गुप्ता, डॉ. केडी त्रिपाठी, डॉ. त्रिभुवन सिंह, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ, अमित रस्तोगी आदि ने अतिथि चिकित्सकों का स्वागत किया। डॉ. सचिन जैन के साथ पुरा छात्र एसोसिएशन के डॉ. शरद जैन आदि ने व्यवस्था में सहयोग किया।