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भारतीय हॉकी कोच पीयूष दुबे के स्वागत में उमड़ा शहर, सफलता के दिए मंत्र

Fri, 20 Aug 2021 10:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Aug 2021 10:50 PM IST
सार

  • भारतीय हॉकी टीम के कोच को देखने जगह-जगह जुटी खेल प्रेमियों, युवाओं की भीड़
  • इविवि में हुआ सम्मान समारोह, एजी कर्मियों ने भी किया पीयूष का सम्मान

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Indian hockey coach Piyush Dubey welcomed the city, gave success mantras
Prayagraj News : पीयूष दुबे, भारतीय हॉकी टीम के कोच। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी पुरुष टीम के कोच पीयूष कुमार दुबे शुक्रवार सुबह शहर पहुंचे तो जगह-जगह स्वागत हुआ। पीयूष के सम्मान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग में कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। पीयूष ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफल होना है तो खुद करके सीखो और दूसरों से भी सीखो।

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पीयूष सुबह सवा दस बजे के आसपास सड़कमार्ग से लखनऊ से मलाक हरहर पहुंचे तो वहां उनका जबर्दस्त स्वागत हुआ। इसके बाद उन्हें खुली जीप पर बैठा दिया गया। आगे चलकर फाफामऊ के शांतिपुरम, तेलियरगंज, मेयोहाल, हनुमान मंदिर चौराहे पर भी उनका स्वागत किया गया। पीयूष ने हनुमान मंदिर में दर्शन किए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद वह चंद्राशेखर आजाद पार्क और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय पहुंचे।

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Indian hockey coach Piyush Dubey welcomed the city, gave success mantras
Prayagraj News : पीयूष दुबे, भारतीय हॉकी टीम के कोच। - फोटो : प्रयागराज

विश्वविद्यालय में शहीद लाल पद्मधर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। शाम को झूंसी में उनके स्वागत समारोह का सिलसिला थमा। एजी ऑफिस के कर्मचारियों ने भी पीयूष को सम्मानित किया। इविवि में हुए स्वागत समारोह में पीयूष के कोच रहे प्रेम शंकर शुक्ला, शारीरिक शिक्षा की विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना चहल, रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला, योग प्रशिक्षक भास्कर शुक्ला, खेल शिक्षक रवींद्र मिश्र, हसबिन अहमद, डॉ. वीरेंद्र सिंह समेत तमाम छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। वहीं अन्य कार्यक्रमों में अमित सिंह, अखिलेश श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।   

हनुमान भक्त हैं पीयूष, खिलाडिय़ों को लगाया था तिलक
भारतीय हॉकी टीम के कोच पीयूष कुमार दुबे हनुमान भक्त हैं। वह हर वक्त अपने साथ महावीर मंजूषा रखते हैं। पीयूष ने बताया कि जब तीसरे स्थान के लिए भारतीय टीम मैदान पर उतरने जा रही थी, तो उन्होंने सभी खिलाड़ियों के माथे पर महावीर मंजूषा का तिलक लगाया था।

अपने कोच को दिया सफलता का श्रेय
पीयूष ने इविवि में आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन की शुरुआत गुरु पर आधारित श्लोक से की और अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच प्रेम शंकर शुक्ला को दिया। 

Indian hockey coach Piyush Dubey welcomed the city, gave success mantras
Prayagraj News : पीयूष दुबे, भारतीय हॉकी टीम के कोच। - फोटो : प्रयागराज
इविवि के दीक्षांत समारोह में आएंगे पीयूष
इविवि में आयोजित सम्मान समारोह में रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने पीयूष कुमार दुबे को 23 सितंबर को प्रस्तावित दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। पीयूष ने उनका आमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि वह इविवि के पुराछात्र हैं। पीयूष यहां अर्थशास्त्र विभाग के छात्र थे। पीयूष को बताया गया कि इविवि में स्मार्ट सिटी के तहत हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाने का निर्णय लिया गया है। इस पर पीयूष ने खुशी जताई और कहा कि एस्ट्रोटर्फ मैदान बनने के बाद वह फिर से विश्वविद्यालय आएंगे।

रेसलर से हॉकी कोच बनने तक की यात्रा की साझा
पीयूष ने बताया कि उनके पिता एक अच्छे रेसलर थे और पीयूष को भी रेसलर बनाना चाहते थे। वह झूंसी में रोज अपने पिता के साथ अभ्यास के लिए जाया करते थे। पास में ही एक छोटा सा मैदान था, जहां प्रेम शंकर शुक्ला हॉकी सिखाया करते थे। एक दिन उन्होंने पीयूष को बुलाया और पूछा कि हॉकी खेलना है? यही उनके लिए टर्निंग प्वाइंट था।

केवी मनौरी में मिली थी पहली नौकरी
पीयूष ने बताया कि उन्हें केंद्रीय विद्यालय मनौरी में खेल शिक्षक के रूप में पहली नौकरी मिली थी, लेकिन ईश्वर ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। 

बहुत कठिन थी ओलंपिक पहुंचने की यात्रा
 पीयूष का कहना है कि कोविड के दौर में हुआ टोक्यो ओलंपिक हमेशा याद रहेगा। हमारी टीम 15 महीनों तक सेंटर में रही और अभ्यास किया। रोज कोविड टेस्ट हुआ करता था। डर बना रहता था कि कोई खिलाड़ी पॉजिटिव न निकल आए। अगर ऐसा होता तो टीम कमजोर पड़ सकती थी, लेकिन सभी डटे रहे और ओलंपिक तक की यात्रा पूरी की।

खिलाडिय़ों के हाथ में होनी चाहिए खेल की कमान
पीयूष कुमार दुबे ने विश्वविद्यालय के संदर्भ में कहा कि खेल की कमान खिलाड़ियों के हाथ में ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी ही अपने अनुभव से अच्छे खिलाड़ी बना सकता है।
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