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स्वतंत्रता दिवस पर तो आजाद को कर दो ‘आजाद’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 08 Aug 2015 01:32 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगाने के लिए शहर में अब तक कोई जगह नहीं मिली है। करीब आठ फीट की प्रतिमा 10 वर्ष से नगर निगम मुख्यालय के स्टोर में एक किनारे पड़ी है। 23 जुलाई को चंद्रशेखर आजाद की जयंती के पहले प्रतिमा स्थापित करने की मांग उठी, लेकिन फिर उनकी अगली जयंती तक के लिए प्रतिमा स्थापित करने की मांग भुला दी गई। हालांकि आजाद प्रतिमा नगर निगम के तुलसी पार्क में लगाने की योजना है। निगम इसे लेकर गंभीर है तो स्वतंत्रता दिवस के पहले प्रतिमा शहर में कहीं स्थापित कर देनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा करीब 10 वर्ष पहले तत्कालीन डीएम अमृत अभिजात ने मंगाई थी। यह प्रतिमा सर्किट हाउस में स्थापित की जानी थी, लेकिन उस वक्त किन्हीं कारणों से प्रतिमा नहीं लग सकी सो उसे नगर निगम के इंडियन प्रेस चौराहा स्थित स्टोर में रखवा दिया गया। प्रतिमा की दुर्दशा का मामला भी निगम सदन में करीब सात माह पहले भाजपा पार्षद किरन जायसवाल ने उठाया था। तब आजाद की प्रतिमा इंडियन प्रेस चौराहा स्थित नगर निगम के स्टोर में कबाड़ के साथ पड़ी थी। पार्षद ने प्रतिमा की फोटो खींचकर सदन में प्रस्तुत की, जिसमें उसकी दुर्दशा साफ दिख रही थी। मामले ने तूल पकड़ा तो तत्काल नगर आयुक्त आरपी सिंह ने आजाद की प्रतिमा वहां से निगम मुख्यालय में मंगा ली। हालांकि प्रतिमा फिर भी स्थापित नहीं हुई।
चंद्रशेखर आजाद की जयंती के दो दिन पहले किरन जायसवाल सहित भाजपा के कई पार्षदों ने प्रतिमा स्थापित करने की मांग की तो कहा गया कि उसे नगर निगम परिसर के तुलसी पार्क में लगाया जाएगा, लेकिन जयंती के बाद 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रतिमा लगाने पर कोई निर्णय नहीं हो सका। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी का कहना है कि प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में नगर आयुक्त से वार्ता हुई तो उन्होंने चौराहों, सरकारी परिसरों में प्रतिमा स्थापित न करने के हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दे दिया। उस आदेश के तहत प्रतिमा निगम परिसर में भी नहीं लग सकती। क्योंकि प्रतिमा तत्कालीन डीएम ने मंगाई थी तो अब उसे स्थापित करने के लिए भी जिला प्रशासन ही निर्णय ले।
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चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा करीब 10 वर्ष पहले तत्कालीन डीएम अमृत अभिजात ने मंगाई थी। यह प्रतिमा सर्किट हाउस में स्थापित की जानी थी, लेकिन उस वक्त किन्हीं कारणों से प्रतिमा नहीं लग सकी सो उसे नगर निगम के इंडियन प्रेस चौराहा स्थित स्टोर में रखवा दिया गया। प्रतिमा की दुर्दशा का मामला भी निगम सदन में करीब सात माह पहले भाजपा पार्षद किरन जायसवाल ने उठाया था। तब आजाद की प्रतिमा इंडियन प्रेस चौराहा स्थित नगर निगम के स्टोर में कबाड़ के साथ पड़ी थी। पार्षद ने प्रतिमा की फोटो खींचकर सदन में प्रस्तुत की, जिसमें उसकी दुर्दशा साफ दिख रही थी। मामले ने तूल पकड़ा तो तत्काल नगर आयुक्त आरपी सिंह ने आजाद की प्रतिमा वहां से निगम मुख्यालय में मंगा ली। हालांकि प्रतिमा फिर भी स्थापित नहीं हुई।
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चंद्रशेखर आजाद की जयंती के दो दिन पहले किरन जायसवाल सहित भाजपा के कई पार्षदों ने प्रतिमा स्थापित करने की मांग की तो कहा गया कि उसे नगर निगम परिसर के तुलसी पार्क में लगाया जाएगा, लेकिन जयंती के बाद 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रतिमा लगाने पर कोई निर्णय नहीं हो सका। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी का कहना है कि प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में नगर आयुक्त से वार्ता हुई तो उन्होंने चौराहों, सरकारी परिसरों में प्रतिमा स्थापित न करने के हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दे दिया। उस आदेश के तहत प्रतिमा निगम परिसर में भी नहीं लग सकती। क्योंकि प्रतिमा तत्कालीन डीएम ने मंगाई थी तो अब उसे स्थापित करने के लिए भी जिला प्रशासन ही निर्णय ले।
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