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अफसरों से लेकर ठेकेदार तक खेल में रहते हैं शामिल
Mon, 11 Feb 2019 01:04 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 11 Feb 2019 01:04 AM IST
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सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के तहत काम करने वाले के कर्मचारियों के नाम पर ठेकेदार से लेकर अफसर तक जेब भर रहे हैं। उनके मानदेय, भविष्य निधि तक में खेल किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और बिजली विभाग में आउटसोर्सिंग के तहत सैकड़ों कर्मचारी रखे गए हैं। जिनके नाम पर भविष्य निधि से लेकर वर्दी तक में लाखों का खेल 2009 से 2015 तक किया गया है। भविष्य निधि की रकम के साथ ही हर साल मिलने वाली वर्दी का पैसा भी हजम करने में कंपनी व अफसरों का गठजोड़ जगजाहिर है। इन सबके बावजूद अभी तक शासन की ओर से ऐसी संस्थाओं के खिलाफ शिकंजा नहीं कसा जा सका।
जिसके चलते अफसर से लेकर ठेकेदार तक कर्मचारियों को शोषण करते हुए लूट खसोट मचाए हुए हैं। शासन की ओर कुशल कर्मचारियों को 9 हजार 457 रुपये और अकुशल कर्मचारियों को 7 हजार 675 रुपये 26 दिन के मिलते हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए 12 प्रतिशत की भविष्य निधि की धनराशि सरकार देती है और 12 प्रतिशत विभाग के जरिए ठेकेदारों को उनके मेहनताने से काटकर जमा करना होता है। लेकिन ठेकेदार मानदेय से लेकर भविष्य निधि तक में खेल कर रहे हैं।
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नगर पालिका में आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई कर्मचारी, चालक, चौकीदार समेत करीब 100 कर्मचारी रखे गए हैं। भविष्य निधि की इन कर्मचारियों को जानकारी ही नहीं है। उनको मिलने वालश्ी मजदूरी से ही जीएसटी के नाम पर कटौती होती रही। जिसे लेकर कुछ माह पहले सफाई कर्मचारियों ने आंदोलन कर दिया था। अभी भी कर्मचारियों को भविष्य निधि के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। क्षेत्रीय आयुक्त कर्मचारी भविष्य निधि संगठन दो माह पहले नगरपालिका के अफसरों को तलब कर निर्देश भी जारी कर चुका है।
स्वास्थ्य विभाग में भी आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारी काम करते हैं। इसके लिए दक्ष कर्मचारियों को अलग से पारिश्रमिक मिलता है। कंपनी से अनुबंध के बाद काम पर कर्मचारी रखे जाते हैं। भले ही शासन से कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक तय है। इसके बावजूद कर्मचारियों को उससे कम मेहनताना मिलता है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी में रखे गए कर्मचारियों को यह नहीं मालूम की शासन ने उनके लिए कितना मानदेय तय कर रखा है। या उनको कौन कौन सी सुविधा मिलनी चाहिए। हर विभागों की तरह इन कर्मचारियों को वर्दी नहीं दी जाती। कर्मचारियों को कभी भी हटा दिया जाता है। जिससे उनकी भविष्य निधि की रकम मे अफसर व ठेकेदार खेल कर जाते हैं।
बिजली विभाग में सबसे अधिक आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखे गए हैं। वह विद्युत उपकेंद्रों पर एसएसओ और लाइनमैन का काम कर रहे हैं। वह अपनी मांगों को लेकर हमेशा संघर्ष करते रहते हैं। इन कर्मचारियों को अभी तक यह नहीं पता था कि सरकार उनके लिए भविष्य निधि में रुपये देती है। 2016 के बाद कर्मचारियों को इस बात की जानकारी हो सकी। अभी भी भविष्य निधि की धनराशि के बारे में बहुत से कर्मचारियों को जानकारी ही नहीं है। यहां तक की वर्दी और उपकरण के नाम पर भी मिलने वाली धनराशि का बंदरबांट हो जाता है।
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स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और बिजली विभाग में आउटसोर्सिंग के तहत सैकड़ों कर्मचारी रखे गए हैं। जिनके नाम पर भविष्य निधि से लेकर वर्दी तक में लाखों का खेल 2009 से 2015 तक किया गया है। भविष्य निधि की रकम के साथ ही हर साल मिलने वाली वर्दी का पैसा भी हजम करने में कंपनी व अफसरों का गठजोड़ जगजाहिर है। इन सबके बावजूद अभी तक शासन की ओर से ऐसी संस्थाओं के खिलाफ शिकंजा नहीं कसा जा सका।
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जिसके चलते अफसर से लेकर ठेकेदार तक कर्मचारियों को शोषण करते हुए लूट खसोट मचाए हुए हैं। शासन की ओर कुशल कर्मचारियों को 9 हजार 457 रुपये और अकुशल कर्मचारियों को 7 हजार 675 रुपये 26 दिन के मिलते हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए 12 प्रतिशत की भविष्य निधि की धनराशि सरकार देती है और 12 प्रतिशत विभाग के जरिए ठेकेदारों को उनके मेहनताने से काटकर जमा करना होता है। लेकिन ठेकेदार मानदेय से लेकर भविष्य निधि तक में खेल कर रहे हैं।
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नगर पालिका में आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई कर्मचारी, चालक, चौकीदार समेत करीब 100 कर्मचारी रखे गए हैं। भविष्य निधि की इन कर्मचारियों को जानकारी ही नहीं है। उनको मिलने वालश्ी मजदूरी से ही जीएसटी के नाम पर कटौती होती रही। जिसे लेकर कुछ माह पहले सफाई कर्मचारियों ने आंदोलन कर दिया था। अभी भी कर्मचारियों को भविष्य निधि के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। क्षेत्रीय आयुक्त कर्मचारी भविष्य निधि संगठन दो माह पहले नगरपालिका के अफसरों को तलब कर निर्देश भी जारी कर चुका है।
स्वास्थ्य विभाग में भी आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारी काम करते हैं। इसके लिए दक्ष कर्मचारियों को अलग से पारिश्रमिक मिलता है। कंपनी से अनुबंध के बाद काम पर कर्मचारी रखे जाते हैं। भले ही शासन से कर्मचारियों के लिए पारिश्रमिक तय है। इसके बावजूद कर्मचारियों को उससे कम मेहनताना मिलता है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी में रखे गए कर्मचारियों को यह नहीं मालूम की शासन ने उनके लिए कितना मानदेय तय कर रखा है। या उनको कौन कौन सी सुविधा मिलनी चाहिए। हर विभागों की तरह इन कर्मचारियों को वर्दी नहीं दी जाती। कर्मचारियों को कभी भी हटा दिया जाता है। जिससे उनकी भविष्य निधि की रकम मे अफसर व ठेकेदार खेल कर जाते हैं।
बिजली विभाग में सबसे अधिक आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखे गए हैं। वह विद्युत उपकेंद्रों पर एसएसओ और लाइनमैन का काम कर रहे हैं। वह अपनी मांगों को लेकर हमेशा संघर्ष करते रहते हैं। इन कर्मचारियों को अभी तक यह नहीं पता था कि सरकार उनके लिए भविष्य निधि में रुपये देती है। 2016 के बाद कर्मचारियों को इस बात की जानकारी हो सकी। अभी भी भविष्य निधि की धनराशि के बारे में बहुत से कर्मचारियों को जानकारी ही नहीं है। यहां तक की वर्दी और उपकरण के नाम पर भी मिलने वाली धनराशि का बंदरबांट हो जाता है।