फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   In University ' School of Studies approved the draft

विवि में ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ के प्रारूप को मंजूरी

Wed, 13 Apr 2016 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 13 Apr 2016 01:20 AM IST
विज्ञापन
In University ' School of Studies approved the draft
ip university - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फैकेल्टी और विभाग के बजाय ‘स्कूल ऑफ स्टडीज’ का प्रारूप लागू होगा। एकेडमिक काउंसिल की मंगलवार को छह घंटे तक चली मैराथन बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। बैठक में एकेडमिक कैलेंडर, छात्र-छात्राओं की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य करने समेत कई अन्य बड़े फैसले भी लिए गए।
विज्ञापन


काउंसिल में स्कूल ऑफ स्टडीज का प्रारूप रखा गया। अभी विश्वविद्यालय में चार फैकेल्टी में 35 से अधिक विभाग तथा कई सेंटर हैं। नए प्रारूप के अंतर्गत कई विभागों को मिलाकर एक स्कूल का गठन किया जाएगा। इस लिहाज से विभागों का वर्गीकरण भी कर लिया गया है। यह व्यवस्था आगामी सत्र से लागू होगी। बैठक में नए एकेडमिक कैलेंडर को भी मंजूरी दे दी गई। यह अगले सत्र से लागू होगा। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय में पांच दिन का सप्ताह होगा। यानी, शनिवार और रविवार को अवकाश रहेगा लेकिन अब विश्वविद्यालय अब सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खुलेगा। पीरियड की अवधि भी 50 मिनट से बढ़ाकर एक घंटा कर दी गई है।
विज्ञापन


बैठक में आगामी सत्र से परास्नातक के सभी विषयों में क्रेडिट बेस्ट च्वॉयस सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए भी नियमावली तय की गई है। इसमें आंदोलन तथा अन्य गतिविधयों की सीमा निर्धारित की गई है। एकेडमिक काउंसिल ने इसे मंजूरी दे दी। इसके अलावा सेंटर ऑफ ग्लोबलाइजेशन एंड डेवलपमेंट स्टडीज का नाम बदलकर सेंटर ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज करने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में कई अध्यक्षों ने विभाग के स्तर पर परास्नातक की परीक्षा कराने के फैसलेे पर आपत्ति उठाई, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। कुलपति ने कहा कि इस पर फैसला हो चुका है और विभाग के स्तर पर ही परीक्षा कराई होगी। बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने की। बैठक में डीएसडब्ल्यू, चीफ प्रॉक्टर, रजिस्ट्रार के अलावा कई विभागाध्यक्ष, कालेज के शिक्षक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कालेजों में परास्नातक की पढ़ाई शुरू करने की वर्षों की मांग पूरी हो गई है। यूइंग क्रिश्चियन कालेज (ईसीसी) में परास्नातक की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति के साथ इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। अन्य कालेजों में इसके लिए आगे की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कमेटी बना दी गई है। इस पूरे प्रस्ताव को एकेडमिक काउंसिल ने मंगलवार को मंजूरी प्रदान कर दी।

कालेजों में परास्नातक की पढ़ाई शुरू करने का निर्णय पूर्व में भी लिया गया था। कालेजों से प्रस्ताव भी ले लिए गए थे, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि इस बार एकेडमिक काउंसिल की मंजूरी के साथ कमेटी गठित करने से परास्नातक कोर्स शुरू होने की उम्मीद प्रबल हो गई है। कमेटी में प्रोफेसर ए.सत्यनारायण, प्रोफेसर एए फातमी, प्रोफेसर आरके सिंह और प्रोफेसर मनमोहन कृष्ण शामिल किए गए हैं। चूंकि ईसीसी में कुछ साल पहले परास्नातक कोर्स शुरू किए गए थे। ऐसे में वहां कोर्स शुरू करने की अनुमति दे दी गई। अन्य कालेजों में परास्नातक कोर्स शुरू करने के लिए मानक बनाने तथा संसाधन के निरीक्षण की जिम्मेदारी समिति को दी गई है। इसके अनुसार कालेज पीजी कोर्सेज के लिए आवेदन करेगी। विश्वविद्यालय संघटक कालेज शिक्षक संघ (आक्टा) ने एकेडमिक काउंसिल के इस फैसले के प्रति आभार प्रकट किया है। अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा का कहना है कुलपति की इस पहल से सभी वर्ग को लाभ होगा।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अब छात्र-छात्राएं भी गुरुजी के कार्यों और व्यवहार का मूल्यांकन करेंगे। इसके लिए फार्म तैयार किया गया है। इसमें विद्यार्थी बताएंगे कि गुरुजी में कौन सी अच्छाई है और कौन से बुराई। यह रिपोर्ट यूजीसी और नैक के सामने भी रखी जाएगी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अब हर विद्यार्थी के लिए पर्यावरण और आपदा प्रबंधन की पढ़ाई अनिवार्य होगी। स्नातक में पर्यावरण का कोर्स शामिल किया जाएगा। यह एक सेमेस्टर या सत्र का होगा। आपदा प्रबंधन के कोर्स को परास्नातक में शामिल हैं।


इलाहाबाद विश्वविद्यालय में डीफिल कराने के लिए शिक्षकों के लिए अनुभव की बाध्यता खत्म कर दी गई है। पहले परास्नातक में कम से कम पांच साल पढ़ाने का अनुभव अनिवार्य था। दो साल पहले इसे घटाकर तीन साल कर दिया गया। एकेडमिक काउंसिल में मंगलवार को हुए फैसले के अनुसार यह बाध्यता भी खत्म कर दी गई है। इस फैसले से संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) में सीट की संख्या बढ़ जाएगी। एक अन्य फैसले के अंतर्गत क्रेट के बीन कमेटी में अब कुलपति नामित शिक्षक को भी शामिल किया जाएगा।

प्रस्तावित स्कूल ऑफ स्टडीज
- स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज एंड लिट्रेचर
- स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज
- स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज
- स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज
- स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज
- स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज
- स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस
- स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस
- स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड इंफार्मेशन साइंसेज
- स्कूल ऑफ आर्ट एंड स्टेटिक्स स्टडीज
- स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टेटिक्स
- स्कूल ऑफ फाउंडेशन
- स्कूल ऑफ व्हैविरल साइंसेज
- स्कूल ऑफ स्कूल ऑफ इंटरफेस स्टडीज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed