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Prayagraj News: महाकुंभ में खास तकनीक से होती है भीड़ की गिनती
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महाकुंभ में आने वाले जन ज्वार की गिनती आखिर कैसे होती है? यह हर कोई जानना चाहता है। बतादें कि मेला प्राधिकरण ने इसके लिए खास तकनीक अपनाई है।
इस बार एआई आधारित कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है। अफसरों के मुताबिक हर चार घंटे पर स्नानार्थियों की संख्या का आंकड़ा भीड़ के घनत्व के आधार पर जारी किया जा रहा है। गिनती करने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। इसका नाम है क्राउड असेसमेंट टीम।
यह टीम रियल टाइम आधारित गिनती कर रही है, ताकि सही संख्या का पता लगाया जा सके। एक अफसर ने बताया कि टीम हर आगंतुक को स्कैन कर रही है। कैमरे चेहरों को स्कैन करने के साथ ही भीड़ के हिसाब से यह बताते हैं कि कितने घंटे में कितने लाख लोग आए हैं।
इसके अलावा किसी भी रूट से मेला क्षेत्र में प्रवेश करने वालों को भी गिना जा रहा है। किसी एरिया में क्राउड डेंसिटी क्या है। संवेदनशील क्षेत्रों, पांटून पुलों पर भीड़ का घनत्व कितना है, यह भी इन कैमरों के माध्यम से आंका जा रहा है। साथ ही ड्रोन से भी भीड़ के घनत्व का हिसाब लगाया जाता है। पूरे मेला क्षेत्र में 1800 कैमरे लगे हुए हैं। सब डाटा एक जगह जाता है। वहां विश्लेषण कर श्रद्धालुओं की संख्या जारी की जाती है।
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इस बार एआई आधारित कैमरे की मदद से लोगों की गिनती की जा रही है। अफसरों के मुताबिक हर चार घंटे पर स्नानार्थियों की संख्या का आंकड़ा भीड़ के घनत्व के आधार पर जारी किया जा रहा है। गिनती करने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। इसका नाम है क्राउड असेसमेंट टीम।
यह टीम रियल टाइम आधारित गिनती कर रही है, ताकि सही संख्या का पता लगाया जा सके। एक अफसर ने बताया कि टीम हर आगंतुक को स्कैन कर रही है। कैमरे चेहरों को स्कैन करने के साथ ही भीड़ के हिसाब से यह बताते हैं कि कितने घंटे में कितने लाख लोग आए हैं।
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इसके अलावा किसी भी रूट से मेला क्षेत्र में प्रवेश करने वालों को भी गिना जा रहा है। किसी एरिया में क्राउड डेंसिटी क्या है। संवेदनशील क्षेत्रों, पांटून पुलों पर भीड़ का घनत्व कितना है, यह भी इन कैमरों के माध्यम से आंका जा रहा है। साथ ही ड्रोन से भी भीड़ के घनत्व का हिसाब लगाया जाता है। पूरे मेला क्षेत्र में 1800 कैमरे लगे हुए हैं। सब डाटा एक जगह जाता है। वहां विश्लेषण कर श्रद्धालुओं की संख्या जारी की जाती है।
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