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उच्च शिक्षा में आदिवासियों के लिए हो अलग नीति
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 21 Jan 2015 11:41 PM IST
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भारत विश्वविद्यालय कुलपति संघ सेंट्रल जोन के सम्मेलन में जुटे कुलपतियों ने आदिवासियों के लिए उच्च शिक्षा में अलग नीति बनाने की मांग उठाई। सैम हिग्गिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शियाट्स) में बुधवार को शुरू हुए दो दिनी सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र में कुलपतियों ने सरकार से आदिवासी क्षेत्रों को एक विशेष जोन में शामिल करने का मुद्दा भी उठाया। सम्मेलन में प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल भी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। बृहस्पतिवार को आखिरी सत्र में रिपोर्ट पर चर्चा होगी और प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
‘राष्ट्रीय विकास में उच्च शिक्षा का योगदान’ पर आयोजित सम्मेलन में पहले दिन 14 कुलपतियों ने हिस्सा लिया। पहले तकनीकी सत्र को नार्थ उड़ीसा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रफुल्ल कुमार मिश्र और नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनायक देशपांडे ने संबोधित किया। अध्यक्षता शियाट्स के कुलपति प्रोफेसर आरबी लाल ने की। वक्ताओं तथा अन्य कुलपतियों ने उच्च शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जताई। दोनों वक्ताओं ने उच्च शिक्षा में सुधार की बात कही। उन्होंने शिक्षकों की योग्यता और उनकी संख्या बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया। कुलपतियों ने विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्ता देने की मांग का मुद्दा भी उठाया।
उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों को एकेडमिक स्वायत्ता तो है लेकिन वित्तीय अधिकार बहुत कम है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति प्रोफेसर केदारनाथ सिंह यादव ने कहा कि सिर्फ बीए, बीएससी, बीकॉम की डिग्री से काम नहीं चलेगा। शिक्षा नीति ऐसी हो कि इसके साथ विद्यार्थियों को स्किल डेवलपमेंट का सर्टिफिकेट भी मिले। संघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर फुरकान कमर ने नई शिक्षा नीति के लिए केंद्र सरकार की पहल पर भी चर्चा की। इसके लिए राज्य सरकारों से सुझाव मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में पारित प्रस्ताव और रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों तथा उच्च शिक्षा से संबंधित अन्य संस्थाओं को भेजी जाएगी।
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उम्मीद जताई कि सरकारें इसे गंभीरता से लेंगी। सम्मेलन में कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी भुवनेश्वर के प्रोफेसर पीपी माथुर, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमपी दुबे, उड़ीसा के प्रोफेसर एसपी अधिकारी, द आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसपी गुप्ता, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एनसी गौतम, शियाट्स के प्रति कुलपति डॉ. एकेए लॉरेंस, समारोह में प्रति कुलपति प्रशासन सुनील बी लाल, निदेशक प्रशासन विनोद बी.लाल समेत कई विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल रहे।
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‘राष्ट्रीय विकास में उच्च शिक्षा का योगदान’ पर आयोजित सम्मेलन में पहले दिन 14 कुलपतियों ने हिस्सा लिया। पहले तकनीकी सत्र को नार्थ उड़ीसा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रफुल्ल कुमार मिश्र और नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनायक देशपांडे ने संबोधित किया। अध्यक्षता शियाट्स के कुलपति प्रोफेसर आरबी लाल ने की। वक्ताओं तथा अन्य कुलपतियों ने उच्च शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जताई। दोनों वक्ताओं ने उच्च शिक्षा में सुधार की बात कही। उन्होंने शिक्षकों की योग्यता और उनकी संख्या बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया। कुलपतियों ने विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्ता देने की मांग का मुद्दा भी उठाया।
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उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों को एकेडमिक स्वायत्ता तो है लेकिन वित्तीय अधिकार बहुत कम है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति प्रोफेसर केदारनाथ सिंह यादव ने कहा कि सिर्फ बीए, बीएससी, बीकॉम की डिग्री से काम नहीं चलेगा। शिक्षा नीति ऐसी हो कि इसके साथ विद्यार्थियों को स्किल डेवलपमेंट का सर्टिफिकेट भी मिले। संघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर फुरकान कमर ने नई शिक्षा नीति के लिए केंद्र सरकार की पहल पर भी चर्चा की। इसके लिए राज्य सरकारों से सुझाव मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में पारित प्रस्ताव और रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों तथा उच्च शिक्षा से संबंधित अन्य संस्थाओं को भेजी जाएगी।
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उम्मीद जताई कि सरकारें इसे गंभीरता से लेंगी। सम्मेलन में कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी भुवनेश्वर के प्रोफेसर पीपी माथुर, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमपी दुबे, उड़ीसा के प्रोफेसर एसपी अधिकारी, द आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसपी गुप्ता, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एनसी गौतम, शियाट्स के प्रति कुलपति डॉ. एकेए लॉरेंस, समारोह में प्रति कुलपति प्रशासन सुनील बी लाल, निदेशक प्रशासन विनोद बी.लाल समेत कई विश्वविद्यालय के कुलपति शामिल रहे।