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Prayagraj News: 2019 में सपा, बसपा और कांग्रेस को मिलाकर भी नहीं मिले थे भाजपा के बराबर वोट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Feb 2024 02:14 AM IST
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In 2019, even SP, BSP and Congress together did not get equal number of votes as BJP
सपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में संयुक्त प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। इसके बावजूद प्रयागराज की दोनों सीटों पर गठबंधन के उम्मीदवार की राह आसान नहीं दिख रही। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन था। इसके बावजूद सपा-बसपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों को मिले कुल मत भाजपा उम्मीदवार को मिले वोट से कम थे।
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इलाहाबाद संसदीय सीट की बात करें तो भाजपा की डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को 494454 वोट मिले थे। वहीं बसपा के समर्थन से चुनाव लड़ रहे सपा के राजेंद्र सिंह पटेल को 310179 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के योगेश शुक्ला को मात्र 31953 वोट ही मिले थे। इस तरह से सपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को मिलाकर कुल 342132 वोट मिले थे।
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फूलपुर लोकसभा सीट की भी यही स्थिति रही। 2019 में सांसद चुनी गईं भाजपा की केशरी देवी पटेल को रिकाॅर्ड 544701 मिले थे। वहीं बसपा के सहयोग से चुनाव लड़ रहे सपा के पंधारी यादव को 372733 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के पंकज पटेल को महज 32761 वोट मिले थे। इस तरह से सपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को मिलाकर 405494 मत मिले थे।
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इलाहाबाद में 1984 के बाद नहीं जीती है कांग्रेस
लाल बहादुर शास्त्री इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री की इस सीट पर कांग्रेस 1984 के बाद से कभी जीत हासिल नहीं कर पाई। 1984 के बाद अब तक 10 लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस इनमें लड़ाई में भी नहीं रहीं। इलाहाबाद सीट पर कांग्रेस 1974 से ही कमजोर होने लगी थी। संयुक्त विपक्ष के जनेश्वर मिश्र ने 1974 में कांग्रेस के सतीश चंद्र खरे तथा 1977 में विश्वनाथ प्रताप सिंह को हराया था। हालांकि, इंदिरा गांधी के निधन के बाद हुए 1984 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने उस समय के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया था। इसके बाद से इस सीट पर कांग्रेस को जीत नहीं मिली है। हालांकि, सपा इस पर हमेशा मजबूत रही है। अब सपा के साथ गठबंधन के बाद यह सीट कांग्रेस के खाते में आई है। ऐसे में कांग्रेस इस सीट पर पुरानी स्थिति बनाने के लिए कवायद में जुटी है।
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