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हाईकोर्ट का अहम फैसला : गिरफ्तारी के कारणों का उल्लेख करना पुलिस अधिकारी के लिए आवश्यक
Thu, 29 Jun 2023 06:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 29 Jun 2023 06:03 PM IST
सार
न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने कन्नौज की याची राजकुमारी की याचिका को निस्तारित करते हुए .यह फैसला दिया। याची के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया था।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के मामलों में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी या जांच अधिकारी को किसी भी वांछित की गिरफ्तारी करते समय उसके कारणों को दर्ज करना आवश्यक है, बाध्यकारी है। उसे दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 41 और 41 ए की प्रक्रिया का भी पालन करना होगा, जिसमें संज्ञेय या असंज्ञेय अपराधों के मामले में गिरफ्तारी का उल्लेख किया गया है।
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न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने कन्नौज की याची राजकुमारी की याचिका को निस्तारित करते हुए .यह फैसला दिया। याची के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया था। एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याची ने दलील दी कि मुकदमे की सभी धाराएं सजा सात साल से कम सजा वाली हैं। उसे गलत फंसाया गया है।
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दलील दी कि पुलिस अधिकारी सीआरपीसी की धारा 41 और 41ए के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के लिए बाध्य हैं। प्रावधान है कि पुलिस अधिकारी किसी की गिरफ्तारी करते समय उसके कारणों को लिखित रूप में दर्ज करेंगे। उसने सुप्रीम कोर्ट के विमल कुमार और अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया।
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कहा, पुलिस अधिकारी इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पूरी तरह से लागू होते हैं। लिहाजा, मामले में शीर्ष न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाए।