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केंद्र सरकार के निर्णय को छात्र ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, निजता हनन से जुड़ा है मामला
Fri, 04 Jan 2019 08:57 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 04 Jan 2019 08:57 PM IST
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मोदी सरकार के निर्णय के खिलाफ आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। यह मामला देश के उन सभी लोगों से जुड़ा है जो कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।
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दरअसल देश के नागारिकों का कंप्यूटर डाटा चेक करने का अधिकार 10 एजेंसियों को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के साइबर एवं सूचना सुरक्षा डिविजन की ओर से दिया गया है। इसी अधिकार को दिए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है।
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आईआईटी खड़गपुर के छात्र सौरभ पांडेय ने जनहित याचिका दाखिल कर सरकार की नई नीति को चुनौती दी है। याचिका में आईटी एक्ट की धारा 69 की संवैधानिकता पर भी सवाल उठाया गया है। मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ इस मामले में एक फरवरी को सुनवाई करेगी।
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याचिका में कहा गया है कि, केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के साइबर एवं सूचना सुरक्षा डिविजन के सचिव ने 20 दिसंबर 2018 को आईटी एक्ट की धारा 69 (5) के तहत आदेश जारी कर 10 सुरक्षा एजेंसियों को अधिकार दिया है कि, वह किसी भी नागरिक का कंप्यूटर डाटा कभी भी चेक कर सकती हैं। यह असीमित अधिकार है जो कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 में वर्णित मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। केंद्र सरकार का यह आदेश मनमानापूर्ण और अभिव्यक्ति की आजादी तथा निजता के अधिकार का हनन करने वाला है।
याची का कहना है कि देश में गणतंत्र प्रणाली लागू है। भारत को लोक कल्याणकारी राज्य बनाया गया है, लेकिन केंद्र सरकार इसे सर्विलांस राज्य में बदल देना चाहती है। केंद्र सरकार के सहायक सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने की मांग की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है।