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हाईकोर्ट ने कहा : तथ्य सुसंगत, तो खारिज नहीं की जा सकती पक्षद्रोही की गवाही

Sun, 20 Aug 2023 02:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 20 Aug 2023 02:18 PM IST
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If the facts are relevant, then the testimony of the traitor cannot be rejected
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा पक्षद्रोही की गवाही अभियोजन या बचाव पक्ष के मामले से सुसंगत है, तो उसे सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। पक्षद्रोही की गवाही को नजरंदाज कर निचली अदालत से सामूहिक बलात्कार के मामले में सश्रम कारावास की सजा भुगत रहे तीन कैदियों को हाईकोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने बरेली जेल में बंद चमन, अमित और ओमवीर सिंह की ओर से निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अपील की सुनवाई करते हुए दिया।

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बरेली जिले के कैंट थाना क्षेत्र की एक विवाहित महिला ने वर्ष 2014 तहरीर दी, आरोप लगाया कि दोपहर लगभग 12 बजे जब वह मोहारी के जंगल में घास कटने गई थी। मौके पर पहुंचे चमन में बंदूक की नोक पर उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर अमित और ओमवीर ने भी दुष्कर्म के बाद उसके झुमके छीन कर भाग गए। वापस घर पहुंचने पर अपनी सास को आपबीती सुनाई, उसके बाद एफआईआर दर्ज करवाई।

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पुलिस में मामले की विवेचना के बाद तीनों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और लूट की संगीन धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बरेली की सत्र अदालत में चले विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पेश हुए गवाहों से भिन्न पीड़िता ने प्रति परीक्षा में अपने पूर्व के बयानों के मुकर गई, कहा की गांव वालों के दबाव में उसने तहरीर दी थी। दस्तावेजी साक्ष्यों में पेश चिकित्सा रिपोर्ट में कोई चोट नहीं पाई गई।

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लेकिन अपराध की गंभीरता और अभियोजन की कहानी के आधार पर निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 20 साल सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड को सजा सुना दी थी।

 

सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल हुई। कोर्ट ने पाया की निचली अदालत ने पक्षद्रोही गवाह की सूक्ष्म परीक्षा किए बिना, गवाही को सिरे से खारिज करते हुए सजा सुना दी। हाईकोर्ट ने कहा की पक्षद्रोही की गवाही को तब तक सिरे से खारिज नहीं किया जाना चाहिए जब तक गवाही के तथ्य सूक्ष्म परीक्षण में सुसंगतता से भिन्न न साबित हो जाएं।

 

हाईकोर्ट ने मामले के मेडिकल रिपोर्ट और पक्षद्रोही पीड़िता के बयानों के आधार पर पाया की सामूहिक दुष्कर्म का आरोप झूठा था। कोर्ट ने दोषसिद्ध के बाद सश्रम कारावास को सजा भुगत रहे चमन, अमित और ओमवीर को दोषमुक्त कर दिया।

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