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अभिभावकों को महंगी पड़ने जा रही बच्चों की शिक्षा

Mon, 21 Mar 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 21 Mar 2016 12:37 AM IST
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If parents are expensive children's education
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 गलगोटिया, बाबू बनारसी दास, यूनाइटेड, राममूर्ति, सरदार पटेल, जीएलएस जैसे बड़े इंजीनियरिंग, मेडिकल और व्यावसायिक शिक्षण संस्थान या फिर विदेश में किसी बड़े संस्थान में अगर आप अपने बच्चों को शिक्षा दिला रहे हैं तो आयकर की नजर से नहीं बच सकेंगे। दो लाख रुपये से अधिक सालाना फीस भरने वालों पर आयकर विभाग ने शिकंजा कस दिया है। इलाहाबाद में भी कई लोग हैं जो अपने बच्चों को ऐसे कॉलेजों, संस्थानों में उच्च शिक्षा दिला रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों ने मोटी फीस के लिए रकम की व्यवस्था कैसे की, जल्द ही आयकर विभाग को इसका हिसाब देना होगा। नई व्यवस्था में कॉलेज और अभिभावक दोनों ही आयकर से नहीं बच सकेंगे।
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आयकर विभाग के पास फिलहाल ऐसे लोगों का अभी कोई आंकड़ा नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि अकेले इलाहाबाद में ऐसे अभिभावकों की संख्या 3000 से ऊपर है। इसमें मुट्ठीगंज और सिविल लाइंस के कई बड़े व्यापारी शामिल हैं तो अशोक नगर, दरभंगा कॉलोनी, जार्जटाउन, टैगोर टाउन, लूकरगंज आदि इलाकों में रहने वाले डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े अधिवक्ताओं के बच्चे भी देश के बड़े शिक्षण संस्थानों या फिर विदेश में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं और अभिभावक उनकी फीस पर सालाना काफी मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। आयकर विभाग ने ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के लिए शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया है।
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स्कूलों से एजूकेशन फीस, फूडिंग, लॉजिंग फीस, कॉलेजों से देश-विदेश टूर कराने के एवज में ली जाने वाली फीस आदि का ब्योरा लेने के बाद आयकर विभाग अभिभावकों को नोटिस भेज रहा है। आयकर विभाग की इंटेलीजेंशन एवं क्रिमिनल इंविस्टीगेशन शाखा के नोटिस के बाद इलाहाबाद समेत प्रदेश के अन्य जिलों में रहने वाले ऐसे अभिभावकों का वित्तीय वर्ष 2014-15 का ब्योरा स्कूलों से लखनऊ स्थित आयकर विभाग में नोडल अधिकारी मधु रजानी के पास पहुंच गया है। अब वहां से अभिभावकों को नोटिस भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। कॉलेज प्रबंधन को अप्रैल से वित्तीय वर्ष 2015-16 का भी ब्योरा देना होगा। जांच-पड़ताल के बाद आयकर विभाग ऐसे अभिभावकों से टैक्स की वसूली करेगा।
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जिन अभिभावकों ने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए बैंकों से एजूकेशन लोन ले रखा है, उन्हें आयकर की चिंता करने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों का ब्योरा आयकर विभाग के पास पहले से ही है और लोन अदा करने के एवज में पर उन्हें आयकर से छूट भी मिल रही है।


अपने बच्चों को बड़े शिक्षण संस्थानों में पढ़ाकर सालाना मोटी फीस भरने वाले व्यापारी और प्रोफेशनल्स की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रोफेशनल्स में कई डॉक्टर, इंजीनियर्स, अधिवक्ता, आर्किटेक्ट ऐसे हैं, जिनके बच्चे देश के नामी-गिरानी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन लोगों ने स्कूलों में मोटी फीस जमा करने के लिए रकम की व्यवस्था कहां से की, यह अब आयकर विभाग को बताना होगा।
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