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हाईकोर्ट का याचिकाकर्ता को झटका- 'वादे पूरा नहीं हो रहे तो उचित फोरम में शिकायत करें'
Wed, 15 May 2019 11:16 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 15 May 2019 11:16 AM IST
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लोकसभा चुनाव में नेताओं के बेलगाम भाषणों पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि चुनावी वादे न निभा पाने वाली भारतीय जनता पार्टी पर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची चाहे तो नेताओं के भाषणों की शिकायत उचित फोरम पर कर सकता है। अलीगढ़ के खुर्शीर्दुरमान की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने सुनवाई की।
कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दाखिल की जाती हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट अपनी शक्तियों का प्रयोग इस प्रकार की याचिकाओं पर नहीं कर सकती है।
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ऐसी व्यर्थ की याचिकाओं को भारी हर्जाना लगाकर खारिज करना चाहिए, ताकि फिजूल की याचिकाएं दाखिल करने वाले लोग हतोत्साहित हों।
कोर्ट ने याची को निर्देश दिया कि हर्जाने की राशि एक माह के भीतर एडवोकेट्स एसोसिएशन के खाते में अधिवक्ता कल्याण हेतु जमा करा दी जाए।
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कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची चाहे तो नेताओं के भाषणों की शिकायत उचित फोरम पर कर सकता है। अलीगढ़ के खुर्शीर्दुरमान की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने सुनवाई की।
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कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दाखिल की जाती हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट अपनी शक्तियों का प्रयोग इस प्रकार की याचिकाओं पर नहीं कर सकती है।
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ऐसी व्यर्थ की याचिकाओं को भारी हर्जाना लगाकर खारिज करना चाहिए, ताकि फिजूल की याचिकाएं दाखिल करने वाले लोग हतोत्साहित हों।
कोर्ट ने याची को निर्देश दिया कि हर्जाने की राशि एक माह के भीतर एडवोकेट्स एसोसिएशन के खाते में अधिवक्ता कल्याण हेतु जमा करा दी जाए।
याचिका में कहा गया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लोगों से तमाम चुनावी वादे किए थे। इनको पूरा नहीं किया और जनता को गुमराह किया। इसके लिए पार्टी पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
याचिका में भारत के राष्ट्रपति, मुख्य चुनाव आयुक्त और एसएसपी अलीगढ़ को पक्षकार बनाया गया था। चुनाव आयोग के अधिवक्ता बीएन सिंह का कहना था कि वादा पूरा न करने पर किसी पार्टी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती है। लोकतंत्र में यह जनता को तय करना है कि किसने वादा पूरा किया या नहीं और किसे वोट देना है किसे नहीं।
याचिका में भारत के राष्ट्रपति, मुख्य चुनाव आयुक्त और एसएसपी अलीगढ़ को पक्षकार बनाया गया था। चुनाव आयोग के अधिवक्ता बीएन सिंह का कहना था कि वादा पूरा न करने पर किसी पार्टी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती है। लोकतंत्र में यह जनता को तय करना है कि किसने वादा पूरा किया या नहीं और किसे वोट देना है किसे नहीं।