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यूपी: बाढ़ प्रभावित इलाकों में सौ रुपये की ढिबरी, साठ रुपये लीटर मिट्टी का तेल
Wed, 18 Sep 2019 01:48 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2019 01:48 AM IST
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Hundred rupees drought in flood affected areas, sixty rupees liter kerosene
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प्रयागराज में बाढ़ प्रभावित इलाकों में मिट्टी का तेल नहीं मिल रहा है। वहीं कटरा में परचून की कुच दुकानों पर मिट्टी का तेल साठ रुपये लीटर बेचा जा रहा है। मजबूरी में लोग जरूरत के हिसाब से मिट्टी का तेल खरीद रहे हैं।
यही नहीं मोमबत्ती भी दोगुने दामों पर बेची जा रही है। जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता आपूर्ति विभाग सुनिश्चित नहीं करा पा रहा है। कछारी इलाकों की बिजली कटने से लोग सौ रुपये की ढिबरी, डेढ़ सौ का लैंप और तीन सौ रुपये तक खर्च कर लालटेन खरीद रहे हैं। परेशानी तब और बढ़ जाती है जब खोजने पर भी मिट्टी का तेल नहीं मिलता।
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शंकरघाट तेलियरगंज निवासी सुभाष सिंह के मुताबिक घर में जो मिट्टी का तेल था, उसे मच्छरों के मारने में खर्च कर दिया। अब आपदा आई तो बिजली गुल होने की परेशानी से बचने के लिए लैंप, ढिबरी, लालटेन खरीदी।
समस्या मिट्टी के तेल के न मिलने से बढ़ गई। सुभाष ने बताया कि शंकरघाट से तेलियरगंज फिर कटरा तक मिट्टी का तेल खोजते रहे। कटरा में एक परचून की दुकान पर उन्हें साठ रुपये लीटर के भाव से तेल मिला। बिना मोलतोल किए उन्होंने दो लीटर तेल के बदले 120 रुपये चुकाए और सीधे घर की ओर स्कूटी दौड़ा दी।
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यही नहीं मोमबत्ती भी दोगुने दामों पर बेची जा रही है। जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता आपूर्ति विभाग सुनिश्चित नहीं करा पा रहा है। कछारी इलाकों की बिजली कटने से लोग सौ रुपये की ढिबरी, डेढ़ सौ का लैंप और तीन सौ रुपये तक खर्च कर लालटेन खरीद रहे हैं। परेशानी तब और बढ़ जाती है जब खोजने पर भी मिट्टी का तेल नहीं मिलता।
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शंकरघाट तेलियरगंज निवासी सुभाष सिंह के मुताबिक घर में जो मिट्टी का तेल था, उसे मच्छरों के मारने में खर्च कर दिया। अब आपदा आई तो बिजली गुल होने की परेशानी से बचने के लिए लैंप, ढिबरी, लालटेन खरीदी।
समस्या मिट्टी के तेल के न मिलने से बढ़ गई। सुभाष ने बताया कि शंकरघाट से तेलियरगंज फिर कटरा तक मिट्टी का तेल खोजते रहे। कटरा में एक परचून की दुकान पर उन्हें साठ रुपये लीटर के भाव से तेल मिला। बिना मोलतोल किए उन्होंने दो लीटर तेल के बदले 120 रुपये चुकाए और सीधे घर की ओर स्कूटी दौड़ा दी।
सुभाष का मामला बानगी भर है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों को मिट्टी का तेल जैसी बुनियादी वस्तुएं मुहैया नहीं हो रही हैं। यही नहीं अचानक मोमबत्ती के भाव लगभग दोगुने वसूले जा रहे हैं।
दस रुपये की छह इंच की मोमबत्ती बीस रुपये तक बेची जा रही है। प्रशासन के निर्देश के बावजूद आपूर्ति विभाग के अधिकारी विभाग से जुड़ी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करा पा रहे हैं।
दस रुपये की छह इंच की मोमबत्ती बीस रुपये तक बेची जा रही है। प्रशासन के निर्देश के बावजूद आपूर्ति विभाग के अधिकारी विभाग से जुड़ी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करा पा रहे हैं।