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मानवाधिकार आयोग दे सकता है मुआवजे का आदेश
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Human Rights Commission can order compensation
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य मानवाधिकार आयोग को पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश देने का पूरा अधिकार है। वह संबंधित एसएसपी या जिलाधिकारी को पीड़ित को मुआवजे के भुगतान का आदेश सीधे दे सकता है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि सिर्फ 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता होने पर ही मुआवजे का भुगतान किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि मानवाधिकार आयोग के समक्ष दी गई अर्जी में यह नियम लागू नहीं होता है। फतेहपुर के जहानाबाद अंसारुल हक को एक लाख रुपये मुआवजा देने के राज्य मानवाधिकार के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बीके नारायण तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
2016 में मकर संक्रांति के दिन हुए बलबे में अंसारूल हक की एक आंख फूट गई और सिर में गंभीर चोट लगी। मुआवजे के तौर पर उसे 20 हजार रुपये दिए गए। शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने एक लाख रुपये देने का आदेश दिया, जिसे राज्य सरकार ने चुनौती दी थी। कहा गया कि मानवाधिकार आयोग मुआवजा देने की संस्तुति कर सकता है, सीधे मुआवजा देने का आदेश नहीं दे सकता। इसी प्रकार से एक लाख के मुआवजे पर सरकार का कहना था कि 40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत की विकलांगता पर ही मुआवजा देने का नियम है। कोर्ट ने इन दोनों दलीलों को नहीं माना और अनुच्छेद 226 के अंतर्गत याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि मानवाधिकार आयोग के समक्ष दी गई अर्जी में यह नियम लागू नहीं होता है। फतेहपुर के जहानाबाद अंसारुल हक को एक लाख रुपये मुआवजा देने के राज्य मानवाधिकार के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति बीके नारायण तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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2016 में मकर संक्रांति के दिन हुए बलबे में अंसारूल हक की एक आंख फूट गई और सिर में गंभीर चोट लगी। मुआवजे के तौर पर उसे 20 हजार रुपये दिए गए। शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने एक लाख रुपये देने का आदेश दिया, जिसे राज्य सरकार ने चुनौती दी थी। कहा गया कि मानवाधिकार आयोग मुआवजा देने की संस्तुति कर सकता है, सीधे मुआवजा देने का आदेश नहीं दे सकता। इसी प्रकार से एक लाख के मुआवजे पर सरकार का कहना था कि 40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत की विकलांगता पर ही मुआवजा देने का नियम है। कोर्ट ने इन दोनों दलीलों को नहीं माना और अनुच्छेद 226 के अंतर्गत याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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