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इंसानी रिश्तों को सहेजतीं कहानियां

Mon, 24 Aug 2015 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 24 Aug 2015 01:50 AM IST
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Human relationships Shejtin Stories
इलाहाबाद। प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से शनिवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्ीय हिंदी विवि के क्षेत्रीय केंद्र में ‘किताबनामा’ के तहत वरिष्ठ कथाकार असरार गांधी के कहानी संग्रह ‘गुबार’ पर चर्चा की गई। बतौर अध्यक्ष वरिष्ठ कवि-आलोचक प्रोफेसर राजेंद्र कुमार ने कहा, गुबार की कहानियां इंसानी रिश्तों पर केंद्रित हैं। समकालीन परिस्थितियों से जुड़ाव सहित ये कहानियां इंसानी रिश्तों की बखूबी पड़ताल करती हैं। आजकल चीजों का वक्त हो गया है। इंसानी रिश्ते भी चीजों में तब्दील हो गए हैं। असरार की कहानियां इंसानी रिश्तों को बखूबी चीजों से जोड़ती हैं।
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वरिष्ठ कथाकार एवं आलोचक शकील सिद्दकी ने असरार की कहानियों को नाउम्मीद, असंतुष्ट एवं हारे हुए लोगों की कहानी बताई। स्थितियों से जोड़ते हुए कहा, आज औरत सबसे ज्यादा मर्माहत है। उपभोक्तावादी संस्कृति में एकाकीपन बढ़ा है। संवेदनशील लोग अकेले होते जा रहे हैं। कहानियां गुम होती जा रही हैं जो चिंता का विषय है। उर्दू के युवा आलोचक डॉ. खान फारूक ने कहा असरार की कहानियां वर्ण व्यवस्था पर चोट करती हैं।
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इससे पहले कथाकार असरार गांधी ने गुबार की कहानियों का पाठ किया। प्रलेस अध्यक्ष प्रो.संतोष भदौरिया ने स्वागत, सचिव संध्या नवोदिता ने संचालन और आनंद मालवीय ने आभार ज्ञापन किया। कार्यक्रम में रामजी राय, एमए कदीर, अशफाक हुसैन, प्रणयकृष्ण, केके पांडेय, संतोष चतुर्वेदी, शबनम हमीद, पद्मा सिंह, झरना मालवीय आदि मौजूद रहीं।
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