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Hritalika Teej: हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग में सौभाग्यदायिनी बनेगी इस बार हरतालिका तीज
Fri, 21 Aug 2020 06:06 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Aug 2020 06:06 AM IST
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- फोटो : prayagraj
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अखंड सौभाग्य की कामना और पति की दीर्घायु के लिए सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज का निर्जला व्रत इस बार भादो मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी 21 अगस्त को रखेंगी। पूर्वांचल में लोकप्रिय इस व्रत की घर-घर तैयारियां अंतिम दौर में हैं।
पूजा सामग्री से लेकर प्रतिमाओं तक की खरीद शुरू हो गई है। इस बार हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग में यह व्रत हर किसी के लिए शुभ फलदायी होगी। दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने के साथ ही पति के हाथ से जल पीकर व्रत तोड़ेंगी।
व्रती महिलाएं हरतालिका तीज पर सूर्योदय से पहले उठकर संगम के अलावा गंगा-यमुना के तटों पर स्नान करने के बाद सोलह शृंगार करेंगी। इसके बाद वेदियां बनाकर शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की घर-घर में प्रतिष्ठापना की जाएगी। इस बार हरतालिका तीज की तृतीया सिद्धि योग में पड़ेगी।
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इसलिए इस दिन किए जाने वाले व्रत और पूजन का फलित व्रतियों को सुख-समृद्धि के रूप में प्राप्त होगा। हस्त नक्षत्र रात 9:29 बजे लगेगा। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत अखंड सुहाग की कामना से किया जाता है, इसलिए महिलाओं को इस व्रत की पूजा हस्त नक्षत्र में ही करनी चाहिए।
सौभाग्य द्रव्य से मां पार्वती की पूजा फलदायी रहेगी। इसके साथ ही हरि काली, हस्त गौरी, कोटिश्वरी की प्रतिमाओं का भी पूजन करना चाहिए। हरतालिका तीज व्रत की तैयारियां घर-घर में की जा रही हैं। महिलाएं व्रत रखकर तरह-तरह के पकवानों का भगवान शिव और पार्वती को भोग लगाएंगी। रात्रि जागरण की भी परंपरा है।
पूजन मुहूर्त
---------------
-तृतीया 20 अगस्त की मध्यरात्रि 2:14 बजे लग जाएगी। इसके बाद 21 अगस्त की रात 11:03 बजे तक रहेगी।
-प्रदोष काल में हरितालिका पूजा मुहूर्त- 6 :54 मिनट से 9:06 बजे तक।
-हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग में रात 9:29 बजे करें हरतालिका व्रत की पूजा।
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पूजा सामग्री से लेकर प्रतिमाओं तक की खरीद शुरू हो गई है। इस बार हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग में यह व्रत हर किसी के लिए शुभ फलदायी होगी। दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने के साथ ही पति के हाथ से जल पीकर व्रत तोड़ेंगी।
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व्रती महिलाएं हरतालिका तीज पर सूर्योदय से पहले उठकर संगम के अलावा गंगा-यमुना के तटों पर स्नान करने के बाद सोलह शृंगार करेंगी। इसके बाद वेदियां बनाकर शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की घर-घर में प्रतिष्ठापना की जाएगी। इस बार हरतालिका तीज की तृतीया सिद्धि योग में पड़ेगी।
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इसलिए इस दिन किए जाने वाले व्रत और पूजन का फलित व्रतियों को सुख-समृद्धि के रूप में प्राप्त होगा। हस्त नक्षत्र रात 9:29 बजे लगेगा। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत अखंड सुहाग की कामना से किया जाता है, इसलिए महिलाओं को इस व्रत की पूजा हस्त नक्षत्र में ही करनी चाहिए।
सौभाग्य द्रव्य से मां पार्वती की पूजा फलदायी रहेगी। इसके साथ ही हरि काली, हस्त गौरी, कोटिश्वरी की प्रतिमाओं का भी पूजन करना चाहिए। हरतालिका तीज व्रत की तैयारियां घर-घर में की जा रही हैं। महिलाएं व्रत रखकर तरह-तरह के पकवानों का भगवान शिव और पार्वती को भोग लगाएंगी। रात्रि जागरण की भी परंपरा है।
पूजन मुहूर्त
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-तृतीया 20 अगस्त की मध्यरात्रि 2:14 बजे लग जाएगी। इसके बाद 21 अगस्त की रात 11:03 बजे तक रहेगी।
-प्रदोष काल में हरितालिका पूजा मुहूर्त- 6 :54 मिनट से 9:06 बजे तक।
-हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग में रात 9:29 बजे करें हरतालिका व्रत की पूजा।