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जीआई सर्वे शुरू, बढ़ेगा हाउस टैक्स
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जीआईएस प्रॉपर्टी सर्वे शुरू, बढे़गा हाउस टैक्स
कर के दायरे में आएंगे करीब 25 हजार नए मकान
नगर निगम ने शहर में जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी सर्वे का काम शुरू करा दिया है। भवनों का सेटेलाइट ब्योरा जुटाया जा रहा है। इससे जर्जर भवन या कम निर्माण स्थल दिखाकर कर में घालमेल करने पर लगाम लगेगी। शहर के 2.17 लाख भवन स्वामियों का हाउस टैक्स (गृहकर) और बढ़ेगा। साथ ही करीब 25 हजार नए मकान भी पहली बार गृहकर के दायरे में आएंगे।
प्रयागराज नगर निगम क्षेत्र में यह कार्य गुरुग्राम की कंपनी जियो इंफोसिस टेक्नोलॉजी को दिया गया है। शासन की ओर से नियुक्त यह कंपनी भौगोलिक सूचना प्रणाली जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफारमेशन सिस्टम) बेस्ड प्रॉपर्टी सर्वे का काम कर रही है। नई गणना के हिसाब से गृहकर का प्रचलित दरों की दर निर्धारण किया जाएगा। कंपनी के सीईओ के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट नगर आयुक्त को दी जाएगी। माना जा रहा है कि इस गणना के बाद 25 फीसदी भवनों के गृहकर में वृद्धि होगी। साथ ही हजारों नए मकान भी कर के दायरे में आएंगे।
गृहकर के फोटोयुक्त बिल जारी होंगे
जीआईएस सर्वे के बाद सभी भवन स्वामियों को ए फोर पेपर पर गृहकर के फोटोयुक्त बिल जारी किए जाएंगे। एसएमएस से सूचना देने की व्यवस्था लागू रहेगी। बिल पर भवन संबंधी सभी सूचनाएं रहेंगी। इसमें मकान मालिक का नाम, वार्ड नंबर, पता दर्ज होगा। इसके बाद अन्य 16 कॉलम में पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें प्रापर्टी की पहचान, भवन क्रमांक, कुल जमीन, भवन का प्रकार, निर्मित और खाली क्षेत्रफल दर्ज होगा। इसके अलावा सड़क की चौड़ाई जिस पर मकान बना है, साथ ही अगर मकान किराए पर है तो उसकी जानकारी, भवन का वार्षिक मूल्यांकन, छूट के विवरण के साथ वार्षिक मूल्यांकन लिखा होगा। इसके नीचे वास्तविक गृहकर, सीवर और जलकर के मद में लिए जाने वाली रकम का पूरा ब्योरा होगा।
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हर घर को देंगे 17 अंकों वाला यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर
जीआईएस सर्वे के दौरान शहर के सभी वार्डों में नए सिरे से मकानों की नंबरिंग की जाएगी। हर घर को 17 अंकों का यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर भी दिया जाएगा। इसमें चार अंकों का मोहल्ला/कॉलोनी का कोड रहेगा। वार्डों में एक सड़क से दूसरी सड़क तक पॉकेट बनाकर मकान नंबर एलाट किए जाएंगे। इसका सर्वाधिक लाभ अल्लापुर, राजरूपपुर जैसे मोहल्लों में होगा, जहां मकान नंबर खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है।
शासन ने राजस्व वृद्धि और कर मामलों के विवादों में कमी लाने के उद्देश्य से जीआईएस आधारित प्रापर्टी सर्वे कराने का निर्णय लिया है। कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। नए साल में मकनों के नंबर तो बदलेंगे ही, सभी भवनों की यूनिक आईडी भी जनरेट की जाएगी। एक क्लिक पर भवनों का ब्यौरा ऑनलाइन होगा।
- रवि रंजन, नगर आयुक्त
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कर के दायरे में आएंगे करीब 25 हजार नए मकान
नगर निगम ने शहर में जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी सर्वे का काम शुरू करा दिया है। भवनों का सेटेलाइट ब्योरा जुटाया जा रहा है। इससे जर्जर भवन या कम निर्माण स्थल दिखाकर कर में घालमेल करने पर लगाम लगेगी। शहर के 2.17 लाख भवन स्वामियों का हाउस टैक्स (गृहकर) और बढ़ेगा। साथ ही करीब 25 हजार नए मकान भी पहली बार गृहकर के दायरे में आएंगे।
प्रयागराज नगर निगम क्षेत्र में यह कार्य गुरुग्राम की कंपनी जियो इंफोसिस टेक्नोलॉजी को दिया गया है। शासन की ओर से नियुक्त यह कंपनी भौगोलिक सूचना प्रणाली जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफारमेशन सिस्टम) बेस्ड प्रॉपर्टी सर्वे का काम कर रही है। नई गणना के हिसाब से गृहकर का प्रचलित दरों की दर निर्धारण किया जाएगा। कंपनी के सीईओ के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट नगर आयुक्त को दी जाएगी। माना जा रहा है कि इस गणना के बाद 25 फीसदी भवनों के गृहकर में वृद्धि होगी। साथ ही हजारों नए मकान भी कर के दायरे में आएंगे।
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गृहकर के फोटोयुक्त बिल जारी होंगे
जीआईएस सर्वे के बाद सभी भवन स्वामियों को ए फोर पेपर पर गृहकर के फोटोयुक्त बिल जारी किए जाएंगे। एसएमएस से सूचना देने की व्यवस्था लागू रहेगी। बिल पर भवन संबंधी सभी सूचनाएं रहेंगी। इसमें मकान मालिक का नाम, वार्ड नंबर, पता दर्ज होगा। इसके बाद अन्य 16 कॉलम में पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें प्रापर्टी की पहचान, भवन क्रमांक, कुल जमीन, भवन का प्रकार, निर्मित और खाली क्षेत्रफल दर्ज होगा। इसके अलावा सड़क की चौड़ाई जिस पर मकान बना है, साथ ही अगर मकान किराए पर है तो उसकी जानकारी, भवन का वार्षिक मूल्यांकन, छूट के विवरण के साथ वार्षिक मूल्यांकन लिखा होगा। इसके नीचे वास्तविक गृहकर, सीवर और जलकर के मद में लिए जाने वाली रकम का पूरा ब्योरा होगा।
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हर घर को देंगे 17 अंकों वाला यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर
जीआईएस सर्वे के दौरान शहर के सभी वार्डों में नए सिरे से मकानों की नंबरिंग की जाएगी। हर घर को 17 अंकों का यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर भी दिया जाएगा। इसमें चार अंकों का मोहल्ला/कॉलोनी का कोड रहेगा। वार्डों में एक सड़क से दूसरी सड़क तक पॉकेट बनाकर मकान नंबर एलाट किए जाएंगे। इसका सर्वाधिक लाभ अल्लापुर, राजरूपपुर जैसे मोहल्लों में होगा, जहां मकान नंबर खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है।
शासन ने राजस्व वृद्धि और कर मामलों के विवादों में कमी लाने के उद्देश्य से जीआईएस आधारित प्रापर्टी सर्वे कराने का निर्णय लिया है। कंपनी ने काम शुरू कर दिया है। नए साल में मकनों के नंबर तो बदलेंगे ही, सभी भवनों की यूनिक आईडी भी जनरेट की जाएगी। एक क्लिक पर भवनों का ब्यौरा ऑनलाइन होगा।
- रवि रंजन, नगर आयुक्त