‘घर वापसी के गीत’ में दिखा वतन से दूरी का दर्द
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सॉफ्ट पॉवर आर्ट एंड कल्चर की ओर से सांस्कृतिक केंद्र में बुधवार को पश्चिम बंगाल की टीम एएलटी एंड टीम ने ‘घर वापसी के गीत’ नाटक के मंचन के माध्यम से वतन से दूरी का दर्द बखूबी बयां किया। संस्था के पांच दिनी लोक नाट्य महोत्सव के समापन पर प्रोबीर गुहा के निर्देशन में कलाकारों ने सशक्त अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
कथासार के मुताबिक आजादी के बाद देश के बंटवारे में दूसरे देश में जाकर लोग किस तरह काम की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे। न किसी के पास रहने को घर और न ही खाने को भोजन। इसके बावजूद अपने वतन के वापसी की बात सोचते हैं तो उनके मन में विभिन्न ख्याल आते हैं और तब वे गीत गुनगुनाते हैं। नाटक में अफतार अली, शिल्पी सरकार, पन्ना मांडल, अर्पिता वर्मन, मोहन घोस, बाबुल पॉल, सपना घोष, संचयिता बसु, विकास बोस, रिया दास, अरुण मुखर्जी, आलोक रंजन, शुभादीप ने अभिनय किया।
केंद्र निदेशक गौरव कृष्ण बंसल मुख्य अतिथि और हर्षवर्धन बाजपेयी विशिष्ट अतिथि थे। संस्था सचिव ज्ञान चंद्र यादव ने स्वागत, राज जायसवाल-निशांत रस्तोगी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में डॉ.राजन सम्दरिया, पंकज पांडेय, श्याम गुर्जर, केपी उपाध्याय, सीमा रंजन, पुष्पेंद्र राजपूत, विजय बहादुर, नवीन मिश्रा, पवन उपाध्याय, जिलाजीत सिंह, सोना पांडेय, विकास मौर्या ने मौजूदगी दर्ज कराई।