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होम आइसोलेशन : मरीजों के साथ अस्पतालों को भी राहत

Tue, 04 Aug 2020 12:39 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 04 Aug 2020 12:39 AM IST
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Home isolation: relief to patients as well as hospitals
आइसोलेशन बेड। - फोटो : amar ujala
जिले में होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू होने से अस्पतालों पर बोझ कम होने लगा है। रोजाना पॉजिटिव आने वाले 70 फीसदी तक लोग होम आइसोलेशन में जा रहे हैं। घर पर इलाज कराने वालों की संख्या सबसे अधिक शहरी क्षेत्र की है। अब तक 826 लोग होम आइसोलेट किए जा चुके हैं। 
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प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद होम आइसोलेशन की सुविधा जिले में 24 जुलाई से शुरू हुई है। बीते कुछ दिनों से संक्रमितों की संख्या में लगातार वृद्धि होने लगी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने रेलवे, बेली, यूनानी मेडिकल कॉलेज को संचालित करने के साथ कालिंदीपुरम स्थित क्वारंटीन सेंटर को भी हॉस्पिटल में बदल दिया। एसआरएन, बेली, कालिंदीपुरम में पॉजिटिव की संख्या पौने दो सौ से अधिक पहुंच गई थी।
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कोटवा-बनी फुल हो गया था। रेलवे अस्पताल में भी मरीजों की संख्या सौ के करीब पहुंच गई थी। इससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को बेड कम पड़ने की चिंता सताने लगी थी। लेकिन, होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू होने से इस समस्या से काफी हद तक राहत मिली और कोविड अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी कम हो गई। 
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आंकड़ों पर यदि गौर करें तो रविवार को चार सौ मरीज सभी अस्पतालों में भर्ती थे, जबकि होम आइसोलेशन में 826 लोग जा चुके थे। इस प्रकार होम आइसोलेशन में जाने वाले मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषि सहाय कहते हैं कि यह सही है कि होम आइसोलेशन होने से अस्पतालों पर बोझ कम हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। अस्पतालों में आने से सारे पॉजिटिव एक छत के नीचे आ जाते हैं, लेकिन होम आइसोलेट रहने पर सबकी निगरानी करना कठिन काम है। रैपिड रिस्पांस टीमों पर बोझ बढ़ा है, क्योंकि बहुत से मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी हालत 24 से 48 घंटे में अचानक बिगड़ जाती है। ऐसे लोगों को संभालना मुश्किल हो जाता है। 

इन्हें है होम आइसोलेशन की सुविधा

होम आइसोलेशन की सुविधा उन्हीं लोगों को दी जा रही है, जोकि बिना लक्षण अथवा हल्के लक्षण वाले हैं। जिन मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है या और कोई क्रॉनिक बीमारी है तो उन्हें इसकी छूट नहीं है। हालांकि होम आइसोलेट रहने के लिए कई शर्ते भी निर्धारित की गईं हैं। उसको पूरा करने के बाद ही संक्रमित इसका लाभ उठा सकता है। जैसे कि उसके पास परिवार से अलग कमरा और शौचालय होना, एंड्रायड फोन और होम आइसोलेशन एप डाउनलोड कर उसे चलाना आना, दवाओं की किट सहित कई चीजें अनिवार्य हैं। ऐसी सुविधा ज्यादातर शहरी लोगों के पास ही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अलग शौचालय की सुविधा कम है। इसके चलते भर्ती होने वालों में ग्रामीण क्षेत्र के लोग अधिक है।
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