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- एएमए में होली मिलन, बही काव्य रस की धारा
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Mon, 27 Mar 2017 01:40 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) की ओर से रविवार की शाम होली मिलन समारोह रूपी ठंडई में काव्य रस की धारा ने मिठास घोल दी। रंग, भंग के बीच गुलाल उड़ाकर नामचीन रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का खूब मनोरंजन कर वाहवाही बटोरी। व्यस्तता के बीच कुछ फुर्सत के पल बचाकर वहां जुटे डॉक्टरों ने भी अपना हुनर दिखा तालियां बटोरीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री अशोक चक्रधर ने हास्य व्यंग की रचना की प्रस्तुति से महफिल लूट ली।
पद्मश्री अशोक चक्रधर ने बेरोजगारी के कारण बढ़ती संवेदनहीनता को रेखांकित करती रचना पाठ कर ‘ पुल पर चलते आदमी को किसी ने आवाज लगाई, बचाओ!, मैं मरना नहीं चाहता, बड़ी महंगी ये जिंदगी है, कल ही तो एबीसी कंपनी में मेरी नौकरी लगी है। इतना सुनते ही पुल वाले आदमी ने रस्सी ऊपर खींच ली और उसे मरता देख अपनी आंखें मींच ली। दौड़ता-दौड़ता वह एबीसी कंपनी पहुंचा और बोला, आपका एक आदमी डूब के मर गया है, इस तरह वह एक जगह खाली कर गया है। ये मेरी डिग्रियां संभालें, मैं बेरोजगार हूं, उसकी जगह मुझे लगा लें।
अफसर हंसा, बोला देर कर दी, दस मिनट पहले उसे नौकरी दे दी, जो नदी में गिरा उसे धक्का देकर आया‘सुना लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। संचालन करते हुए कवि यश मालवीय ने ‘ये कैसी बारिकियां, कैसे तंज महीने की प्रस्तुति कर तालियां बटोरीं। वहीं युवा कवि श्लेष गौतम ने योग और रोग से जुड़ी रचना सुनाई तो लोग वाह वाह करने लगे। सीएम पांडेय, डॉ. प्रकाश खेतान और और गीता सिंह ने काव्य प्रस्तुतियों से दिल जीत लिया। मुख्य अतिथि एडीए उपाध्यक्ष देवेंद्र पांडेय ने इस तरह के आयोजनों को भाईचारे की मिसाल बता कहा कि साहित्य और काव्य दिलों को जोड़ता है। विशिष्ट अतिथि एसपी सिटी विपिन टाडा रहे। स्वागत एएमए अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा व सचिव डॉ. त्रिभुवन सिंह तथा डॉ. युगांतर पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।
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पद्मश्री अशोक चक्रधर ने बेरोजगारी के कारण बढ़ती संवेदनहीनता को रेखांकित करती रचना पाठ कर ‘ पुल पर चलते आदमी को किसी ने आवाज लगाई, बचाओ!, मैं मरना नहीं चाहता, बड़ी महंगी ये जिंदगी है, कल ही तो एबीसी कंपनी में मेरी नौकरी लगी है। इतना सुनते ही पुल वाले आदमी ने रस्सी ऊपर खींच ली और उसे मरता देख अपनी आंखें मींच ली। दौड़ता-दौड़ता वह एबीसी कंपनी पहुंचा और बोला, आपका एक आदमी डूब के मर गया है, इस तरह वह एक जगह खाली कर गया है। ये मेरी डिग्रियां संभालें, मैं बेरोजगार हूं, उसकी जगह मुझे लगा लें।
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अफसर हंसा, बोला देर कर दी, दस मिनट पहले उसे नौकरी दे दी, जो नदी में गिरा उसे धक्का देकर आया‘सुना लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। संचालन करते हुए कवि यश मालवीय ने ‘ये कैसी बारिकियां, कैसे तंज महीने की प्रस्तुति कर तालियां बटोरीं। वहीं युवा कवि श्लेष गौतम ने योग और रोग से जुड़ी रचना सुनाई तो लोग वाह वाह करने लगे। सीएम पांडेय, डॉ. प्रकाश खेतान और और गीता सिंह ने काव्य प्रस्तुतियों से दिल जीत लिया। मुख्य अतिथि एडीए उपाध्यक्ष देवेंद्र पांडेय ने इस तरह के आयोजनों को भाईचारे की मिसाल बता कहा कि साहित्य और काव्य दिलों को जोड़ता है। विशिष्ट अतिथि एसपी सिटी विपिन टाडा रहे। स्वागत एएमए अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा व सचिव डॉ. त्रिभुवन सिंह तथा डॉ. युगांतर पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।
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