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Holi 2023 : पहिले घड़ियाल बकैतन क छप्पर फुंकात रहिस, दारागंज में अबहूं गंगा नहाए कर होत है होली

Fri, 17 Feb 2023 07:56 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 Feb 2023 07:56 AM IST
सार

दारागंज में अबहूं गंगा नहाए कर होली होत है। पहले तौ रात में घड़ियाल बकैत टाइप के लोगन के छप्पर और चौकी फूंकात रहिस। खूब हुड़दंग होत रहा। अबउ ओइसै है। सवेरे गंगा नहाय कर होलिका माता के पूजन करके तब होली की शुरुआत होत अहै।

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Holi enthusiasm is different in Prayagraj, Holi latest news, when is Holi
Prayagraj News : होली आई रे। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दारागंज में अबहूं गंगा नहाए कर होली होत है। पहले तौ रात में घड़ियाल बकैत टाइप के लोगन के छप्पर और चौकी फूंकात रहिस। खूब हुड़दंग होत रहा। अबउ ओइसै है। सवेरे गंगा नहाय कर होलिका माता के पूजन करके तब होली की शुरुआत होत अहै। यानी गुरु, प्रयागराज के दारागंज मोहल्ले में अब भी भयंकर होली होती है। विगत 45 साल से जब से हम होस संभाले हैं। तब से होली की इतनी याद जुड़ी है कि अगर हम का मौका मिलै तो हम एक पूरा होली पुराण लिख डारैं। अइर तौ अउर, हम बहुत जगह मथुरा- वृंदावन से लेकर अपने शहर में घूम-घूम कर होली के मजा लिए हैं। लेकिन, हम डंके की चोट पर कह सकीत हैं कि दारागंज के टक्कर के होली कहीं नहीं होत है।

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जैसे सबसे अनोखी बात, दारागंज के अधिकांश घरों में गंगा नहाय कर होली खेलने की परंपरा अबहूं वैसै है। और हम कहीं नहीं देखें कि होली के दिन पहले नहाकर होली होत हो। बचपन में हमारे पिता पंडित धर्मराज पाण्डेय और चाचा पंडित ध्रुव राज पांडेय गंगा नहाय के दर्शन पूजन करने के बाद सब्जी मंडी से टेसू के फूल लेकर आवत रहेन और सागर में घोल देत रहेन। तो हम लोगन क गुस्सा आएवत रहे, की ओकर रंग चटक नय हो रहा। तब चचा हमारो के ओके महत्व बताएं, कि देखो कृष्ण भगवान भी यहीं से होली खेलत रहे। और बहुत पवित्र है। तब हम लोग दो लोटा अपने ऊपर उड़ेल लेते रहे।

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तब तक घर के बड़े मोहल्ले के बुजुर्ग अपने अपने दरवाजे और चौतरा पर रंग घोलकर तैयार रहते। और हम लोग यहां गैस वाली पिचकारी, बोतल वाली पिचकारी ,पीतल वाली पिचकारी के साथ घर में एक छोटा दमकल भी था। जो हमारे बाबा स्वर्गी बचाई महाराज के समय से चलता था। माहौल तब गरम हो जाए। जब दूसरे मोहल्ले के लौंडे आ जाएं सब मुंह में एक ही तरह के कालिक लगाए रहे। जैसे कोई उनका पहचान ना पाए ।दूसरी तरफ वार्निश से सफेदा मुंह में करकेअवय दोनों तरफ से भिड़ंत हो जाए। उनके ऊपर कोई रंग ना लगे। तब हम सब लोग मिलकर गुब्बारा और दमकल से भयंकर रंग बरसा करी तब भाग जाय।

ढोलक मजीरा की आवाज सुनी तब समझ जाए वेणी माधव मंदिर से होली की बरात निकल चुकी है। सब लोग आपन आपन दमकल रंग पिचकारी तैयार करके रखये। बराती अन के बाद ऊपर खूब कसके रंग उड़ेला जाए। भजन करते अरुण शुक्ला और राम जी पंच भैया के नेतृत्व में, बारातियों से गले मिलकर पान बीड़ा से स्वागत किया जाए। और बरात नाग वासुकी मंदिर निकल जाए वापस लौट कर अखाड़ा मठ मंदिर में भी बरात पहुंचे। जहां पर ठंडाई भांग मजूम से स्वागत हो। पहली बार हम मजूमके साथ7, कुल्लड़ ठंडाई पिया। जे के असर भवा कि माधव मंदिर में 4 घंटा एक स्थान पर हम बैठे रहे। लोक समझय की पंडित के लौंडा है।

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कोई अनुष्ठान कर रहा है। बाद में घर वाले उठा के ले आए ।मम्मी बहुत गुस्साए। भैया दूसरे दिन तो और भयंकर होली हो। जब हम थोड़ा बड़े भई तो घर में लड़ाई किए की, दमकल की टक्कर में हम लोग हार जाई थी। काहे की मोरी वाला हल्बी दमकल चलत है। और हम लोग के पतला तब हमारे घर के सदस्य और शंकर जी शर्मा के साथ मिलकर सभी लोगों ने पांच दमकल तैयार कराएं ।तब बाबूराम रस्तोगी के पता चला तो ,उन्होंनेभी हम सब के सहयोग से तीन दमकल बनवाया। और सामने बाबा भंडार में भी तीन दमकल तैयार हुआ ।8,8 सागर रंग घोला जाए। दोनों तरफ दर्जनों दमकल ले के होलिया रे जुट जाए।

का नरिया का नरवा का रंग सब एक हो जाए। दूसरे दिन दोपहर में बदला, पिछले साल की कसर निकाले वाली होली हो ।जो घरों में फूफाजी जीजा मामी, मामा ,साले सालियों के साथ हो। जो और भयंकर हो। इसमें गोबर बम, तुतमलंगा बम ,साड़ी मछली के पानी वाला बम ।ऐसा बम रहा कि, दुनिया के कोनो साबुन लगा लो। लेकिन हफ्ते भर तुम्हारे बगल में कोई बैठ ने सकत रहा। तुतमलंगा बम तो मुंडा करके छोड़त रहा। पहले होली पर दारागंज में दबंग्ग लौंडे खाई के पान बनारस वाला नाकाबंदी के गाना पर कट्टा डांस करें ।और बहुत खुश होने पर बम बाजी भी हो जात रही। शाम के आज भी अड्डा चौराहे पर जितनी भीड़ होती है।

इतना सिर्फ शहर में लोकनाथ पर होता है। पिताजी बता वत रहे की दारागंज की गलियों में प्रसिद्ध कवि निराला जी, पंडित श्री नारायण चतुर्वेदी, डॉक्टर जगदीश गुप्त, के साथ कोठी के राय साहब, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महंत, राकेट साबुन वाले, भोला नाथ चकाहा, खड़िया पंडित, पंडित देवराज पाण्डेय, पशुपति पंडा, नरसिंह मंदिर के महंत, तुलसीदास अखाड़े के महंत, निरंजनी अखाड़े के महंत ,सीताराम गुंठे, सीताराम निषाद, डॉक्टर किट्टू, मुंदरू गुरु ,रम्मू गुरु आदि के द्वारा समय-समय पर दारागंज की होली परंपरा को जीवित रखा गया ।जो आज भी अपनी समृद्ध परंपरा के कारण हो रहा है। -तीर्थ राज पांडेय, परंपरागत मुगदर बरात के संयोजक।

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