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रेलवे का टाइम टेबल बनेगा इतिहास, अब रहेगा डिजिटल एट ए ग्लांस

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 25 Jul 2021 08:36 AM IST

सार

  • रेलवे नहीं करेगा टाइम टेबल का प्रकाशन, वर्षों से छपती आ रही समय सारिणी
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prayagraj news : ट्रेन्स एट ए ग्लांस।
prayagraj news : ट्रेन्स एट ए ग्लांस। - फोटो : sociol media
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विस्तार

यात्री गण कृपया ध्यान दें। रेलवे स्टेशन के बुक स्टॉलों पर मिलने वाली ट्रेनों की समय सारिणी अब उन्हें उपलब्ध नहीं होगी। इसका स्थान अब डिजिटल एट ए ग्लांस लेने जा रहा है। अब इसी के माध्यम से ही यात्रियों को ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान से जुड़ी जानकारी मिलेगी। डिजिटल एट ए ग्लांस का जिम्मा रेलवे ने आईआरसीटीसी को दिया है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर कोचिंग राजेश कुमार की सीएमडी आईआरसीटीसी को पत्र भेजा गया है। उसकी कापी एनसीआर समेत सभी जोनल रेलवे के सीपीटीएम को भेजी गई है।
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रेलवे दो तरह की समय सारिणी का प्रकाशन लंबे समय से करता आ रहा है। ट्रेन एट ए ग्लांस (रेल गाड़ियां एक दृष्टि में) में  देश भर की सभी शताब्दी, राजधानी, दुरंतो, गरीबरथ एवं एक्सप्रेस ट्रेनों का रूटवार उल्लेख रहता है। इसमें प्रमुख स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव आदि भी रहता है। इसी तरह जोनल रेलवे की एक अलग समय सारिणी रहती है। उसमें जोन के सभी छोटे-बड़े स्टेशनों का उल्लेख रहता है। साथ ही एक्सप्रेस के साथ पैसेंजर और मेमो आदि ट्रेनों की भी पूरी जानकारी रहती है। बीते कुछ समय से देश भर की ट्रेनों की जानकारी देने वाले रेलवे के टाइम टेबल की उपयोगिता कम होने एवं नेशनल ट्रेन इनक्वायरी सिस्टम और 139 सेवा का ज्यादा प्रयोग होने की वजह से रेलवे ने अब टाइम टेबल को प्रकाशित न करने का निर्णय लिया है। 


समय सारिणी में रहती है देश के प्रमुख स्थलों की जानकारी
रेलवे की समय सारिणी में ट्रेनों के श्रेणी वार किराया की जानकारी भी यात्रियों को मिलती रही है।  इसके अलावा इसमें देश के प्रमुख दर्शनीय स्थल आदि के बारे में भी यात्रियों को जानकारी मिलती है। यानी कि किस प्रमुख शहर में कौन-कौन से दर्शनीय, धार्मिक आदि स्थल है उसके बारे में समय सारिणी में सभी तरह की जानकारी इसमें समाहित रहती है। रेलवे द्वारा तमाम मदों में लिए जाने वाले जुर्माने की राशि का भी इसमें उल्लेख रहता है।  रेलवे स्टेशनों के बुक स्टॉल खासतौर से एएच व्हीलर में यह किताब 80 रुपये में यात्रियों को उपलब्ध हो जाती रही है। 

देश आजाद होने से पहले हो रहा है प्रकाशन
रेलवे की समय सारिणी का प्रकाशन 15 अगस्त 1927 से हो रहा है। रेल गाड़ियां एक दृष्टि के फ्रंट कवर में भी इसका उल्लेख है। वहीं कुछ वेबसाइटों में इसके 1977 से प्रकाशित होने की जानकारी यात्रियों को दी गई है। पिछले वर्ष कोविड की वजह से इसका प्रकाशन नहीं हो सका था। रेलवे अफसर बताते हैं कि रेलवे की समय सारिणी पूर्व में हमेशा जुलाई से ही प्रभावी होती रही है। एनसीआर जोन में ही हजारों की संख्या में इसकी खपत रहती थी, जो बीते कुछ वर्ष से कम होने लगी।
 
रेलवे बोर्ड का है फैसला
एनसीआर के सीपीआरओ डा. शिवम शर्मा का कहना है कि ट्रेन एट ए ग्लांस न प्रकाशित करने का मामला रेलवे बोर्ड स्तर का है। जोनल रेलवे स्तर पर यह निर्णय नहीं लिया जाता। यह बात सही है कि बोर्ड ने आईआरसीटीसी के सीएमडी को इस संबंध में पत्र भेजा है। 
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