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मुगलकाल में हुआ हिंदी का सर्वाधिक प्रयोग
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Hindi Diwas
- फोटो : CITY DESK
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एडीसी में हुए कार्यक्रम में बोले हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष
प्रयागराज, 13 सितंबर। मुगलकाल में सबसे अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग हुआ। यह बात हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को इलाहाबाद डिग्री कॉलेज (एडीसी) में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
‘भाषा एवं राष्ट्रीय अस्मिता’ विषय पर अपने विचार रखते हुए डॉ. उदय प्रताप सिंह ने बतमाया कि 1909 में महात्मा गांधी ने भी पुरजोर तरीके से कहा था कि हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी ही होनी चाहिए। साथ ही स्पष्ट किया कि हिंदी हमारी संस्कृति का संवहन करती है और संस्कृति संवर्द्धन से ही हिंदी का विकास होगा। मुख्य अतिथि डीआईजी केपी सिंह ने कहा कि भारत ही नहीं, पूरे विश्व में हिंदी भाषी लोग हैं और इससे हिंदी की सशक्तता का आभास होता है। विशिष्ट अतिथि सीओ तृतीय आईपीएस अफसर अमित आनंद ने कहा कि हिंदी के साहित्यकारों का पूर्ण समर्थन किया जाए तो हिंदी भाषा का विकास स्वत: हो जाएगा।
विशिष्ट वक्ता इविवि के वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र ने कहा कि हमारे विचार एवं चिंतन हिंदी भाषा में निर्मित होते हैं, भले ही उनकी अभिव्यक्ति हम अंग्रेजी भाषा में करें। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अतुल कुमार सिंह ने शिक्षकों एवं छात्रों से कहा कि क्लिष्ट हिंदी के बजाय सरल एवं सर्वग्राह्य हिंदी का प्रयोग करें। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. इंदु शर्मा के नेतृत्व में छात्राओं ने गणेश एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालन डॉ. मार्तंड सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रामवर्ण शुक्ल ने किया। इस मौके पर डॉ. पी. दास, डॉ. केके तिवारी, डॉ. एनके जैन, नरेंद्र बाजपेयी, डा. तनुजा तिवारी, डॉ. आनंद कुमार आदि मौजूद रहे।
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प्रयागराज, 13 सितंबर। मुगलकाल में सबसे अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग हुआ। यह बात हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को इलाहाबाद डिग्री कॉलेज (एडीसी) में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
‘भाषा एवं राष्ट्रीय अस्मिता’ विषय पर अपने विचार रखते हुए डॉ. उदय प्रताप सिंह ने बतमाया कि 1909 में महात्मा गांधी ने भी पुरजोर तरीके से कहा था कि हमारे देश की राष्ट्रभाषा हिंदी ही होनी चाहिए। साथ ही स्पष्ट किया कि हिंदी हमारी संस्कृति का संवहन करती है और संस्कृति संवर्द्धन से ही हिंदी का विकास होगा। मुख्य अतिथि डीआईजी केपी सिंह ने कहा कि भारत ही नहीं, पूरे विश्व में हिंदी भाषी लोग हैं और इससे हिंदी की सशक्तता का आभास होता है। विशिष्ट अतिथि सीओ तृतीय आईपीएस अफसर अमित आनंद ने कहा कि हिंदी के साहित्यकारों का पूर्ण समर्थन किया जाए तो हिंदी भाषा का विकास स्वत: हो जाएगा।
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विशिष्ट वक्ता इविवि के वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कांत मिश्र ने कहा कि हमारे विचार एवं चिंतन हिंदी भाषा में निर्मित होते हैं, भले ही उनकी अभिव्यक्ति हम अंग्रेजी भाषा में करें। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अतुल कुमार सिंह ने शिक्षकों एवं छात्रों से कहा कि क्लिष्ट हिंदी के बजाय सरल एवं सर्वग्राह्य हिंदी का प्रयोग करें। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. इंदु शर्मा के नेतृत्व में छात्राओं ने गणेश एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालन डॉ. मार्तंड सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रामवर्ण शुक्ल ने किया। इस मौके पर डॉ. पी. दास, डॉ. केके तिवारी, डॉ. एनके जैन, नरेंद्र बाजपेयी, डा. तनुजा तिवारी, डॉ. आनंद कुमार आदि मौजूद रहे।
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