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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Higher gasoline prices are not falling rupee depreciation

रुपये की कमजोरी से पेट्रोल के ज्यादा नहीं गिर रहे दाम

Sat, 22 Aug 2015 01:34 AM IST
राहुल शर्मा/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
राहुल शर्मा/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 22 Aug 2015 01:34 AM IST
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इलाहाबाद। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लगातार हो रही है। शुक्रवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के भाव साढ़े छह साल के निचले स्तर पर आ गए। अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में ज्यादा कमी क्यों नहीं हो रही है, इसे लेकर शहरी खासे चिंतित हैं। ज्यादातर की जुबां पर यही सवाल है कि अगर इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल तकरीबन 41 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया तो पेट्रोल के दाम में ज्यादा गिरावट क्यों नहीं हो रही है।
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हालांकि जानकारों का यही कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी की वजह से ही देश में कच्चे तेल की कीमत घटने का ज्यादा असर नहीं दिख रहा है। चर्चा यह भी है कि एक निश्चित अवधि के बाद कच्चे तेल के दाम जरूर बढे़ंगे। अगर मौजूदा रेट से दोगुना दाम कच्चे तेल का हो गया तो पेट्रोल की कीमत 150 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को पार कर सकती है।
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तकरीबन सात वर्ष पहले 2008 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत उच्चतम स्तर पर 145.85 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। हालांकि तब पेट्रोल के दाम 55 रुपये प्रति लीटर के आसपास थे। अब जब कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 41 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए है तब भी पेट्रोल की कीमत इलाहाबाद समेत यूपी के तमाम शहरों में 70 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की है। जानकारों के मुताबिक ऐसा इसलिए क्योंकि  डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हुआ जा रहा है।
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वर्ष 2008 में एक डॉलर की कीमत 48 रुपये के आसपास थी, जो अब बढ़कर 65 रुपये से ज्यादा की हो गई है। इसी वजह से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम अप्रत्याशित गिरावट होने के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत ज्यादा नहीं गिरी हैं। उधर इंडियन ऑयल के आंकड़ों पर गौर करें तो रिफाइनरी से तेल कंपनियां तकरीबन 30 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से तेल खरीद रही हैं।  जबकि कंपनी डीलर को लगभग 32 रुपये प्रति लीटर से हिसाब से देती है। गिरावट के बाद वर्तमान में इलाहाबाद में पेट्रोल का खुदरा मूल्य 70.09 रुपये प्रति लीटर है। ऐसे में पेट्रोल

पिछले माह राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल से न्यूनतम वैट राजस्व वसूलने की जो अधिसूचना जारी की है उसके मुताबिक 23 जुलाई से प्रति लीटर पेट्रोल से 26.80 फीसदी या न्यूनतम 16.74 रुपये का वैट वसूला जा रहा है। इसी तरह प्रति लीटर डीजल से 17.48 फीसदी या कम से कम 9.41 रुपये सरकार कमाई करेगी। सरकार के इस निर्णय से आने वाले समय में अगर तेल कंपनियां अगर पेट्रोल की कीमत कम करती हैं तब भी राज्य सरकार के खजाने में न्यूनतम 16.74 रुपये हर हाल में आएंगे। इस वजह से भी पेट्रोल के दाम में मामूली गिरावट ही हो पा रही है।

‘देश में तेल की खपत को पूरा करने के लिए तकरीबन 80 फीसदी तेल आयात होता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पेट्रोल और डीजल पर असर डालती है। रुपये में कमजोरी आने पर कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाता है। वहीं रुपये में मजबूती से आयात सस्ता पड़ता है। वर्तमान समय एक डॉलर की कीमत 65 रुपये के आसपास है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल की कीमत में मामूली गिरावट हो रही है।’
-प्रो. पीएन मेहरोत्रा, पूर्व डीन कामर्स, इविवि

‘तेल की कीमतों पर सरकारी नियंत्रण खत्म होने की वजह से कंपनियां ही इसका दाम तय कर रही हैं। कीमतें नियंत्रण मुक्त होने के कारण कंपनियां पहले अपना फायदा देखती हैं। अगर मान लिया जाए कि दाम 20 रुपये कम हो रहा है तो ग्राहकों को सिर्फ पांच रुपये का ही फायदा होता है। एक निश्चित समय सीमा के बाद क्रूड का दाम बढ़ना तय है। इंटरनेशनल मार्केट में अगर मौजूदा रेट से दो गुनी कीमत आने वाले समय में हो गई तो निश्चित ही पेट्रोल 150 रुपये प्रति लीटर के आसपास आ जाएगा। ’

0 प्रो. पीके घोष, अर्थशास्त्र विभाग, इविवि

‘ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय करती हैं। कंपनियां क्रूड की कीमत, फ्रेट चार्ज, रिफाइनरी कॉस्ट के आधार पर तय करती हैं कि पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता होगा। इसके अलावा एक्साइज डयूटी, वैट और डीलर कमीशन जोड़कर ग्राहकों तक पेट्रोल-डीजल पहुंचता है। हर 15 दिन में कंपनियां ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमत और रुपये के मूल्य के आधार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय करती हैं।’
0 केपी मिश्र, सचिव, ऑल इंडिया एलपीजी फेडरेशन
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