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उच्च शिक्षा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती : उच्च मेरिट की अभ्यर्थियों सिर्फ महिला कॉलेज देने पर जवाब तलब
Mon, 18 Jan 2021 07:19 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 18 Jan 2021 07:19 PM IST
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अदालत
- फोटो : file
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डिग्री कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर पद पर चयनित महिला अभ्यर्थियों को उच्च मेरिट के बावजूद सिर्फ महिला कॉलेज दिए जाने के खिलाफ याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च्तर शिक्षा आयोग और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि इस दौरान याचीगण द्वारा दी गई वरीयता के कॉलेजों में किसी और की नियुक्ति की जाती है तो वह इस याचिका पर होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी। पूजा दुबे व अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने दिया है।
याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याचीगण असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के विज्ञापन संख्या 42 के तहत एजूकेशन विषय में चयनित हैं। उनका मेरिट भी काफी ऊपर है। रेग्युलेशन 2014 के तहत रिजल्टमेरिट के अनुसार घोषित किया जाना चाहिए। इसके अनुसार मेरिट में ऊपर रहने वाली महिला अभ्यर्थी सामान्य कॉलेज और महिला कॉलेज दोनों की वरीयता दे सकती है।
याची संख्या एक ने 29 कॉलेज में वरीयता में दिए जबकि याची संख्या दो ने 34 कॉलेज वरीयता में भरे थे। मगर आयोग ने इनको सिर्फ महिला कॉलेजों के लिए सीमित कर दिया। जबकि अन्य विषयों में ऐसा नहीं किया गया और अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के अनुसार नियुक्ति दी गई।
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कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए आयोग से जवाब मांगा है तथा याचीगण द्वारा दी गई वरीयता के कॉलेजों में की गई नियुक्तियों को याचिका के निर्णय पर निर्भर किया है। याचिका की अगली सुनवाई आठ फरवरी को होगी।
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याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याचीगण असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के विज्ञापन संख्या 42 के तहत एजूकेशन विषय में चयनित हैं। उनका मेरिट भी काफी ऊपर है। रेग्युलेशन 2014 के तहत रिजल्टमेरिट के अनुसार घोषित किया जाना चाहिए। इसके अनुसार मेरिट में ऊपर रहने वाली महिला अभ्यर्थी सामान्य कॉलेज और महिला कॉलेज दोनों की वरीयता दे सकती है।
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याची संख्या एक ने 29 कॉलेज में वरीयता में दिए जबकि याची संख्या दो ने 34 कॉलेज वरीयता में भरे थे। मगर आयोग ने इनको सिर्फ महिला कॉलेजों के लिए सीमित कर दिया। जबकि अन्य विषयों में ऐसा नहीं किया गया और अभ्यर्थियों को उनकी वरीयता के अनुसार नियुक्ति दी गई।
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कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय मानते हुए आयोग से जवाब मांगा है तथा याचीगण द्वारा दी गई वरीयता के कॉलेजों में की गई नियुक्तियों को याचिका के निर्णय पर निर्भर किया है। याचिका की अगली सुनवाई आठ फरवरी को होगी।