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आबकारी सिपाहियों की भर्ती का परिणाम घोषित करने का निर्देश
Thu, 08 Oct 2020 02:05 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2020 02:05 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ को दो माह में आबकारी विभाग के सिपाहियों की भर्ती परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पूरी हो चुकी विजिलेंस जांच में आयोग पर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही विचाराधीन होने के कारण आयोग अनिश्चितकाल तक परीक्षा परिणाम रोके नहीं रह सकता। आपराधिक कार्यवाही पूरी होने में लंबा समय लगना स्वाभाविक है। कार्यवाही के अंतिम निष्कर्ष पर निर्भर करते हुए परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए।
2016 की भर्ती में अनियमितता की जांच व आपराधिक कार्यवाही के चलते आयोग ने परिणाम घोषित करने में असमर्थता प्रकट की थी। हालांकि, पहले आयोग ने कोर्ट को बताया था कि अगस्त 2019 तक परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। अब कोर्ट ने परिणाम घोषित करने के लिए आयोग को दो माह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने आशुतोष दुबे व आठ अन्य की याचिका पर पारित आदेश को संशोधित करने की अर्जी को निस्तारित करते हुए दिया है।
आयोग का कहना था कि विजिलेंस की जांच पूरी हो चुकी है। परीक्षा को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसमें आयोग पर भी आरोप लगे हैं। दो जगहों पर चार्जशीट दाखिल की गई है। आयोग के खिलाफ जांच में पेश फाइनल रिपोर्ट कोर्ट ने अस्वीकार कर दी है और नए सिरे से विवेचना का निर्देश दिया है। ऐसे में परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और परीक्षा परिणाम घोषित करने के आदेश का दो माह में पालन करने का निर्देश दिया है।
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2016 की भर्ती में अनियमितता की जांच व आपराधिक कार्यवाही के चलते आयोग ने परिणाम घोषित करने में असमर्थता प्रकट की थी। हालांकि, पहले आयोग ने कोर्ट को बताया था कि अगस्त 2019 तक परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। अब कोर्ट ने परिणाम घोषित करने के लिए आयोग को दो माह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने आशुतोष दुबे व आठ अन्य की याचिका पर पारित आदेश को संशोधित करने की अर्जी को निस्तारित करते हुए दिया है।
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आयोग का कहना था कि विजिलेंस की जांच पूरी हो चुकी है। परीक्षा को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसमें आयोग पर भी आरोप लगे हैं। दो जगहों पर चार्जशीट दाखिल की गई है। आयोग के खिलाफ जांच में पेश फाइनल रिपोर्ट कोर्ट ने अस्वीकार कर दी है और नए सिरे से विवेचना का निर्देश दिया है। ऐसे में परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और परीक्षा परिणाम घोषित करने के आदेश का दो माह में पालन करने का निर्देश दिया है।
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