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मुस्लिम महिलाओं से क्रूरता है तीन तलाक: हाईकोर्ट

Fri, 09 Dec 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद Updated Fri, 09 Dec 2016 12:57 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन तलाक के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं से क्रूरता है। दुर्भाग्य से इसे मुस्लिम समाज का बड़ा तबका मानता है, हालांकि सभी मुस्लिम इसे नहीं मानते हैं। देश के एक बड़े तबके में प्रचलित यह व्यवस्था भारत को एक राष्ट्र के रूप में विकसित होने से रोकती है क्योंकि भारत सिर्फ भौगोलिक सीमाओं से राष्ट्र नहीं है। कोई भी देश कितना विकसित हुआ है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि समग्र मानव विकास और महिलाओं के साथ व्यवहार में वह कसौटी पर कितना खरा उतरा है।
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कोर्ट ने कहा कि समाज के एक बड़े तबके को ऐसे पर्सनल लॉ की ‘दया’ पर छोड़ना जो लैंगिक असमानता को बनाए रखना चाहता है, समाज को पीछे ले जाने वाला कदम होगा। महिलाओं को पाक कुरान की अपने तरीके से व्याख्या करने वालों की ‘दया’ पर नहीं छोड़ा जा सकता। बुलंदशहर के तहसील रोकन सराय की हिना और एक अन्य उमर बी की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अपने फैसले में यह निरीक्षण दिया।
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कोर्ट ने कहा कि पाक कुरान ‘तलाक या खुला’ की छूट देता है मगर तब जब पति-पत्नी के बीच सुलह-समझौते और साथ रहने के सारे रास्ते बंद हो जाएं। तलाक की वजह बेहद गंभीर होनी चाहिए। मगर कुछ लोग अपने फायदे के लिए गलत तरीके से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कई इस्लामिक देशों में पति को अदालत में तलाक की वजह बतानी होती है। भारत में जिस तरीके से मुस्लिम लॉ का इस्तेमाल हो रहा है, वह पाक कुरान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। हमें जो बात विचलित कर रही है वह यह है कि मुस्लिम पत्नियां हमेशा इसी प्रकार उत्पीड़ित होती रहेंगी, क्या पर्सनल लॉ ऐसी पीड़ित पत्नियाें के लिए हमेशा ऐसे ही क्रूर बना रहेगा। सुप्रीमकोर्ट में तीन तलाक के मामले की सुनवाई हो रही है इसलिए यह अदालत निकाह या तलाक की वैधता पर कोई फैसला नहीं दे रही है।
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दूसरी के लिए पहली को दे दिया तलाक

मुजफ्फनगर की हिना की याचिका में अदालतके सामने जो मुद्दा विचार के लिए आया उसके मुताबिक याची की उम्र 23 वर्ष की है। उसने 53 वर्ष के व्यक्ति से अपनी मर्जी से निकाह किया। कोर्ट को बताया गया कि हिना से निकाह करने से पूर्व उसके पति ने अपनी पहली पत्नी को तीन तलाक के जरिए तलाक दे दिया जबकि पहली पत्नी से उसके नाबालिग बच्चे हैं। अदालत द्वारा तीन तलाक की वजह पूछे जाने पर हिना के पति का जवाब था कि दूसरा विवाह करने के लिए उसने पहली पत्नी को तीन तलाक दे दिया है। दोनों का कहना था कि वे बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी की है। पुलिस और घर वाले परेशान कर रहे हैं। उनके शांतिपूर्ण जीवन यापन में दूसरों को हस्तक्षेप करने से रोका जाए।


 फोन से तीन तलाक देने पर किया दूसरा विवाह
कोर्ट के समक्ष ऐसी दूसरी याचिका श्रीमती उमर बी और अन्य में प्रकरण यह था कि उमर बी का पहला निकाह हसीम मियां के साथ हुआ था जो दुबई में नौकरी करता है। उसने मुस्लिम मियां से दूसरा निकाह किया और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर संरक्षण की मांग की। उमर बी का कहना था कि दूसरा निकाह करने की वजह यह है कि हसीम मियां ने उसे फोन पर तीन तलाक दिया है, जबकि अदालत में उपस्थित उसके पहले पति का कहना था कि उसने कभी उमर बी को तलाक नहीं दिया। वह दुबई में था जब उसे पता चला कि उसकी पत्नी ने दूसरा निकाह कर लिया है तो वह भागकर भारत आया। कोर्ट ने कहा कि यहां यह मुद्दा नहीं है कि याची का दावा सही या गलत मगर वह  अपने दूसरे निकाह को सही ठहराने के लिए तीन तलाक का सहारा ले रही है। जहिर है कि पर्सनल लॉ में पक्षकार, तलाक के प्रावधान का दुरुपयोग कर रहे हैं जो समाज के हित में नहीं है। अदालत ने दोनों मामलों में याचिकाएं खारिज कर दी।
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